देवेश पटेल :लाखो की नौकरी छोड़ अपनाया खेती को अब दे रहे सेंकड़ों को नौकरी और कमा रहे करोडो

एक तरफ देश के युवा अपने गांव और खेती-बाड़ी को छोड़कर शहरों में नौकरी की तलाश में भड़कते रहते है। दूसरी तरफ ऐसे भी युवा है जो खेती करने के लिए लाखों की नौकरी छोड़ आते है। हम बात कर रहे हैं गुजरात के आणंद जिले के बोरियावी गांव के देवेश पटेल की। जिन्होने लाखों की नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी ताकि वो ऑर्गेनिक खेती कर सकें।

 

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग करने वाले देवेश हल्दी, अदरक, अश्वगंधा, नींबू, सब्जियां और अनाज अपने खेतों में उगाते हैं। हाल ही में उन्होंने इम्युनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी कैप्सूल लॉन्च किया है, जिसकी काफी डिमांड है। और आज का सालाना टर्नओवर 1.25 करोड़ रुपए है।

 

देवेश ने शुरुआत अकेले की लेकिन आज उनके साथ काफी संख्या में दूसरे भी किसान जुड़े हैं।

 

यहीं नहीं कई विदेशी कंपनियां भी उनके साथ निवेश करना चाहती हैं। उनके प्रोडक्ट की सप्लाई अमेरिका में भी हो रही है। देवेश ने बताया कि इस साल मार्च में उन्होने इम्युनिटी पावर बढ़ाने वाली हल्दी के कैप्सूल लॉन्च किया है।

 

देसी हल्दी को प्रॉसेस कर उसके 150 तत्वों को एक्टिव किया। हालांकि, कोरोना के चलते इसकी सप्लाई सिर्फ गुजरात और आसपास के क्षेत्रों तक ही सीमित रही। अब हालात सुधर रहे हैं तो देश भर में इसकी सप्लाई शुरू कर रहे हैं। देवेश ने बताया कि फिलहाल हम रोजाना 5000 कैप्सूल का उत्पादन कर रहे हैं।

 

वैश्विक बाजार में इन कैप्सूल का मार्केट खड़ा करने के लिए न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की कई कंपनियों से बात चल रही है। इस कैप्सूल के लिए हमने 2 साल तक रिसर्च और डवलपमेंट पर काम करने के लिए आणंद कृषि यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया। इसके बाद कैप्सूल का पेटेंट भी करवाया।

 

देवेश की सत्व ऑर्गेनिक कंपनी को अभी तक हल्दी, अदरक और कैप्सूल के लिए पेटेंट मिल गया है। उसी तरह अब बोरियावी गांव में उगने वाले पतरवेलिया के पान के लिए जियोग्राफिकल आइडेंटिटी टैग लेने की कोशिश कर रहे हैं। पतरवेलिया के पान से गुजरात का एक फेमस रस बनता है।

 

कैप्सूल के अलावा देवेश ने चॉकलेट पाउडर की तरह हल्दी का पाउडर बनाया है जिसे दूध में मिलाकर पिया जाता है। इसके लिए उसकी पैकेजिंग और डिजाइन अहमदाबाद में तैयार हो रही है। यह प्रोडक्ट खास तौर पर बच्चों को ध्यान में रखते हुए ही तैयार किया जा रहा है। यूरोप के लोग हल्दी का दूध काफी पसंद करते हैं।

 

देवेश के साथ उनके गांव के कई किसान जुड़े हैं, वे सभी को ऑर्गेनिक खेती के बारे में बताते हैं। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई के चलते देवेश को ऑनलाइन मार्केटिंग समझने में मदद मिली। इसकी वजह से ही सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काफी अच्छे तरीके से मार्केटिंग कर लेते हैं। कम्युनिकेशन स्किल के चलते इंटरनेशनल कम्युनिटी से डील करना भी आसान हो जाता है।

 

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