जनजातीय कार्य मंत्रालय एफआरए 2006 के अंतर्गत एसटीएस तथा ओटीएफडीएस मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देशों को कारगर ढंग से लागू करने पर राज्‍यों के साथ बैठक करेगा

 


अनुसूचित जनजाति (एसटी) तथा अन्‍य पारंपरिक वनवासी (ओटीएफडी), जिनके वन भूमि के अधिकार के दावे एफआरए 2006 के अंतर्गत नामंजूर किये गये हैं, उनके मामले में 28 फरवरी, 2019 को उच्‍चतम न्‍यायालय में सुनवाई हुई। राज्‍यों के अनेक अधिवक्‍ताओं के अतिरिक्‍त जनजातीय कार्य मंत्रालय का प्रतिनिधित्‍व सोलिसिटर जरनल श्री तुषार मेहता ने किया।


सोलिसिटर जनरल ने न्‍यायालय को बताया कि 2014 से मंत्रालय राज्‍यों से कानून प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कहता रहा है। उन्‍होंने राज्‍यों को जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा लिखे गये विभिन्‍न पत्रों के बारे में भी अपनी बात रखी। उन्होंने न्यायालय को बताया कि दाखिल दावों, नामंजूर दावों के संबंध में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया तथा नामंजूर किये गये मामलों का वास्‍तविक ब्‍यौरा पर विचार करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्‍य सरकारों के साथ बैठक का प्रस्‍ताव किया है। न्‍यायालय को राज्‍य स्‍तरीय निगरानी समिति (एसएलएनसी) की संरचना और क्रियाकलापों की जानकारी दी गई।


      उच्‍चतम न्‍यायालय ने नि‍म्‍नलिखिल महत्‍वपूर्ण निर्देश दिया :



  1. बेदखली कार्य से संबंधित 13 जनवरी, 2019 के आदेश पर रोक लगाई गई है, लेकिन भारतीय वन्‍य जीव ट्रस्‍ट के अधिवक्‍ता के अनुरोध पर अतिक्रमण की स्थिति को दर्ज करने के‍ लिए भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) के सेटेलाइट सर्वेक्षण से संबंधित आदेश बहाल रखा गया है।

  2. न्‍यायालय ने आदेश दिया कि राज्‍य सरकारें 10 जुलाई,2019 तक विस्‍तृत हलफनामे दायर करें, जिसमें कार्यालय स‍मीक्षा समितियों के गठन की सूचना, अधिनियम के अंतर्गत दावा आवेदनों पर अपनाई गई प्रक्रियाओं का विवरण और नामंजूर मामलों के विरुद्ध दायर अपीलों का ब्‍यौरा दिया गया हो।   

  3. न्‍यायालय ने प्रत्‍येक राज्‍य में नामंजूरी के निर्णय पर पहुंचने के बाद की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी देने को कहा।


जनजा‍तीय कार्य मंत्रालय माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देशों को कारगर तरीके से लागू करने के लिए 6 मार्च, 2019 को राज्‍य सरकारों के साथ बैठक करने जा रहा है।


 


 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ?