अपर मुख्य सचिव के व्यवहार से खफा राजस्व महासंघ का दीवाली के बाद राज्यव्यापी आन्दोलन जनपदीय इकाईयों को किया गया एलर्ट


लखनऊ 19 अक्टूबर 19। चकबंदी विभाग का राजस्व विभाग में विलय/प्रतिनियुक्ति को लेकर राजस्व विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों में घमासान मचा हुआ है। इस मामले में अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणुका कुमार के विधि विरूद्ध रवेये एवं एकतरफा कर्मचारी विरोध निर्णय से नाराज उ.प्र.प्रदेश राजस्व महासंघ की बैठक डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग में प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सिंह की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई। इसका संचालन संरक्षक निखिल शुक्ला ने किया। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि दीवाली के उपरान्त किसी भी तिथि से राजस्व महासंघ के बैनर तले प्रान्त व्यापी आन्दोलन शुरू किया जाएगा। इसके बााद भी मुख्यमंत्री स्तर पर सकाराात्मक निर्णय नही लिया जाता तो आपात बैठक कर हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक में तहसील स्तर से आए लगभग 350 राजस्व महासंघ के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कहा गया कि इस नियम विरूद्ध 50 हजार से ज्यादा राजस्व कर्मी सरकार के फैसले के विराध्ेा में आन्दोलनरत है। इस फैसले से प्रदेष के 750 तहसीलदार भी नाराज है।
बैठक में मौजूद उ.प्र. राजस्व महासंघ के प्रदेश महामंत्री बृजेश श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ के महामंत्री जितेन्द्र सिंह, राजस्व संग्रह अमीन संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष समर बहादूर सिंह, राजस्व संग्रह अनुसेवक संघ के अध्यक्ष सरजू प्रसाद, उ.प्र. लेखपाल संघ के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सिह यादव,राजस्व महासंघ के कोषाध्यक्ष शम्भू सरन, लेखपाल संघ के कोषाध्यक्ष विनोद कश्यप ने बैठक में बताया कि अपर मुख्य सचिव राजस्व विभाग द्वारा अध्यक्ष राजस्व परिषद को प्रेषित एक पत्र में चकबंदी विभाग के राजस्व विभाग में विलय/प्रतिनियुक्ति सम्बंधी मागें गए अभिमत/ प्रस्ताव का जोरदार विरोध प्रदेश के लगभग 40 हजार अधिकारी कर्मचारी कर रहे है। उन्होंने बताया कि पूर्व में तत्कालीन राजस्व मंत्री अम्बिका चौधरी के कार्यकाल में चकबंदी विभाग का विलय राजस्व विभाग में कराने का काफी प्रयास किया गया था। ज्ञातत्व है कि उस समय भी रेणुका कुमार ही सचिव राजस्व के पद पर कार्यरत थी। , किन्तु कर्मचारी संगठनों के विरोध तथा राजस्व अधिकारियों की पदोन्नति एवं जेष्ठता सम्बंधी खतरे के चलते उक्त प्रयास असफल रहे। कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने कहा कि दोनों विभागों का अपना अपना महत्व है। निस्तारण में और भी जटिलताएं उत्पन्न होगी वही कर्मचारियोंकी जेष्ठता एवं पदोन्नति के मार्ग अवरूद्ध होगें। उन्होंने यह भी बताया कि शासन स्वंय मान रहा है कि चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है,इसे दूर किये जाने की आवश्यकता है, किन्तु इसका हल किसी विभाग का विलय या समायोजन ,आमेलन  या प्रतिनियुक्ति से नही हो सकता। वैसे भी उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ा कृषि क्षेत्र है। जहॉ छोटी छोटी जोते,मिनजुमला जोतें विद्यमान हैं जिन्हें चकबंदी के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। वक्ताओं ने बैठक में कहा कि प्रत्येक 20 वर्षों में चकबंदी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इधर वास्तविकता यह है कि प्रदेश में 1100 ग्रामों में अभी भी प्रथम चक्र की चकबंदी प्रक्रिया प्रारम्भ नही सकी है। इन ग्रामों में लगभग 100 वर्ष (1925) का बन्दोबस्त (अभिलेख) मौजूद है। इन अभिलेखों के नवीनीकरण न होने से भूमि विवाद होते रहते है। चकबंदी प्रक्रिया से निवासियों को, विद्यालय, चकमार्ग,बंजर नाली, ऊसर, चरागाह,खलिहान, खेल मैदान आदि सार्वजनिक उपयोग की भूमियॉ उपलब्ध कराई जाती है।चकबंदी प्रक्रिया एक तकनीकी/ विशेषीकृत प्रक्रिया है, जिस की प्रदेश में अतीव आवश्यकता है। राजस्व विभाग में पहले ही नायब तहसीलदारों के 1234 पदों के सापेक्ष 1000 पद, राजस्व निरीक्षकों के 4281 पदों के सापेक्ष 1000 पद रिक्त है। चकबंदी विभाग के विलय के बाद राजस्व विभाग के काम  काज में गैर अनुभवी कर्मचारी अधिकारियों का विलय हो जाएगा परिणाम स्वरूप प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और ऐसे में भूमि विवाद कम से कम दो गुणा बढ़ जाएगे। बैठक में उ.प्र. राजस्व प्रशासनिक अधिकारी संघ, उ.प्र. राजस्व निरीक्षक संघ, उ.प्र. राजिस्ट्रार कानूनगो संघ, उ.प्र. लेखपाल संघ, उ.प्र. राजस्व संग्रह अमीन संघ, उ.प्र. मिनिस्टीरियल संघ, उ.प्र. कलेक्ट्रेट स्टेनोग्राफर संघ और उ.प्र. संग्रह अनुसेवक संध के पदाधिकारी मौजूद थे।


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