कविता-हाथ में रोटी, आँख में आंसू...

 


हाथ में रोटी, आँख में आंसू,
सिर पर सामान की गठरी हैं
ऐसी करुणामयी तस्वीर मेरे,
हृदय को द्रवित करती हैं
इनकी वेदना हृदय को,
सम्वेदना से भरती हैं
चिन्ताजनक हालात हैं इनके, मुश्किलें प्रतिदिन बढ़ती हैं
सरकार कोई भी हो मजदूरों के, दर्द को नहीं समझती हैं
दम घोट रही नित रोज यहाँ, मानवता सड़को पर मरती है।


दफन हुये अरमान सभी,
और तुम मुस्कुराते हो
चेहरे पर झूठी संवेदना लिए,
live youtube पर आते हो
स्वयं को स्वच्छ छवि का और, दूसरो को भ्रष्टाचारी बताते हो
बातें बनाना गुरु से सीखा,
तुम भी खूब बनाते हो
कभी-कभी पर झूठे आंसू,
संसद में बहाते हो
काम कुछ करते नहीं,
फर्ज़ी अध्यादेश लाते हो।


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