दो साल की हुई आयुष्मान, गरीब मरीजों को मिला लाभ

1418 मरीजों को हुआ नि:शुल्क इलाज, 1.46 करोड़ का क्लेम भुगतान


0 लॉकडाउन में गरीबों के लिए वरदान बनी योजना, 184 ने कराया इलाज 


हमीरपुर। 23 सितंबर 2020


आयुष्मान भारत योजना ने 23 सितंबर को दो साल का सफर तय कर लिया। इस दौरान योजना कमजोर वर्ग के लिए संजीवनी साबित हुई। कोरोना संक्रमण काल में योजना इलाज से वंचित होने की कगार पर पहुंचने वाले कमजोर वर्ग के मरीजों के खूब काम आई। लॉकडाउन के बाद से बदली परिस्थितियों में अब तक 184 से अधिक कार्डधारकों को उपचार मिल चुका है। जिससे इन्हें नया जीवन मिला है।


आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी डॉ.पीके सिंह ने बताया कि 23 सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत योजना शुरू हुई थी। जिसके आज दो साल पूरे हो गए। इस योजना से गंभीर बीमारियों से जूझने वाले लाभार्थियों को मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध है। यह योजना गरीबों के लिए वरदान साबित हुई है। कोरोना काल में जनपद में 184 कमजोर वर्ग के परिवारों को नि:शुल्क इलाज का लाभ मिला है।


डॉ.सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की सूची शासन से मिली थी। जिसके बाद आशाओं के माध्यम से गांव-गांव जाकर एवं आरोग्य मित्रों द्वारा प्रवासी मजदूरों के आयुष्मान योजना के कार्ड एक्टिवेट कराए गए। इससे कई मजदूरों को इलाज में सुविधा मिली। उन्होंने प्रवासी मजदूर अपना गोल्डन कार्ड जल्द से जल्द बनवाने की सलाह दी है।


 



आयुष्मान योजना : जनपद पर एक नजर 


0 कुल लाभार्थियों की संख्या- 431480


0 अब तक बनाए गए गोल्डन कार्ड- 64541 (83,167 परिवारों के सापेक्ष)


0 अब तक कुल परिवारों को जारी हुए कार्ड- 26012 


0 दो सालों में योजना का लाभ लेकर इलाज कराने वाले लाभार्थी- 1418


खास बात- जनपद में 10 राजकीय और 3 प्राइवेट अस्पतालों में योजना के तहत इलाज की सुविधा उपलब्ध है। अब तक इस योजना से सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों को 1.46 करोड़ के क्लेम का भुगतान किया जा चुका है।


 


इलाज के अभाव में भटकने वालों को मिली मदद 


भरुआ सुमेरपुर ब्लाक के चंदौखी गांव निवासी भिखुआ को यूरोलॉजी का ऑपरेशन होना था। कोरोना की वजह से इलाज में दिक्कत आई। लेकिन जानकारी के अभाव में भिखुआ का पुत्र अमित भटकता रहा। बाद में उसने योजना के डीआईएसएम गौरव निगम से मिलकर मदद मांगी। जिसके बाद आयुष्मान भारत की टीम ने भिखुआ की जिला अस्पताल में कोरोना की जांच करवाते हुए, उसके इलाज में मदद की। कानपुर के कृष्णा हॉस्पिटल में जुलाई माह में भिखुआ का यूरोलॉजी का आपरेशन हुआ। जहां प्राइवेट में 40 से 50 हजार रुपए का खर्चा बताया जा रहा था, वहां भिखुआ का इलाज नि:शुल्क हो गया। अब वो पूरी तरह से स्वस्थ है। इसी तरह जयदेवी (46) निवासी कबरई का 7 जून, बल्देव प्रसाद (38) निवासी मकरांव, श्रीमती सुदामा (40। पत्नी छोटेलाल निवासी टेढ़ा, लीलावती (34) पत्नी जयप्रकाश निवासी राठ को भी कोरोना काल में आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज मिला।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बिहार में स्वतंत्रता आंदोलन : विहंगम दृष्टि

सरकारी पद पर कोई भर्ती नहीं होगी केंद्र सरकार ने नोटिस जारी कर दिया

शौंच को गई शिक्षिका की दुष्कर्म के बाद हत्या