नन्हे मुन्ने के हाथों में थमाया फावड़ा, मानकों को ताक में रख कराया जा रहा कार्य


मौदहा। हमीरपुर। लॉक डाउन के चलते भुखमरी की कगार में पहुंचे मजदूरों को राहत देने के लिए शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत से होने वाले मनरेगा विकास कार्यों को हरी झंडी दिखा दी थी, जिसके चलते भुखमरी की कगार पर पहुंचे मजदूर वर्ग को कुछ राहत तो मिलती नजर आ रही है, लेकिन विकास कार्यों के मानकों को ताक में रखकर कार्य कराया जा रहा है। जो भी कार्य हो रहे हैं वह मानक विपरीत हो रहे हैं, जोकि महज कुछ ही समय तक यह विकास कर चल सकेंगे। इतना ही नहीं क्षेत्र पंचायत व ग्राम पंचायत द्वारा कराए जा रहे विकास कार्य में बाल श्रम का भी प्रयोग किया जा रहा है, जो कि कानूनन अपराध के दायरे में आता है। जिसके बावजूद भी ग्राम प्रधान धड़ल्ले से छोटे छोटे बालकों के द्वारा कार्य करा रहे हैं, जिससे कि मनरेगा द्वारा मजदूरों की 50 फ़ीसदी से ज्यादा अधिक धनराशि हड़प रहे हैं और सरकार के चलाए जा रहे मजदूरों के काम के अभियान को फेल करने में लगे हैं, जानकारी के मुताबिक माने तो विकासखंड क्षेत्र के कई गांव के प्रधान बिना काम किए जॉब कार्ड धारकों के खातों में मनरेगा धनराशि डाल उन्हें कुछ प्रतिशत धनराशि देकर ही बाकी सब उनसे वापस बैंक से निकलवा कर अपनी जेब भरते हैं। वहीं रात में यही प्रधान जे सी बी द्वारा कार्य कराते है और दिन में मजदूर लगा उसे टिप टॉप कराते हैं। जिससे की ऐसा प्रतीत हो की मज़दूरों द्वारा काम हो रहा है। ग्राम पंचायत का कार्यकाल लगभग पूरा होने को है और इसी बीच सरकार के द्वारा इस महामारी के दौरान भुखमरी की कगार पर पहुंचे मजदूरों को काम दिलाने के लिए मनरेगा द्वारा विकास कार्य शुरू किए गए हैं, लेकिन ग्राम प्रधान मनरेगा द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों से ही अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि जब तक इस महामारी से निजात मिलेगी तब तक उनका कार्यकाल समाप्ति की ओर अग्रसर हो रहा होगा।


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