गुरु पूर्णिमा दिवस पर गुरु के चरणों में माथा टेका *गुरु की पूजा अर्चना कर लिया आशीर्वाद


ललितपुर।

गुरु पूर्णिमा दिवस पर गुरु के चरणों में उनके शिष्यों ने माथा टेककर तथा गुरु की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। उल्लेखनीय है कि गुरु पूर्णिमा पर्व हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु उत्सव के रूप में भी जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा का उत्सव गुरु के प्रति श्रद्धा, आदर और कृतज्ञता को दर्शाता है। इस बार कोरोना काल में इस उत्सव का रंग थोड़ा फीका रहा किन्तु इसके बावजूद शिष्यों ने अपने गुरु से आशीर्वाद लिया। 

हिंदू धर्म में गुरु और ईश्वर दोनों को एक समान माना गया है। गुरु भगवान के समान है और भगवान ही गुरु हैं। गुरु ही ईश्वर को प्राप्त करने और इस संसार रूपी भव सागर से निकलने का रास्ता बताते हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर व्यक्ति शान्ति, आनंद और मोक्ष को प्राप्त करता है। शास्त्रों और पुराणों में कहा गया कि अगर भक्त से भगवान नाराज हो जाते हैं तो गुरु ही आपकी रक्षा और उपाय बताते हैं। 

गुरु पूर्णिमा महाकाव्य महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। वेदव्यास संस्कृत के महान ज्ञाता थे। सभी 18 पुराणों का रचयिता भी महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी वेद व्यास को दिया जाता है। इसी कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा-आराधना की जाती है। इस उत्सव को लोग बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाते हैं। भारत ऋषियों और मुनियों का देश है जहां पर इनकी उतनी ही पूजा होती है जितनी की ईश्वर की। महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म के चारों वेदों की व्याख्या की थी। 

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