प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की प्रदेश कार्यकारणी की प्रथम बैठक में पार्टी की ओर से आर्थिक व राजनीतिक प्रस्ताव को पेश



लखनऊ,  29/01/2019, दिन मंगलवार 

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की प्रदेश कार्यकारणी की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई । इस बैठक में पार्टी की ओर से आर्थिक व राजनीतिक प्रस्ताव को पेश किया गया । प्रस्ताव को प्रसपा के प्रदेश प्रमुख महासचिव वीरपाल सिंह यादव ने प्रदेश कार्यकारणी के समक्ष प्रस्तुत किया। आर्थिक व राजनैतिक प्रस्ताव का पार्टी के सभी पदाधिकारियों ने ध्वनिमत से समर्थन किया । बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि हमारे सामने चुनौतियां बहुत हैं, हमारे ऊपर हमले भी बहुत हुए हैं लेकिन हमें घबराने की जरुरत नहीं है क्योंकि जनता हमारे साथ है । श्री यादव ने यह भी कहा कि मुझे अपने पार्टी के पदाधिकारियों पर पूरा भरोसा है । हमने 3 महीने से कम समय में जिस तरह का संगठन खड़ा किया है वह ऐतिहासिक है । श्री यादव ने आगे सपा-बसपा गठबंधन पर बात करते हुए कहा कि यह बेमेल गठबंधन है, सच तो यह है कि बसपा सुप्रीमों मायावती ने कभी समाजवादियों का सम्मान नहीं किया बल्कि बसपा सरकार में तो उनपर भयानक जुल्म ढाए गए । उन्होंने यह भी कहा कि यह स्वार्थहित में लिया गया फैसला है जिसका नतीजा चुनावी परिणाम में देखने को मिल जायेगा । सपा-बसपा गठबंधन पर जिन्हें अहंकार है वह जल्द ही चकनाचूर हो जायेगा । भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए श्री यादव ने कहा कि इन लोगों को जनता नकार चुकी है, भाजपा सरकार व मोदी का इकबाल मर चुका है । भाइयों-बहनों बोलने वाले नरेन्द्र मोदी को कोई नहीं सुनना चाहता।  उन्होंने आगे कहा कि आज देश विषम परिस्थितिओं से गुजर रहा है । आज के समय में किसान, मजदूर, अल्पसंख्यक, युवा, महिलाएं, व्यवसायी सभी दुखी हैं । इनकी परेशानी कोई सुनने वाला नहीं है । राजनीतिक पार्टियां सड़कों पर आने के बजाय बंगलों की राजनीति कर रही हैं । हम समाजवादी लोग हैं, हमने आंदोलन कर हमेशा खुद को साबित किया है। संघर्ष के दम पर हमने सरकारें बदली हैं और सत्ता में भी आये हैं । बैठक के अंत में पूर्व केंद्रीय मंत्री जार्ज फर्नांडिस के निधन पर 2 मिनट का मौन रख शोक मनाया गया। इसके बाद श्री यादव ने कहा कि महान समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस के निधन से एक युग का अंत हो गया। ‘रिबेल विद्आउट ए पॉज़’ के नाम से प्रसिद्ध जार्ज साहब की कमी समाजवादी धारा से जुड़े हर आंदोलन को हमेशा महसूस होगी। 

प्रदेश कार्यकारणी की इस बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सैयदा शादाब फातिमा, प्रदेश अध्यक्ष सुन्दर लाल लोधी, पूर्व मंत्री शारदा प्रसाद शुक्ला, महासचिव रामनरेश मिनी, प्रमुख महासचिव वीर पाल सिंह यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष फरहत हसन खां, राष्ट्रीय प्रवक्ता शिव कुमार बेरिया, मुख्य प्रवक्ता डॉ सीपी राय, प्रसपा बौद्धिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मिश्र, महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्चना राठौर, महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष शम्मी वोहरा, प्रदेश महासचिव अभिषेक सिंह आशू, प्रदेश महासचिव अनीता श्रीवास्तव, पूर्व मंत्री कमाल युसूफ मलिक, पूर्व मंत्री,  जयप्रकाश यादव, पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य, पूर्व विधायक मानिक चन्द्र यादव, पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता, लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन कोहली, प्रवक्ता इरफान मलिक ,ई. अरविंद यादव आदि लोग उपस्थित थे।  

    प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) की प्रदेश कार्यकारिणी की प्रथम बैठक (स्थान -लखनऊ, दिनांक -29/01 /19) में पारित                                     

