समाधान खोजे!अर्थव्यवस्था की यह गति किस कारण से हुई है......!!

राहुल बजाज का कथन उद्योगपतियों में डर का माहौल है पर उसी सभा में गृह मंत्री अमित शाह कह देते है कि डरने की जरूरत नहीं है कह देने से सब कुछ पटरी पर आ जायेगा?संकट जितना बड़ा है या छोटा है आम से लेकर खास की चुप्पी विस्फोट बन कर न फूटे उसके पहले इन सबालों के जबाब खोजने का वक्त आ गया है।आलोचना या प्रश्न से भागे न ,समाधान खोजे!अर्थव्यवस्था की यह गति किस कारण से हुई है।मन समझाने की और विचारधारा की लडाई नहीं है।
आर्थिक सुस्‍ती के दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए शुक्रवार को एक बुरी खबर आई। दरअसल, चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही में भारत की विकास दर के आंकड़े जारी किए गए।इन आंकड़ों के मुताबिक इस तिमाही में जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया है।
इन आंकड़ों पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हैरानी जाहिर की है. मनमोहन सिंह ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक है. उन्‍होंने जीडीपी के ताजा आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि यह अस्वीकार्य है. मनमोहन सिंह ने कहा, ''हमारे देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 8-9 फीसदी की दर से हो सकती है। लेकिन पिछली दो तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ रेट में गिरावट चिंताजनक है.कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देश की जीडीपी 4.5% तक आ गई है. पिछले 6 साल में ये सबसे कम है. लेकिन बीजेपी किस बात का जश्न मना रही है, क्योंकि उनकी जीडीपी (गोडसे डिवाइसिव पॉलिटिक्स) डबल डिजिट ग्रोथ बताती है।
81 साल के बिजनेसमैन राहुल बजाज ने कहा, '' सरकार कहे या न कहे लेकिन आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन-चार सालों में विकास में कमी आई है।दूसरी सरकारों की तरह वे अपना हंसता हुआ चेहरा दिखाना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यही है।देश का आम आदमी घटते रोजगार के अवसर और बडती महगाई से परेशान है।विकास की गति में अचानक लगे ब्रेक को हटाने के लिए तुरित कदम उठाने की जरूरत है।


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