कैसे हैं हम

कैसे हैं हम
ऐसे हैं हम 
या वैसे हैं हम
कभी हसी तो
तो कभी है गम़।।


कैसे हैं हम


कभी मनमौज़ी
कभी बेपरवाह
तो कभी चींता
मे डूबे जैसे हैं हम।।


कैसे हैं हम


कभी शांत मनन
तो कभी क्रोध अग्न
कभी सुस्ती से भरे
तो कभी खूब लगन
पर रहते हैं हम मग्न


कैसे हैं हम।।2।।


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