राजनैतिक-आर्थिक प्रस्ताव

साथियों, हम अपने शीर्ष नेतृत्व के साथ ही संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के प्रति इस बात के लिए आभार प्रकट करते हैं कि, उनके संघर्ष व परिश्रम से निर्माण के सीमित अवधि में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने अपने व्यापक जनाधार व लोकप्रियता के बल पर यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि प्रसपा के अभाव में राजनीतिक परिदृश्य में साम्प्रदायिक शक्तियों व सत्ता के विरुद्ध किसी भी मंच, गठबन्धन या संघर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती । आज देश व प्रदेश की राजनीति में प्रसपा (लोहिया) को नकारना चढ़ते हुए सूरज को नकारने जैसा है ।

साथियों, हम अपने शीर्ष व राष्ट्रीय नेतृत्व को इस बात के लिए भी धन्यवाद देना चाहेंगे कि जिस प्रतिबद्धता के साथ उन्होंने अल्प समय में राजनीति में गांधी व लोहिया के सिद्धांतों को मूर्त रूप दिया है, वह न सिर्फ उल्लेखनीय है बल्कि शायद यही वजह है कि इतने अल्प समय में प्रसपा (लोहिया) उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुकी है।

साथियों, प्रसपा (लोहिया) अंतराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व प्रांतीय के साथ ही गांव व बूथ स्तर की समस्याओं को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है । जहां प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने गांव, किसान, नौजवानों, मजदूरों, मजलूमों व अल्पसंख्यकों की लड़ाई लड़ी है वहीं पर प्रसपा ने तिब्बत की समस्या, चीन द्वारा भारतीय भूमि पर किये गए कब्जे, बढ़ते विदेशी व्यापार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटते तेल के दाम के बावजूद भारतीय बाजार में यथावत स्थिर तेल की कीमतों, पाकिस्तान द्वारा जारी आतंकवाद, प्रदूषण व ग्लोबल वार्मिंग जैसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विषयों पर अपना स्पष्ट , सार्थक व निष्पक्ष दृष्टिकोण रखा है। भारत की मोदी सरकार भारत को संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दिलाने एवं हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी को सम्मान दिलाने में असफल रही है । अंतराष्ट्रीय मोर्चे पर सरकार पूर्णतया विफल रही है । विदेश नीति की नाकामी की निशानी है कि हमारे सम्बन्ध अपने मित्र देशों से भी खराब हो गये हैं, या पहले जैसे नहीं रहे । पाकिस्तान और चीन के कब्जे में लाखों वर्गमील जमीन चली गयी, उसे वापस लेने के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया।

साथियों, प्रसपा महान समाजवादी चिंतक लोहिया जी के इस विचार से पूर्णतया सहमत है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई तब तक अपने मुकम्मल अंजाम तक नहीं पहुंच सकती जब तक समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में भी खुशहाली न आ जाए । प्रसपा का यह भी विश्वास है कि सामाजिक न्याय का अर्थ है- उन सभी व्यक्तियों को न्याय उपलब्ध कराना है, जिनके साथ किसी भी प्रकार के सामाजिक भेद-भाव व वर्चस्व के कारण अन्याय हो रहा है । सामाजिक न्याय की यात्रा में बहुत सी जातियां और समुदाय पीछे छूट गए हैं, प्रसपा के गठन का असल मकसद तब पूरा होगा जब तरक्की और खुशहाली आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचेगी । प्रसपा का यह भी मानना है कि सामाजिक न्याय की ये लड़ाई तब सफल होगी जब बिना किसी भेद-भाव के सभी को रोजी-रोटी, रोजगार,सुरक्षा ,मुफ्त दवाई व शिक्षा मिलेगी । हमारा स्पष्ट मत है, ‘जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी'। लेकिन  देश में 1931 की जनगणना में जातिगत आंकड़े आखिरी बार एकत्रित किए गए हैं । 1931 के जातिगत आंकड़ो के आधार पर 2018 में आरक्षण मिल रहा है । प्रसपा का यह विश्वास है कि अगर आज ईमानदारी से जनगणना हो तो दलित, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों की संख्या देश की कुल आबादी की 85 फ़ीसदी होगी । प्रगतिशील समाजवादी पार्टी जातिगत जनगणना के आधार पर आरक्षण की पक्षधर है और यदि प्रसपा अगर सत्ता में आई तो कानून बनाकर जातिगत जनगणना व उसपर आधारित आरक्षण को लागू किया जाएगा जो लोहिया के विशेष अवसर के सर्वमान्य सिद्धांत के अनुरूप होगा ।

