पौष्टिकता से भरपूर: चंद्रशूर


भाग-दौड़ और व्यस्त जीवन शैली
में अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना
बहुत जरूरी है, जिसे हम आम तौर पर
अनदेखा करते रहते हैं। सभी के लिए
बेहद जरूरी है कि वे पोषक तत्त्वों से
भरपूर आहार खाएं। इसके लिए अपनी
थाली में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें,
जिन में सभी प्रकार के मिनरल्स,
विटामिंस, प्रोटीन, एंटीआॅक्सीडेंट्स,
कैल्शियम, पोटैशियम आदि मौजूद हों।
अगर थोड़ा सा भी ध्यान देंगे तो पता
चल जाएगा कि इस तरह के पोषण देने
वाले सभी खाद्य पदार्थ हमारे आसपास
ही मौजूद हैं। उनमें से एक हैं ‘चंद्रशूर’
जिसे हलीम भी कहा जाता है।
 चंद्रशूर को हिन्दी मंे हालों,
हालिम, चनसुर, चन्दसूर तथा पहाड़ी में
हालों कहा जाता है। अंग्रेजी मंे चंद्रशूर
को काॅमन गार्डन क्रेस, पेपरग्रास,
पेपरवर्टक्रेस, काॅमनक्रेस के नाम से
जाना जाता है। भारत में, हालों को
वैदिक काल से महत्त्वपूर्ण पौष्टिक और
उत्तम औषधि माना गया है और इसे
संस्कृत भाषा में विभिन्न नामों से
पुकारा जाता है जैसे रक्तबीजा, चन्द्रिका,
चर्महत्री, पशुमेहनकारिका, नन्दिनी,
कारवी, भद्रा, वासपुष्पा, सुवासरा।
हमारे देश में हालों गुजरात, उत्तर
प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और
महाराष्ट्र के राज्यों में उगाई जाती है।
हालों का पौधा 45-50 सेंटीमीटर
ऊंचा सीधा, चिकना और वर्षायु होता
है। इसके पत्ते विभिन्न आकार के होते
हैं। इसके फूल छोटे, सफेद रंग के, 2
मि.मी. लम्बे होते हैं। चंद्रशूर का फल
4 मि.मी. व्यास का चपटा होता है।
प्रत्येक फल में 1-2, छोटे, लाल रंग के
बीज होते हैं। हलीम के बीजों को जल
में भिगोने से लुआबदार हो जाते हैं।
इसका पुष्पकाल एवं फलकाल दिसम्बर
से अप्रैल तक होता है।
आपने हालों के पौधे को बाग-
बगीचे आदि में जरूर देखा होगा,
लेकिन कभी गौर नहीं किया होगा।
आयुर्वेद के अनुसार, बेकार-सा दिखाई


ने वाला चंद्रशूर का पौधा एक बहुत ही
उत्तम औषधि है, जिससे बहुत सारे
रोगों का इलाज किया जा सकता है।
आयुर्वेदिक किताबों में चंद्रशूर के सेवन
या उपयोग से सम्बन्धित अनेक उत्तम
बातें बताई गई हैं। बीज, जड़, पत्ते और
पंचांग चन्द्रशूर के उपयोगी भाग हैं आप
हालों के इन भागों का उपयोग कर
सकते है। हिमाचल प्रदेश में ये बीज
किसी भी स्थानीय बाजार
से प्राप्त किए जा सकते हैं।
इसके अलावा हालों को
आसानी से किचन गार्डन
में उगाया जा सकती है।
खेती के बाद केवल 90
दिनों में हालों के बीज एकत्र
किये जा सकते हैं।



पोषक तत्त्व हालों के
बीज देखने में छोटे होते हैं
लेकिन आपको बता दें हालों
के बीज विटामिन ए,
विटामिन सी, विटामिन ई, प्रोटीन,
लौह, कैल्शियम, पोटैशियम, फोलिक
एसिड और आहार फाइबर जैसे पूर्ण
पोषक तत्त्वों से भरपूर होते हैं। 100
ग्राम चंद्रशूर के बीज मंे 25 ग्राम
प्रोटीन, 8.33 ग्राम अघुलनशील रेशा,
100 मि.ली. ग्राम लौह, 268 मि.लीग्राम कैल्शियम, 609 मिली ग्राम
पोटैशियम और 454 कैलोरी होते हैं ।
इन सभी पोषक तत्त्वों के साथ ही हालों
के बीज में एंटीआॅक्सीडेंट, एस्काॅर्बिक
एसिड, फोलिक एसिड और बीटा
कैरोटीन, अच्छा फैट (आॅमेगा: 3 फैटी
एसिड एवं लिग्नंस) भी मौजूद होते हैं।
यह स्वास्थ्य लाभ के लिए बहुत मुख्य
होते हैं।



