देश प्रेम के पुरोधा प्रेम कृष्ण खन्ना की पुण्यतिथि 3 अगस्त पर श्रद्धा सुमन अर्पित

हमीरपुर। लॉकडाउन को दृष्टि में रखकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अंतर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत देश प्रेम के पुरोधा प्रेम कृष्ण खन्ना की पुण्यतिथि 3 अगस्त पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर भवानी दीन ने कहा कि खन्ना भले ही एक नामचीन परिवार में पैदा हुए हो किंतु वे एक सच्चे देशभक्त थे, खन्ना का जन्म पश्चिमी पंजाब में 2 फरवरी 1894 को रामकृष्ण खन्ना के घर हुआ था, इनके पिता रेलवे विभाग में चीफ इंजीनियर थे, पिता ने प्रेमकृष्ण खन्ना को रेलवे विभाग में ठेकेदारी का काम दिला दिया था, साथ ही सुरक्षा के लिए इनको ब्रिटिश सरकार से एक रिवाल्वर निर्गत करा दिया था, खन्ना का पढ़ाई में मन नहीं लगता था, यह बचपन से ही क्रांतिकारियों और विभिन्न आंदोलनों से जुड़े समाचारों और उनकी जीवनी पढ़ा करते थे साथ ही खन्ना का महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल से संपर्क हो गया था, बिस्मिल ने 1917 में इन्हें शाहजहांपुर सेवा समिति में शामिल कर लिया था, खन्ना बिस्मिल के व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हो गए कि उनके आदर्शों एवं आदेशों के पूरे अनुयायी हो गए बिस्मिल को आजादी के संघर्ष के लिए शस्त्रों के लिए कारतूसो की आवश्यकता पड़ती थी, बिस्मिल खन्ना के शस्त्र लाइसेंस से कारतूस खरीद लेते थे, खन्ना की  बिस्मिल से पक्की मित्रता हो गई थी खन्ना कि 1918 में दिल्ली कांग्रेस मे पहली प्रतिभागिता हुई, कांग्रेस के अधिवेशन में अमरीका कैसे स्वाधीन हुआ नामक पुस्तक की अनेक प्रतियाँ चिल्ला चिल्ला कर बाटी थीं, अब खन्ना को इन्द्रप्रस्थ सेवा समिति का दायित्व दिया गया  असहयोगआंदोलन मे खन्ना की सक्रिय सहभागिता रही, 1922 के चोरा चोरी कांड के बाद गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया, बिस्मिल निराश होकर कांग्रेस से अलग हो गए, खन्ना बिस्मिल के साथ हो गए क्रांतिकारी दल के गठन में खन्ना की अहम भूमिका रही, ये हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे, पार्टी के लिए धन और शस्त्र जुटाने मे पूरा योगदान रहता था, 09 अगस्त 1925 काकोरी कांड मे बिस्मिल को सहयोग दिए जाने के कारण खन्ना को कुल मिलाकर  सात वर्ष की सजा मिली, ये आजन्म अविवाहित रहे, बाद में 40 साल तक कांग्रेस से जुड़े रहे, दो बार विधानसभा और दो बार  लोकसभा सदस्य  रहे, काकोरी के शहीदों की स्मृति में छह शिक्षण संस्थान स्थापित कराए,जीवन भर शहीदों और उनके आश्रितों की मदद करते रहे, देश के प्रति इनके  योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है, कार्यक्रम में राजकुमार सोनी सरार्फ, कल्लू चौरसिया, संदीप सिंह, लल्लन गुप्ता और प्रांशु सोनी आदि उपस्थित रहे।


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