सांवली लड़की


याद है वो लड़की ..
जिसके जन्म पर न सोहर गायी गयी ..
न पटाके दगे ..
न लड्डू बँटे..

याद है वो लड़की ..
सांवली सी ..
बुवा तो कलूटी तक कहती थी ..
जब हाई स्कूल में पचपन प्रतिशत आये थे तो पापा ने भी कहा था ..
तुमसे कुछ न हो पायेगा ...

याद है वो लड़की ..
जिसे लड़के फोटो देख कर ही रिजेक्ट कर देते थे ..
जिसे मोहल्ले के सारे लड़के
ऑन्टी-ऑन्टी कहकर बुलाते थे ..

कल महीने बाद मोहल्ले में आयी तो
फूल बरसाये गये ..
माताओं ने आरती उतारी ..
मोहल्ले के उन लड़कों ने देर तक ताली बजाई ..
क्या सीन था !

उसे भी करोना से बहुत डर लगता है
हम सब की तरह ..
पर वो जानती है ..
उसे लड़नी है ये जंग ..
बिना थके ..बिना हारे ..बिना आँसू बहाये ..

पचपन प्रतिशत लाने वाली सांवली लड़की
अब सफ़ेद सिपाही है मुल्क़ की ..
वो जानती है कि "माँ" होना क्या होता है ..

वो जानती है ये शहर उसका है ..
वो जानती है कि ये मुल्क़ उसका है ।


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