मांगों की पूर्ति के लिए बना मंच, चुप नही बैठेगें कर्मचारी शिक्षक और अधिकारी

सेवानिवृत कर्मचारियों का मिला सहयोग पहले सोशल मीडिया से बनाया जाएगा माहौल
अगस्त के बाद करेगें प्रान्तव्यापी आन्दोलन कार्यक्रमों की घोषणा

लखनऊ 07 जून 2020। प्रदेश के बड़े कर्मचारी संगठनों ने मिलकर सरकार के खिलाफ आन्दोलन की तैयारी फिलहाल सोशल मीडिया के माध्यम से शुरू कर दी  है। कर्मचारी ,शिक्षक,अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच का गठन आज प्रदेश के बड़े संगठनों के शीष्र नेतृत्व  द्वारा वीडियों कान्फे्रन्सिग और अन्य माध्यमों से बाॅतचीत के बाद किया गया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी के संयोजकत्व में गठित इस मंच के माध्यम से पहले कर्मचारियों की लम्बित समस्याओं पर सरकार की अनदेखी भत्तों की कटौती और एस्मा जैसी दमनात्मक कार्रवाई पर चर्चा के उपरान्त कार्यकारिणी का गठन किया गया। मंच के समस्त पदाधिकारियों ने एक राय होकर मंहगाई भत्ता सहित अन्य लगभग 15 भत्तों पर सरकार द्वारा कैची चलाए जाने से प्रदेश  के कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारियों की  नाराजगी  देखते हुए आन्दोलन की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारी, शिक्षक कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के छीने गए हक को वापस दिलाने के लिए जमीन तय की जाएगी तथा अगस्त माह में बैठक के उपरान्त प्रान्तव्यापी आन्दोलन कार्यक्रमों की चरणबद्ध घोषणा की जाएगी।
शीर्ष नेतृत्व के द्वारा कोरोना महामारी मे सरकार के सभी लक्ष्यों की पूर्ति में पूर्ण मनोयोग, निष्ठा एवं लगन से अपनी जान की बाजी लगाकर कार्यपूर्ण करने का आहवान किया गया। इस बात पर भी संतोष व्यक्त किया गया कि इस समय सरकारी कार्मिक एवं संस्थान सरकार का पूर्णरूप से साथ दे रहे है। जबकि प्राइवेट सेक्टर पूर्णतः हाथ खड़े कर घरों में दुबका हुआ है। इससे राजकीय कार्मिकों की छबि में निखार आया है। उसका सभी वर्गो द्वारा स्वागत किया जा रहा है।  वीडियों कांन्फेसिंग का संचालन  महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने किया। इस वीडियों कांफेसिंग के जरिये भत्तों के कटौती और सरकार तथा नौकरशाहों की भूमिका पर विचार रखते हुए सभी संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने प्रदेशव्यापी आन्दोलन पर जोर दिया। इस वीडियो कान्फ्रेसिग में अधिकारी महापरिषद के संरक्षक बाबा हरदेव सिंह आदि ने कहा कि  भत्तों की कटौती के लिए चंद नौकरशाह जिम्मेदार है। कान्र्फेसिंग बैठक में सभी वरिष्ठ नेताओं ने अपने अपने संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार के खिलाफ होने वाले आन्दोलन में अपने समर्थन का आश्वासन दिया। इस वार्ता में शामिल परिषद के संयोजक भूपेश अवस्थी ने कहा कि  आन्दोलन की रूपरेखा बनाने एवं निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार रहने का आहवान किया। डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के महासचिव इं. जी.एन. सिंह ने कहा गया कि सरकार के चंद अधिकारियों ने प्रदश्ेा के बड़े कर्मचारी संगठनों की चिन्ता अब और बढ़ा दी है। दरअसल में प्रदेश सरकार कर्मचारियों की किसी भी मांग पर न तो ध्यान दे रही है और नही कर्मचारी संगठनो को विश्वास में लेेकर निर्णय कर रही है। यही चिन्ता का कारण अब सरकार और कर्मचारियों के बीच संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। केन्द्रीय संगठन आयकर राजपत्रित सेवा संघ के जे.पी. सिंह ने कहा कि कोविड 19 महामारी फैलने के पूर्व में परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ते सहित छह भत्तों पर रोक लगाकर सरकार पहले ही कर्मचारियों के प्रति अपनी मंशा प्रर्दशित कर चुकी थी। अब महामारी की आड़ में अन्य 6 भत्तों को पहले स्थगित करने के उपरान्त एक सप्ताह के भीतर समाप्ति का निर्णय लिया जाना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। इस दौरान वार्ता में शामिल विभिन्न संगठनों के कर्मचारी नेता डा. मनोज पाण्डेय, रामलाल यादव, चित्रसेन सिंह, पोस्टल सेवा से वीरेन्द्र तिवारी, धर्मेन्द्र सिंह, आशुतोष कुमार यादव, भारत सिंह यादव,नीलम श्रीवास्तव, आनंद प्रताप सिंह, सुभाष चन्द तिवारी, अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव,राजा भारत अवस्थी, प्रत्युष द्विवेदी, देवर्षि दुबे, संतोष कुमार तिवारी,समर बहादुर सिंह, रामसुरेश सिंह, अशेाक सिंह, के.के. भारतद्धाज, अमिता ़ित्रपाठी, आशीष रंजन गौड़,भूपेन्द्र वर्मा, अवधेश कुमार ंिसंह, सरजूप्रसाद के अलावा सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठनों की तरफ से शिवशंकर दुबे, इं. विष्णु तिवारी, इं. एस.पी. मिश्रा कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वित्त विभाग के कुछ अधिकारी सरकार से कर्मचारियों के विरूद्व ऐसे निर्णय करा रहे है जिससे हर सम्भव स्तर पर कर्मचारी सरकार से नाराज होकर आन्दोलन को बाध्य हो जाए। इसी कारण से उक्त अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से पहले भत्ते स्थगित कराने के बाद उन्हे समाप्त कराने का निर्णय कराया है। संगठन के पदाधिकारियों द्वारा भविष्य निधि की ब्याज दर में कटौती, नई पेंशन स्कीम में सरकार के अंशदान को 14 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत कर देना, सचिवालय विशेष भत्ता समाप्त करना, रिसर्च भत्ता आदि को पूरी तरह खत्म करना उन्हें आन्दोलन के लिए उकसाने के लिए काफी है। आज की वीडियों कान्फेसिंग के माध्यम से समन्वय वार्ता, चर्चा में बड़े कर्मचारी नेताओं का आक्रोष इस बाॅत संकेत है कि लाॅक डाउन खुलने के बाद कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारियों के आन्दोलन की रूपरेखा सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने को तैयार है।