औषधीय गुण: औषधीय गुण हालों में मौजूद
औषधीय गुणों के कारण ही इसे
आयुर्वेद में एक उत्तम औषधि के रूप
में इस्तेमाल किया जाता है। आइये,
इसमें मौजूद कुछ अहम औषधीय गुणों
पर एक नजर डाल लें, जो कुछ इस
प्रकार है:
एंटीफंगल (फंगल इन्फेक्शन कोखत्म करने वाला), एंटीआॅक्सीडेंट (मुक्त
कणों के प्रभाव को कम करने वाला),
एंटीहाइपरटेन्सिव (बढ़े हुए बल्ड प्रेशर
को कम करने वाला), कोलेस्ट्राॅल
लोवेरिंग इफेक्ट (कोलेस्ट्रोल को कम
करने वाला), एंटीडायबिटिक (ब्लड
शुगर को कम करने वाला),
एंटीथ्रोम्बिक (खून के थक्के जमने की
प्रक्रिया को धीमा करने वाला),
एंटीट्यूमर (बढ़ते हुए ट्यूमर की
रोकथाम करने वाला), गलैटागोग (दूध
के उत्पादन को प्रोत्साहित करने
वाला )
फायदे: फायदे चंद्रशूर के बीजों में हेल्थ
प्रमोटिंग या रोगों से लड़ने की क्षमता
होती है। चंद्रशूर की तासीर गर्म होती
है लेकिन इसका सेवन सही मात्रा में
करने से चंद्रशूर के फायदे आसानी से
मिल सकते हैं। यह हमारे शरीर को
कई तरीकों से फायदा पहुंचाता है। यहां
चंद्रशूर से होने वाले सभी फायदे के बारे
को बहुत ही आसान शब्दों में लिखा
गया है ताकि आप चंद्रशूर से पूरा-पूरा
लाभ ले पाएं।
चंद्रशूर के बीज हीमोग्लोबिन के
स्तर में सुधार करते हैं और एनीमिया
का उपचार करने में मदद करते हैं।
चंद्रशूर के बीजों में ऐसे पोषक तत्त्पाये जाते हैं, जो अनयिमित माहवारी
की समस्या को दूर करने में मदद करते
हैं। हलीम के बीज में फाइटा केमिकल्स
होता है। यह एस्ट्रोजन की तरह काम
करते हैं। जिसकी मदद से अनियमित
माहवारी और इसके दर्द की समस्या
को दूर करने में मदद मिलती है।
चंद्रशूर के बीज का सेवन स्तनपान
करवाने वाली माताओं के लिए
लाभकारी है।
अस्थमा से जुड़ी परेशानियों से
राहत के लिए बीज का उपयोग किया
जाता है। जबकि खूनी बवासीर के
मरीजों को भी इसकी हरी पत्तियों के
सेवन की सलाह दी जाती है।
चंद्रशूर के बीज मधुमेह के इलाज
में मदद करते हैं। शोध में जिक्र मिलता
है कि चंद्रशूर में मौजूद फाइबर और
म्यूसिलेज (गोंद जैसा लसलसा पदार्थ)
की मौजूदगी के कारण यह शरीर में
इन्सुलिन की मात्रा को नियंत्रित कर
सकती है। इसी प्रभाव के कारण शोध
में माना गया है कि चंद्रशूर में
एंटीडायबिटिक (ब्लड शुगर को नियंत्रित
करने वाला) प्रभाव मौजूद होता है।
सेहतमंद हृदय के लिए चंद्रशूर के
बीज के फायदे आप आसानी से ले
सकते हैं। आपको बता दें कि चंद्रशूर के
बीज में ओमेगी-3 फैटी एसिड पाया
जाता है जो दिल को स्वस्थ रखने के
लिए जाना जाता है। हालों के बीज का
सेवन रोजाना सही मात्रा में करने से
खराब कोलेस्ट्राॅल कम होने में मदद
मिलती है।
बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित
करने में भी चंद्रशूर के बीज खाने के
फायदे उपयोगी साबित हो सकते हैं।
शोध में माना गया कि चंद्रशूर में मौजूद
ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिग्नैंस और
डायट्री फाइबर संयुक्त रूप से
एंटीहाइपरटेंसिव (ब्लड प्रेशर कम करने
वाला) प्रभाव प्रदर्शित कर सकते हैं।
इसी प्रभाव के कारण चंद्रशूर के बीज
का सेवन ब्लड प्रेशर की समस्या से
जूझ रहे रोगी को राहत पहुंचा सकता
है।
कैंसर के बढ़ते प्रभाव में हालों के
बीज के फायदे कुछ हद तक सहायक
साबित हो सकते हैं।
चंद्रशूर के बीज में