साथियों, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी पीड़ित मानवता को किश्तों व सीमाओं में बांट कर नहीं देखती, इसलिए पार्टी जाति, धर्म, सम्प्रदाय, रंग , संस्कृति, भाषा व क्षेत्र के आधार पर होने वाले किसी भी विभेद व भेदभाव का विरोध करती है । प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने राम मनोहर लोहिया की 'सप्तक्रांति' तथा लोकनायक जयप्रकाश की 'समग्र क्रांति' में गहरी आस्था व्यक्त करते हुए समान नागरिक के तौर पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बार -2 दुहराया है । हम यह मानते हैं कि लोगों को यह कहा जाना कतई स्वीकार नहीं है कि उन्हें क्या खाना और क्या पहनना चाहिए और साथ ही यह भी कि देश के मुसलमानों की देशभक्ति पर किसी को सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।

साथियों, प्रसपा का यह मानना है कि साम्प्रदायिक ताकतों द्वारा अयोध्या के बहाने देश को साम्प्रदायिक आग में झोका जा सकता है । क्योंकि पूर्व में भी ऐसा हो चुका है जब ऐसी ही परिस्थितियों में सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देने के बावजूद सरकार उसका पालन नहीं कर सकी और पूरा देश दंगों की आग में जला और हजारों लोगों को जान व माल का नुकसान सहना पड़ा और देश की अर्थव्यवस्था को भारी क्षति हुई ।                                                                   

साथियों, प्रसपा का यह बहुत स्पष्ट मानना है कि किसी भी कीमत पर विवादित भूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना नहीं होनी चाहिए, क्योंकि अब तक बातचीत और आपसी सहमति का कोई नतीजा नहीं निकला, ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार होना चाहिए ।

साथियों, प्रसपा (लोहिया) अपने शीर्ष नेतृत्व की उस मांग का भी पुरजोर समर्थन करती है जिसमें कहा गया है कि सभाष चंद्र बोष, जिन्होंने हरिपुरा अधिवेशन में समाजवाद की जोरदार पैरवी की थी, किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह व वैश्विक महान समाजवादी चिंतकों में अग्रणी डॉ राममनोहर लोहिया को भारत रत्न दिया जाए ।

साथियों, हमारा यह भी मानना है कि, 'केंद्र की भाजपा सरकार ने लोकतंत्र के चारों स्तंभों जैसे विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेस को कमजोर करने का कार्य किया है । यही नहीं, देश के तमाम शैक्षिक संस्थाओं में अनावश्यक हस्तक्षेप कर उसकी गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाया है । सीबीआई, ईडी, आयकर और फेमा जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग दुखद व घृणित है । जिस लोकतंत्र ने नरेन्द्र मोदी को सत्ता दिलाई, मोदी सरकार उसी लोकतंत्र के खतरा बन गई है और लोकतांत्रिक संस्थाओं और देश के बुनियादी मूल्यों को खत्म करने पर तुली है।

साथियों, भाजपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन पिछले तीन साल में करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी छिन गयी। लेकिन उन्हीं के आकड़ें बताते हैं कि केवल साढ़े चार लाख लोगों को रोजगार मिला । लाखों नौजवान बीटेक और बीएड करके घर बैठे हैं मगर कहीं नौकरी नहीं है। भाजपा ने राजनीति को सोशल मीडिया पर भेजे जाने वाले प्रोपेगैंडा में ही इन छात्रों को उलझा दिया है । भाजपा बड़े-बड़े वादे कर सरकार में आई थी । आज बेरोजगारी का क्या आलम है यह किसी से छुपा हुआ नहीं है । सरकार नौकरियां नहीं दे पा रही है और शिक्षकों, आंगनवाडी महिलाओं को लाठियों से पीटा जा रहा है और दूसरी ओर उत्तरप्रदेश में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट भी कानून व्यवस्था एवं मूलभूत आधार रचना के आभाव में नहीं आ पा रहा है । इस कारण युवाओं को नौकरिया नहीं मिल पा रही है । पार्टी का यह स्पष्ट मत है कि देश व प्रदेश की सभी रिक्त पदों को भरा जाना चाहिए। सभी प्रतियोगी परीक्षाएं पारदर्शी व समयबद्ध ढंग से सम्पन्न की जनि चाहिए । पार्टी का यह भी स्पष्ट मत है कि शिक्षा का बाजारीकरण बंद होना चाहिए । प्राथमिक शिक्षा समान, मुफ्त व सर्वसुलभ होनी चाहिए।

