मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय









प्रयागराज: 29 जनवरी, 2019

 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आज यहां प्रयागराज कुम्भ मेला क्षेत्र में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

 

आवास विहीन या कच्चे जर्जर आवासों में निवास कर रहे कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता में सम्मिलित किए जाने का निर्णय

 

मंत्रिपरिषद ने आवास विहीन या कच्चे जर्जर आवासों में निवास कर रहे कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता में सम्मिलित किए जाने का निर्णय लिया है। इसके लिए मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को लागू करने हेतु निर्गत शासनादेश संख्या- 06/2018/216/38-4-18-123 (विविध)/2017 दिनांक 02 फरवरी, 2018 के प्रस्तर-2(3) के उपप्रस्तर-2(3.4) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। 

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के कारण छतविहीन एवं आश्रयविहीन परिवार, कालाजार से प्रभावित परिवार, वनटांगिया एवं मुसहर वर्ग के (जिलाधिकारी द्वारा प्रमाणित) परिवार, जे0ई0/ए0ई0एस0 से प्रभावित परिवार एवं अन्य ऐसे परिवार जो मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता से आच्छादित है, परन्तु सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना-2011 के आंकड़ों पर आधारित आवासीय सुविधा हेतु तैयार की गई पात्रता सूची में सम्मिलित नहीं हैं, को निःशुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से शासनादेश संख्या-06/2018/216/38-4-18-123 (विविध)/2017 दिनांक 02 फरवरी, 2018 द्वारा ‘मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ लागू की गई है।

मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे आवास विहीन या कच्चे/जर्जर आवासों में निवास करने वाले कुष्ठ रोगियों को मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से आच्छादित किए जाने पर विचार हेतु आयुक्त, ग्राम्य विकास द्वारा प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है। जनपदों द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 3791 आवास विहीन कुष्ठ रोगी मिले हैं, जो मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की पात्रता श्रेणी में आते हैं, इनमें से 3684 आवास विहीन कुष्ठ रोगी हैं, जिनके पास आवास निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध है तथा 107 ऐसे आवास विहीन कुष्ठ रोगी हैं, जिनके पास आवास निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध नहीं है।

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‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे’ परियोजना के निर्माण के लिए 06 पैकेजों का ई0पी0सी0 पद्धति पर क्रियान्वयन हेतु वित्त पोषण तथा निर्माणकर्ताओं के चयन के लिए प्रस्तुत त्थ्फ.बनउ.त्थ्च् अभिलेख अनुमोदित

 

मंत्रिपरिषद ने ‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे’ परियोजना के निर्माण के लिए इसके 06 पैकेजों को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेण्ट एण्ड कंस्ट्रक्षन (ई0पी0सी0) पद्धति पर क्रियान्वयन हेतु वित्त पोषण तथा निर्माणकर्ताओं के चयन के लिए प्रस्तुत त्थ्फ.बनउ.त्थ्च् अभिलेख को अनुमोदित कर दिया है। 

‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे’ को संरेखण जनपद चित्रकूट में भरतकूप के निकट, झांसी, मीरजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एन0एच0-35 के चैनेज 266.600) से प्रारम्भ होकर जनपद बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, औरैया एवं इटावा होते हुए जनपद इटावा की तहसील ताखा के ग्राम कुदरैल के समीप, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के चैनेज 133.778 पर समाप्त होगा। परियोजना के संरेखण में आने वाले कुल 182 ग्रामों से गुजरने वाले ‘बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे’ की कुल लम्बाई 296.264 कि0मी0 और प्रभावित क्षेत्रफल 3641.6269 हेक्टेयर आकलित किया गया है। एक्सप्रेस-वे के आर0ओ0डब्ल्यू0 की चैड़ाई 110 मीटर होगी। इस परियोजना की कुल लागत 14,716.26 करोड़ रुपए आकलित है। इसमें भूमि क्रय एवं तत्सम्बन्धित खर्च हेतु 2415 करोड़ रुपए का अनुमान किया गया है। 

इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बुन्देलखण्ड के जनपदों के लिए प्रदेष की राजधानी से ‘आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे’ एवं यमुना एक्सप्रेस-वे के माध्यम से देष की राजधानी तक त्वरित गति की सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। एक्सप्रेस-वे के निर्माण के उपरान्त सम्पूर्ण प्रदेष में सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रषस्त होगा। 04-लेन प्रवेष नियंत्रित एक्सप्रेस-वे होने के कारण इस एक्सप्रेस-वे से ईंधन की महत्वपूर्ण बचत एवं प्रदूषण नियंत्रण भी सम्भव हो सकेगा। 

परियोजना से आच्छादित क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ ही कृषि, वाणिज्य, पर्यटन तथा उद्योगों कोे बढ़ावा मिलेगा। यह एक्सप्रेस-वे विभिन्न उद्योगों की स्थापना हेतु एक उत्प्रेरक के रूप में सहायक होगा। एक्सप्रेस-वे के निकट इण्डस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, षिक्षण संस्थान, मेडिकल संस्थान आदि की स्थापना हेतु भी अवसर उपलब्ध होंगे।

एक्सप्रेस-वे के निर्माण में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पर्यटन विकास को बल मिलेगा एवं विकास से वंचित इस क्षेत्र का सर्वांगीण एवं बहुमुखी विकास सम्भव हो सकेगा। परियोजना के क्रियान्वयन तथा उसके समीप षिक्षण संस्थाओं, कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 50000 व्यक्तियों के लिए रोजगार सृजन की सम्भावना है।

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गोरखपुर लिंक एक्सपे्रस-वे परियोजना के ई0पी0सी पद्धति पर क्रियान्वयन हेतु प्रस्तावित वित्त पोषण तथा परियोजना के दोनों पैकजों के निर्माणकर्ताओं के चयन सम्बन्धी तैयार किये गये त्थ्फ.बनउ.त्थ्च् बिड अभिलेखों का अनुमोदन

 

मंत्रिपरिषद ने ‘गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना’ के दो पैकेजों को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेन्ट एण्ड कन्सट्रक्शन (ई0पी0सी0) पद्वति पर क्रियान्वयन हेतु वित्त पोषण तथा निर्माणकर्ताओं के चयन के लिये तैयार किये गये त्थ्फ.बनउ.त्थ्च् अभिलेख पर अनुमोदन प्रदान कर दिया है। 

‘गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना’ की आंकलित सिविल कार्य निर्माण लागत लगभग  5,555.16 करोड़ रुपये है। उक्त धनराशि के लिये विभिन्न बैंकों से लगभग  2,275.00 करोड़ रुपये के ऋण लिया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के लिये वांछित भूमि के लिये कुल 1,563.90 करोड़ रुपए की धनराशि का आंकलन किया गया है, जिसे शासन से प्राप्त किया जाना प्रस्तावित है। इस एक्सप्रेस-वे की लम्बाई 91.352 कि0मी0 और कुल प्रभावित क्षेत्रफल 987.481 हेक्टेयर अनुमानित किया गया है।

परियोजना क्रियान्वयन के लिये परियोजना के दो पैकेजों हेतु पृथक-पृथक आर0एफ0क्यू0-कम-आर0एफ0पी0 जारी कर तथा उनके सापेक्ष हेतु प्राप्त बिडों के आधार पर कान्ट्रेक्टर्स का चयन किया जाएगा। उक्त बिड प्रक्रिया के समय सारिणी के अनुसार न्यूनतम 45 दिनों का समय लगना संभावित है। 

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से गोरखपुर तथा आस-पास के जनपदों के लिये प्रदेश की राजधानी तथा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, एवं यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से देश की राजधानी तक त्वरित गति की सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध होगी। 04-लेन प्रवेश नियंत्रित इस लिंक एक्सप्रेसवे से ईधन की महत्वपूर्ण बचत एवं प्रदूषण नियंत्रण भी संभव हो सकेगा। परियोजना से आच्छादित क्षेत्रों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ ही कृषि, वाणिज्य, पर्यटन तथा उद्योगों को बढावा मिलेगा।

