माइनर पर फाल न होने से सैकड़ों एकड़ खेत की सिंचाई बाधित

माइनर नीचे, नाला ऊपर, नहीं पहुंचता खेत तक आसानी से पानी 
-किसानों ने की सिंचाई विभाग खंड प्रथम से फाल बनाने की मांग 
-देउरवां गांव के सामने जमुई माइनर पर फाल न होने बढ़ी परेशानी 
महराजगंज। 
 भले ही हेड से टेल तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। इन रुपयों से पुल-पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। कुलावे भी बनाए जा रहे हैं। लेकिन मिठौरा ब्लाक के देउरवा गांव के सामने जमुई माइनर पर सिर्फ फाल न होने से एक किलोमीटर तक बना नाला किसानों के लिए बेमतलब साबित हो रहा है। न तो कभी नाला में पानी पहंुचता है और न ही इस नाले के पानी से कभी खेत की सिंचाई हो पा रही है। किसान परेशान है। फाल निर्माण के लिए कई बार किसानों ने सिंचाई विभाग से फरियाद की। लेकिन विभाग भी फाल बनाने के लिए तैयार नहीं है। इसे लेकर देउरवा गांव के किसानों में आक्रोश है। किसानों का कहना है कि फाल न बनने से नाला में पानी का डिस्चार्ज नहीं होता। जबकि इस नाले से सैकड़ों किसानों के खेत में पानी आसानी से पहुंच जाती। बावजूद किसानों के इस ज्वलंत समस्या पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है। 
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किसानों के लिए निरर्थक साबित हो रहा नाला 
जमुई से एक माइनर निकली है। यह माइनर जौरहर चिऊटहा जाकर खत्म हो जाती है। इसी माइनर से एक किलोमीटर नाला निकला है। इस नाला के किनारे सैकड़ों एकड़ ऊपजाऊ खेत है। जिसकी सिंचाई इस नाले से आसान हो सकती है। देउरवा गांव के किसान राकेश पटेल, राजेश पटेल, ओमप्रकाश पटेल, धु्रव नारायण पटेल, विनोद गुप्ता, जगदीश पटेल, दिग्विजय पटेल, निखलेश गुप्ता, अखिलेश गुप्ता, रामा का कहना है कि इस नाला में पानी पहंुचाने के लिए बांस-बल्ली से माइनर पर बांध बनाया जाता है। इससे भी नाला में उतना पानी नहीं पहुंचता, जितनी किसानों को जरूरत है। जमुई माइनर पर एक फाल का निर्माण होने से इस नाले में आसानी से पानी पहुंच जाता। जिससे सैकड़ों एकड़ धान और गेहूं की सिंचाई हो जाती। जबकि इस फाल के निर्माण के लिए कई बार सिंचाई विभाग से कहा गया। लेकिन अभी तक फाल निर्माण की कोई कार्यवाही शुरू नहीं की गई। 
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कोट.... 
मौके का मुआयना किया गया है। वहां माइनर पर फाल का निर्माण जरूरी है। इसके लिए करीब 3 लाख रुपए की लागत आएगी। फाल निर्माण के लिए योजना बनाई जाएगी। ताकि नाला में भरपूर पानी पहुंच सके और किसान अपने खेत की सिंचाई कर सके। 
संजय कुमार, एक्सईएन सिंचाई विभाग खंड प्रथम 
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