साथियों, बेरोजगार ही नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारियों के हितों पर भी डाका डाला जा रहा है । बुढ़ापे का सहारा छीना जा रहा है । हमारी यह बहुत स्पष्ट मांग है कि पुरानी पेंशन की बहाली की जाए एवं 15-20 वर्षो से  संविदा पर कार्य कर रहे संविदा कर्मियों का समायोजन किया जाए ।

साथियों, पार्टी का यह मत है कि,' नौकरियों में कमजोर वर्ग के लिए सिर्फ आरक्षण से सामाजिक समानता और मौकों की समानता के लक्ष्य को पाया नहीं जा सकता, वंचितों के सशक्तीकरण की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ प्राइवेट क्षेत्र पर भी है।' 

साथियों, प्रसपा का यह भी मानना है कि देश में किसानों के लिए स्पष्ट नीति का आभाव है। किसानों को न लाभकारी मूल्य मिल पा रहा है , और न ही सस्ते ऋण, उर्वरक व बीज की सुलभता को लेकर सरकार के पास कोई स्पष्ट नीति है । बाज़ार के आभाव में किसान अपनी फसलों को सड़क पर फेंकने को विवश है । प्रसपा किसानों के हित में एक कारगर किसान आयोग के गठन के लिए प्रतिबद्ध है । साथ ही हमारा यह भी मानना है कि जिस तरह उद्यमी अपने उत्पाद का मूल्य तय करता है, उसी तरह किसानों को भी अपने कृषि उत्पाद का मूल्य तय करने का अधिकार है। अतः प्रसपा यह मानती है कि न्यूनतम समर्थन  मूल्य तय करने का अधिकार सरकार का न होकर किसानों का है।

               साथियों, आज गरीब जनता इलाज के लिए ठोकर खा रही है व भटक रही है । सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर नहीं है । हम गरीब जनता के लिए सर्व सुलभ , सुनिश्चित व निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा चाहते हैं ।

साथियों, प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी लागू करते वक्त कहा था कि इसका मतलब गुड एण्ड सिम्पल टैक्स है लेकिन स्थिति यह है कि इसे ना तो व्यापारी समझ पा रहे हैं और ना ही अधिकारी । जीएसटी लागू होने से महंगाई बेतहाशा बढी है। सिर्फ विदेशी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के लिये इसे लागू किया गया है। अगर प्रसपा सत्ता में आती है तो जीएसटी को व्यापारी, उद्यमी के साथ ही किसान , गरीब- वंचितों के हित में उनके अनुकूल बनाया जाएगा ।

साथियों, प्रसपा (लोहिया) ऐसी आर्थिक नीतियों का पुरजोर समर्थन करती है जिनसे आर्थिक विषमता व बेरोजगारी घटे तथा आर्थिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिले  । साथ ही स्वदेशी तकनीक व पूंजी के माध्यम से आर्थिक विकास का मॉडल चुना जाए।

साथियों, हमारे पार्टी प्रमुख व नेता श्री शिवपाल यादव ने  सरकार में मंत्री रहते हुए अनेकों जनकल्याणकारी कार्य किए थे , जैसे समस्त जिलों को फोर लेन से जुड़वाया । किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था मुफ्त की । नहरों की टेल तक पानी पहुंचाया । किसानों के लिए हर संभव मदद दी । राजस्व कोड जारी किया एवं बेरोजगारी पेंशन व लोहिया पेंशन जैसी योजनाओं से गरीब लोगों को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय दिलाने की मुहीम चलाई। आज सरकार द्वारा वे समस्त जन कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी गयी है । अगर प्रसपा सत्ता में आती है तो इन कार्यों का आगे बढाया जाएगा ।

साथियों, प्रसपा व्यवहारिक दृष्टि अपनाते हुए यह कोशिश करेगी कि अगले आम चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ एक ‘साझा कार्यक्रम' बनाए । प्रसपा देश की उन तथाकथित समाजवादी धारा की पार्टियों की घोर निंदा करती जिन्होंने समाजवादी प्रतीकों को सिर्फ वोट के लिए बंधुआ बना दिया व स्वार्थवश बेमेल समझौते कर लिए हैं ।


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