प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे आच्छादित क्षेत्रों में विभिन्न उत्पादक इकाईयों, विकास केन्द्रों तथा कृषि उत्पादन क्षेत्रों को प्रदेश की राजधानी एवं राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने हेतु एक औद्योगिक काॅरीडोर के रूप में सहायक होगा। प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे हैण्डलूम उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयोें, कोल्ड स्टोरेज, भंडारण गृह, मंडी तथा दुग्ध आधारित उद्योगों आदि की स्थापना हेतु एक उत्प्रेरक के रूप में सहायक होगा। 

प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के निकट इण्डस्ट्रियल टेªनिंग इंस्टीटयूट, शिक्षण संस्थान, मेडिकल संस्थान आदि की स्थापना हेतु भी अवसर उपलब्ध होंगे। प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से परियोजना आच्छादित क्षेत्रों के पर्यटन विकास को बल मिलेगा एवं विकास से वंचित प्रदेश के इन पूर्वी क्षेत्रों में सर्वांगीण एवं बहुमुखी विकास सम्भव हो सकेगा।

परियोजना के क्रियान्वयन तथा उसके समीप शिक्षण संस्थाओं, कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप में लगभग 10,000 व्यक्तियों के लिये रोजगार सृजन की संभावना है।

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उ0प्र0 कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम 

(इक्कीसवां संशोधन) नियमावली-1965 संशोधित

 

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम-1964 के इक्कीसवां संशोधन दिनांक 11 अप्रैल, 2018 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम (इक्कीसवां संशोधन) नियमावली-1965 को संशोधित करने का निर्णय लिया है। 

कृषि उत्पादों के विपणन में आमूल परिवर्तन की दृष्टि से भारत सरकार द्वारा ।हतपबनसजनतंस च्तवकनबम ंदक स्पअमेजवबा डंतामजपदह ;च्तवउवजपवद - थ्ंबपसपजंजपवदद्ध ।बजए 2017 देश के विभिन्न राज्यों को अपने मण्डी अधिनियमों में संशोधन हेतु प्रेषित किया गया था। इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम-1964 में 11 अप्रैल, 2018 से संशोधन किए गए हैं।

मण्डी समितियों के सदस्यों के चयन तथा सभापति और उप सभापति के चुनाव की व्यवस्था की जाएगी। इसमें मण्डी समिति का सभापति और उप सभापति केवल उत्पादक सदस्यों को चुना जाएगा। मण्डी समितियां स्थानीय स्तर पर निर्णय लेकर स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्य कर सकेंगी।

मण्डियों की स्थापना के क्षेत्र में सहकारी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के उद्देश्य से निजी मण्डियों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया गया है। निजी मण्डी में नई तकनीक तथा कृषि विपणन के क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश भी सम्भावित है। मण्डी परिषद तथा मण्डी समितियों का आॅडिट स्थानीय निधि लेखा परीक्षा के स्थान पर नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षण से कराए जाने की व्यवस्था नियमावली में सम्मिलित की गई है।

नवस्थापित प्रसंस्करण इकाई को छूट देने की जो व्यवस्था है, उसमें अत्यधिक विलम्ब को रोकने के लिए प्रार्थना पत्र दिए जाने हेतु 06 महीने अवधि की सीमा निर्धारित की गई है। 

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एस0जी0पी0जी0आई0, लखनऊ के संकायी सदस्यों एवं गैर संकायी 

अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एम्स के अनुरूप भत्ते अनुमन्य 

 

मंत्रिपरिषद ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ (एस0जी0पी0जी0आई0) प्रदेष ही नहीं देष का एक प्रतिष्ठित सुपर स्पेषियलिटी चिकित्सा संस्थान है। एस0जी0पी0जी0आई0 अधिनियम, 1983 (यथा संषोधित 2007) में इस तथ्य का उल्लेख है कि संस्थान की अतिविषिष्टता के दृष्टिगत संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के संकाय सदस्यों व कर्मचारियों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के समान वेतन, भत्ते व अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। एस0जी0पी0जी0आई0 की प्रथम नियमावली में यह व्यवस्था है कि संकायी सदस्यों एवं गैर संकायी अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतनमान, मंहगाई भत्ते एवं अन्य भत्ते राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर की गई घोषणा के अधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के अनुसार ग्राह्य होंगे।

