किसानों पर अंतिम प्रहार किया है मोदी हुकूमत ने : डॉ. अरुण कुमार







पटना। सब लोग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने कहा है कि निजी करण की दिशा में देश को चला रहे दिल्ली के हुकमाराम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की ओर से किसानों पर अंतिम प्रहार किया गया है। सारे उद्योग धंधों पर काबिज होने के बाद अंबानी और अडानी की नजर किसानों पर है इसलिए किसानों को पूंजी पतियों के रहमो करम पर छोड़ा जा रहा है। यदि किसानों और फार्म हाउसों के बीच किसी भी तरह के मसले होती है तो इसका निपटारा डीएम के हवाले कर दिया गया। जो पूंजीवादी सरकार को कुछ नहीं समझ रहे हैं वह भला डीएम को क्या समझेंगे। पूंजी पतियों के साथ किसी भी तरह के विवाद के दौरान वह निश्चित तौर पर किसानों के साथ तो खड़े नहीं होंगे। बीजों का निजीकरण किया जा रहा है।

पटना में मीडिया कर्मियों से खिताब करते हुए डॉ अरुण कुमार ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के साथ जिस तरह की मनमानी कर रही है उसके लिए खासतौर से कमजोर विपक्षी जिम्मेदार हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि इसके लिए खास करके कांग्रेस के साथ साथ लोहिया और जेपी के चेले जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि उन्हें अफसोस है कि समय रहते उन लोगों की मनसा को व नहीं भाप सके थे। मोदी हुकूमत ट्रेन भेजती रही, सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने में हाथ लगा दिया अवाम खामोश रही। अब इसने किसानों में हाथ लगा दिया। इसे किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे। देश में किसानों और मजदूरों को एक साथ मिलकर के मोदी सरकार की मुखालफत करनी होगी। बाकी के नेता और पॉलीटिकल पार्टी कॉरपोरेट हाउस बनकर रह गए है। इनसे जन मुद्दों पर संघर्ष की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।

बिहार में नीतीश हुकूमत की मुखालफत करते हुए उन्होंने खुले अल्फ़ाज़ में कहा कि यह हुकूमत चोरों और लुटेरों की है। लंबे समय से सरकारी योजनाओं को चबा खा रहे हैं। हर जगह हर चीज में लूट मची हुई है। यहां की बहू बेटियों की इज्जत भी खतरे में है। एक ओर सृर्जन घोटाला हो रहा है तो दूसरी ओर और बालिका होम जैसे कांड हो रहे हैं। हर कोई पैसा खा रहा है । हर कोई कमीशन खा रहा है।

डॉ अरुण कुमार ने कहा कि देश की मीडिया की बिक चुकी है। सच्चाई से मुंह मोड़ चुकी है। हम लोग जॉर्ज फर्नांडिस के फॉलोअर्स हैं। सच को सच कहने से बाज नहीं आएंगे। पूरी ताकत के साथ सच्चाई को बयान करेंगे, चाहे जिंदगी रहे या नहीं। आज किसानों को जिस तरह से अपनी गिरफ्त में लिया जा रहा है उसे देखते हुए देश में किसानों और मजदूरों के एक व्यापक आंदोलन की जरूरत है। किसान और मजदूर एक होकर के संस्कृति वादी भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला कर सकते है।











 



 

 











 





 




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