एंटीइन्फ्लामेट्री (सूजन को
कम करने वाला) गुण होते
हैं। इस गुण के कारण
चंद्रशूर के बीज हड्डी रोगों,
और गठिया का इलाज
करने में भी मदद करते हैं।
चंद्रशूर के बीज शरीर
को डिटाॅक्सीफाई करते हैं।
इसके बीजों का सेवन
वजन को कम करने का
बेहद असरदार तरीका है। सभी लोग
वजन कम करने के लिए अलग-अलग
डाइट, तरीके ढूंढते हैं। अगर आप भी
वजन कम करने की डाइट में कुछ
सेहतमंद शामिल करना चाहतें हैं तो
हालों के बीज एक अच्छा विकल्प हो
सकता है।
यदि आप अपनी डाइट प्लान में
हलीम के बीजों से बने व्यंजन या
इसके बीजों का सेवन करते हैं, तो
आपके बाल झड़ने की समस्या दूर
होगी। इससे आपके बाल घने व
मजबूत होंगे। चंद्रशूर के बीज रोग
प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने में मदद करते
हैं। शरीर को मौसमी बीमारियों से
लड़ने और उन्हें दूर रखने के लिए
अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता की
जरूरत होती है। इसलिए यदि आपअपनी डाइट में हलीम के बीजों को
शामिल करते हैं, तो आपकी रोग
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
चंद्रशूर के बीजों के सेवन से पाचन
तंत्र को सुचारू रूप से काम करने में
मदद मिलती है और कब्ज, अपच की
समस्याओं को दूर रखा जा सकता है।
उपयोग: उपयोग हालों के लाभ जानने बाद, अगर इसे अपने आहार में
शामिल करने का सोच रहे हैं, तो हो
सकता है चंद्रशूर के बीजों का स्वाद
आपको पसंद न आए। हालों के बीजों
का स्वाद सरसों या मूली की तरह
तीखा और चरपरा होता है और चबाने
के बाद बीज मुंह में हल्की कड़वाहट
पैदा करते है। हल्की कड़वाहट तीखा
स्वाद कई लोगों को पसंद नहीं आता।
चंद्रशूर के फायदे शरीर के लगभग हर
एक अंग से जुड़े हुए हैं। इसीलिए, इन्हें
आप कुछ दिलचस्प तरीकों से अपनी
डायट में शामिल कर सकते हैं। यहां
हम आपको चंद्रशूर खाने का सही
तरीका बता रहे हैं।
हालों के बीजों को पानी में भिगो
कर , रोस्टिंग (भून), पाॅपिंग, अंकुरित,
उबाल कर, पाउडर के रूप में ग्रहणकिया जा सकता है। इन प्रसंस्करण
तकनीकों के द्वारा बीजों में से
तीखापन एवं कड़वाहट कम हो जाती
है।
रोस्टिंग, पाॅपिंग, अंकुरित हालों के
बीजों का पाउडर तैयार करके,
अलग-अलग रेसिपी में शामिल कर
सकते हैं । आप हलीम के बीज के लड्डू
बनाकर अपने बच्चों और
परिवार के सदस्यों को
खिला सकते हैं।
नाश्ते के साथ, स्मूदी
के साथ या सलाद के
साथ भी हालों के बीज
खाए जा सकते हैं। चंद्रशूर
के पाउडर को दही व
दलिये में डालकर खा
सकते हैं।
इन स्वास्थ्यवर्धक
देसी बीजों को नियमित
रूप से अपने आहार में शामिल करके
आप अपनी सेहत को हेल्दी रख सकते
है।
महिला को प्रसव के बाद हलीम के
बीजों से बने लड्डू खिलाये जाते हैं। यह
जच्चा-बच्चा दोनों को स्वस्थ रखने में
मददगार है। ध्यान रहे कि चंद्रशूर के
बीज के साथ खूब पानी पिएं।
हालों, के बीज आहार में शामिल
करने के कुछ हफ्तों बाद आपको हालों,
के फायदे दिखने लग जाएंगे। अधिक
मात्रा में सेवन करने से यह पेट में
गड़बड़ी कर सकता है, लेकिन उचित
मात्रा में सेवन करने से शरीर पर कोई
नुकसान नहीं होता है अर्थात आप हालों
के बीज एवं उससे बनने वाले व्यंजनों
का सेवन कर उससे होने वाले फायदे
का भरपूर लाभ उठा सकते हैं।


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