मंच के घोषित पदाधिकारी
कर्मचारी ,शिक्षक,अधिकारी एवं पेंशनर्स अधिकार मंच के गठन की जानकारी देते हुए संयोजक इं. हरिकिशोर तिवारी ने बताय कि मंच में प्रदेश के अधिकाधिक कर्मचारी संगठन का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौपी गई है। इनमें अध्यक्ष डा. दिनेशचन्द्र शर्मा (अध्यक्ष,उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ,) प्रधानमहासचिव सुशील कुमार त्रिपाठी, (अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मिनीस्टीरियल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ), वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस.के. सिंह ( अधिकारी महापरिषद), एन.पी. त्रिपाठी (संयोजक संयुक्त पेंशनार्स समन्वय समित) यादवेन्द्र मिश्रा (अध्यक्ष उ.प्र. सचिवालय संघ,) सतीश कुमार पाण्डेय (अध्यक्ष राज्य कर्मचारी महासंघ),  वीरेन्द्र सिंह चैहान ( अध्यक्ष विश्वविद्यालय शिक्षक संघ), महासचिव शिवबरन सिंह यादव (महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद) , रामराज दुबे (अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासघ) , सुशील कुमार बच्चा (महामंत्री इन्दिरा भवन जवाहर भवन कर्मचारी महासंघ) ,उपाध्यक्ष निखिल शुक्ला (अध्यक्ष तहसीलदार संघ) , रजनीकांत द्विवेदी..( अध्यक्ष ग्राम पंचायत अधिकारी संघ) अवधेश सिंह (अध्यक्ष  विकास प्राधिकारण कम्रचारी  संघ) , नरेन्द्र सिंह नेगी. ( महामंत्री उ.प्र. सरकार स्टेनोग्राफर महासंघ), रामनगीना सिंह ( अध्यक्ष उ.प्र. सांख्यकी परिसंघ) राकेश त्यागी (अध्यक्ष डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ), रामफेर पाण्डेय (अध्यक्ष राजकीय वाहन चालक महासघ) , एस.पी.त्रिपाठी ( अध्यक्ष कृषि विभाग), संगठन मंत्री सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ( अध्यक्ष मिनीस्टीरियल एसोसिएएशन विद्युत सुरक्षा निदेशालय) भारत सिंह यादव ( अध्यक्ष नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ लोनिवि) रामलाल यादव ( अध्यक्ष सिंचाई संघ) प्रेम कुमार सिंह ( अध्यक्ष मिनिस्टीरियल एसोसिएश्यान स्वास्थ ) बनाए गए। इस मंच के संरक्षक का दायित्व बाबा हरदेव सिंह संरक्षक अधिकारी महापरिषद,को सौपा गया है।  


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