शिक्षक छात्र के बीच अंतःक्रिया ना होने से संपूर्ण विकास संभव नहीं: सन्तोष त्रिपाठी

ललितपुर।


सरस्वती मन्दिर इण्टर कॉलेज मड़ावरा में कार्यरत सहायक अध्यापक संतोष त्रिपाठी कहते हैं कि कोरोना वायरस विश्व को जिस तरह से अस्थिर कर दिया है उससे ऐसा लग रहा है कि मानव जीवन खतरे की स्थिति महसूस करने लगा है। मानव समुदाय को दैनिक वस्तुओं एवं जीवनदायिनी कार्यों को करने के लिए भारत सरकार ने लगातार हम पहल किए हैं घर-घर दैनिक वस्तुएं लगातार पहुंचते रहे इसके लिए ऑनलाइन सेवाएं प्रदान की गई है।


इस वैश्विक महामारी में भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के द्वारा जो भी पहल किए गए हर एक क्षेत्र में  अकल्पनीय हितार्थ सिद्ध हुए हैं इससे मानव समुदाय को अत्यंत फायदा हुआ है।


छात्रों का शैक्षिक विकास प्रभावित ना हो इसके लिए कई राज्य ने व्हाट्सएप के माध्यम से शिक्षकों के द्वारा राज्य सरकार की अनुशंसा पर ऑनलाइन शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है जिससे छात्र पढ़ते रहें और छात्रों का शैक्षिक सत्र पीछे ना हो यह एक सरकार की नई सोच और एक नई पहल है यह सोच और पहल अच्छी है लेकिन इस तरह की  ऑनलाइन शिक्षा भारत के कुछ बड़े शहरों के लिए उपयुक्त है अभी भी भारत के ऐसे कई क्षेत्र हैं गांव हैं जहां पर समयानुसार बिजली नहीं रहती है और अभी भी 50% ग्रामीण क्षेत्रों में एंड्रॉयड  मोबाइल की सुविधा नहीं है ऐसे बहुत से ग्रामीण परिवेश के लोग हैं जिनके पास मोबाइल तो है लेकिन उसकी सुविधा लेने के लिए उनके पास धन का अभाव है इसलिए इस तरह की ऑनलाइन शिक्षा   चाहते हुए भी हम प्रदेश के 20% से अधिक लोगों को  नहीं पहुंचा सकते हैं सोचने समझने की शक्ति तीव्र होती है वह ऑनलाइन शिक्षा से छात्र के  अंदर सोचने समझने की शक्ति तीव्र होती है वह ऑनलाइन शिक्षा से छात्र के अंदर दमित रह जाएगी जिससे बालक का पूर्ण रूप से विकास नहीं हो सकता है।


मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो 10 वर्ष से लेकर 19 वर्ष के आसपास तक के  छात्रों के अंदर  नकारात्मक विचार ज्यादा प्रबल होते हैं और वह अपने भविष्य के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है इसमें फर्क नहीं कर पाते हैं लगभग साठ से 70% तक छात्र को मोबाइल फोन दे दिया जाए और उनसे पढ़ने के लिए कह दिया जाए तो बच्चे विषय वस्तु पर पूर्ण रुप से ध्यान ना देकर  अन्यत्र छायाचित्र एव वीडियो  पर अपना ध्यान लगाते हैं इससे उनके अंदर धीरे-धीरे नकारात्मक विचार और प्रबल होने लगता है छात्र-छात्राओं के अंदर आत्म विकास को प्रबल बनाने के लिए विद्यालय  जैसे वातावरण में शिक्षक से विषय वस्तु पर संवाद अत्यंत आवश्यक है।


 


 


 


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