जलाएँ एक दीप


जलाएँ एक दीप
उस दरवाजे, अंधविश्वास
जिसका प्रहरी हो,
एक दीप उस गली के आगे
भूख जहाँ आकर ठहरी हो,
एक दीप उस चबूतरे पर
भारतीयता का जिस पर बसेरा हो,
एक दीप उस कँगूरे पर
फहराता जहाँ तिरंगा मेरा हो,
एक दीप शहीदों की समाधि पर,
एक भीतर भीतर घुमड़ती
परिवर्तन की आँधी पर,
एक दीप 'क्षितिज' पर भी जलाएँ
सृजन की आभा से
नभ-थल आलोकित हो जाएँ,
दीपों की शृंखला बनाएँ
दीपावली सजाएँ, दीपावली मनाएँ।


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