चैथे वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में दिनांक 01 जनवरी, 1986 से एस0जी0पी0जी0आई0 के संकायी सदस्यों एवं गैर संकायी अधिकारियों और कर्मचारियों को एम्स, नई दिल्ली के समकक्ष संवर्ग के समान वेतन, भत्ते प्रदान किए जा रहे हैं। एस0जी0पी0जी0आई0 के गैर संकायी अधिकारियों ओर कर्मचारियों को शासनादेष दिनांक 15 सितम्बर, 2017 तथा संकायी सदस्यों को शासनादेष दिनांक 27 मार्च, 2018 द्वारा एम्स, नई दिल्ली के गैर शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक संवर्ग के समान वेतन प्रदान किया जा रहा है। एम्स के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक संवर्ग के 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में दिनांक 01 जुलाई, 2017 से भत्ते प्रदान किए जा रहे हैं। 7वें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में दिनांक 01 जुलाई, 2017 से संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के संकायी सदस्यों एवं गैर संकायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उन्हीं दरों एवं शर्तों/प्रतिबन्धों के अनुसार भत्ते अनुमन्य किया जाना प्रस्तावित है, जिस प्रकार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में अनुमन्य किया गया है।

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शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0 ;ैभ्डडन्स्द्ध का संचालन 05 वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एन0डी0डी0बी0) को हस्तान्तरित किए जाने का निर्णय

 

मंत्रिपरिषद ने शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0 ;ैभ्डडन्स्द्ध का संचालन 05 वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एन0डी0डी0बी0) को हस्तान्तरित किए जाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भी लिया गया है कि शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0 का प्रबन्ध एवं संचालन एन0डी0डी0बी0 द्वारा किया जाएगा, जिसमें एन0डी0डी0बी0 को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। 

मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया है कि प्रारम्भिक वर्षों में दुग्ध संघ के संचालन में होने वाली हानि के समक्ष एन0डी0डी0बी0 द्वारा ऋण के रूप में निधि उपलब्ध कराई जाएगी, जो ब्याज सहित शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0 द्वारा एन0डी0डी0बी0 को देय होगी। इसके आलोक में शासन/पी0सी0डी0एफ0 द्वारा काउण्टर गारण्टी प्रदान की जाएगी। शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0 के प्रबन्धन एवं संचालन के लिए एन0डी0डी0बी0 के साथ चतुष्पक्षीय अनुबन्ध किया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री की अध्यक्षता में दिनांक 16 अप्रैल, 2018 को सम्पन्न बैठक में राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड (एन0डी0डी0बी0) के अध्यक्ष व पी0सी0डी0एफ0 के अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। बैठक में विचार-विमर्श के उपरान्त लिए गए निर्णयों के क्रम में दिनांक 01 सितम्बर, 2018 से ‘शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0’ का गठन किया गया। नवसृजित ‘शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0’ का संचालन 05 वर्ष की अवधि के लिए एन0डी0डी0बी0 को हस्तान्तरित किया जाएगा।

इसके लिए पी0सी0डी0एफ0 लि0, दुग्ध आयुक्त एवं एन0डी0डी0बी0 के मध्य इस सम्बन्ध में एक अनुबन्ध किया जाएगा। एन0डी0डी0बी0 द्वारा ‘शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0’ के लिए संग्रहित दूध को कच्चे अवशीतित दूध के रूप में पी0सी0डी0एफ0, मदर डेयरी, अमूल एवं ऐसे अन्य संस्थानों, जो बेहतर मूल्य उपलब्ध करा सकें, को विक्रय किया जाएगा। 

30 हजार लघु एवं सीमान्त महिला दुग्ध उत्पादकों को परियोजना से जोड़ा जाएगा। परियोजना काल के अन्तिम वर्ष में लगभग 75 हजार लीटर प्रतिदिन दुग्ध उपार्जन का लक्ष्य है। ‘शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0’ के लिए परियोजना अवधि 2018-2019 से 2022-23 पांच साल की अवधि के लिए की गई है। अनुमानित कुल परियोजना परिव्यय 46.54 करोड़ रुपए है। ‘शाहजहांपुर महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0’ को प्रदेश का प्रथम महिला दुग्ध संघ होने का गौरव प्राप्त है। इसमें दुग्ध सहकारी समितियां शत-प्रतिशत महिला सदस्यों से है।

 











 



 

 




 

 


 



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