युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के 51वीं एवं राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के 6वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह

 



गोरखपुर 05 सितम्बर, 2020 । गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज के 51वीं एवं राष्ट्रसंत महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज के 6वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज छठवें दिन ‘युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज श्रद्धंाजलि सभा’ की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने कहा कि श्रद्धांजलि का यह समारोह हमें हमारे पूर्वजों का स्मरण करनें का अवसर प्रदान करता है। पूज्य संतों ने गोरक्षनाथ मंदिर व महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के द्वारा क्या सोचा था तथा हमने कितनी दूरी तय की, इन 51 वर्षों में कहां हमने सफलता प्राप्त की और कहां पर हम सफलता से वंचित रह गये यह चिंतन करना बहुत जरूरी है। हमें अपने उन कमियों का मूल्यांकन करना चाहिए जिसके कारण हम सफल नहीं हो पाए। जिससे उन कमियों का परिमार्जन करते हुए हम नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकें तथा लोक मंगल का कारक बन सकें। श्रद्धांजलि का यह अवसर हमें कुछ नया करने के लिए प्रेरित करता है।
 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम जिस स्थिति में हैं उस स्थिति को बनाए रखते हुए उसके आगे के विकास के क्रम में सहभागी बन सके इस हेतु सामूहिक प्रयास करना होगा। एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाते हुए अपनी संस्था को समाज के लोक मंगल तथा आदर्श व प्रेरणा का केंद्र बनाना होगा। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के अधिकतर सपनों को उनको उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज जी ने अपने समय में ही पूरा किया। गोरक्षपीठ का यह स्वरूप, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की प्रगति तथा नाथ पंथ से जुड़े हुए स्थलों के विकास के बारे में चिंतन तथा सनातन धर्म की रक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयास आज भी हम सभी को सत्कर्तव्य के लिए प्रेरित करते हैं। जब हम उन दोनों पूज्य सन्तों के जीवन का अवलोकन करते हैं तो पाते हैं कि वे लोग संपूर्ण जीवन बिना किसी भेदभाव के, बिना किसी जाति धर्म व क्षेत्र को देखकर, निरंतर राष्ट्रहित में तथा भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य किया करते थे। पूज्य संतों के जीवन का जो परम लक्ष्य अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का था, इन पूज्य दोनों संतो के पावन जयंती के अवसर पर यह निर्माण कार्य भी सिद्ध होता दिखाई दे रहा है, निश्चित ही पूज्य दोनों संतो के आत्मा को असीम शांति प्रदान हुई होगी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के प्राचार्यों व शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकगण अपने कार्यक्षेत्र में कुछ ऐसी विशेषता लाएं जिससे आपका कार्य व आपकी संस्था समाज के लिए मानक बन सके। उन्होंने देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी केे प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।



श्रद्धंाजलि सभा के मुख्य अतिथि दिगम्बर अखाड़ा, आयोध्या धाम के महन्त श्री सुरेश दास जी महाराज ने कहा कि जिन महापुरुषों की पुण्यतिथि के अवसर पर हम यहां उपस्थित है वे संत आजीवन सामाजिक समरसता के लिए प्रयास किए तथा रामजन्म भूमि आंदोलन में समाज के प्रत्येक जाति तथा वर्ग के लोगों को साथ लेकर ऐसा पूण्य कार्य किया जिसका संपूर्ण विश्व में कीर्तिमान स्थापित हो रहा है।
अयोध्याधाम से पधारे अनन्त श्रीविभूषित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ होती है। शिक्षा से ही समाज का सृजन होता है तथा राष्ट्र का अभ्युदय होता है व शिक्षा से ही मानव का आत्मिक व आध्यात्मिक उत्थान होता है। ऐसी स्थिति में जब शिक्षा सही दिशा में होती है तभी वह शिक्षा एक सभ्य समाज का निर्माण कर सकती है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर पूज्य संतों ने जो शिक्षा व अध्यात्म का दीप जलाया वह आज भी निरंतर जल रहा है।
कालिका मन्दिर नई दिल्ली के महन्त सुरेन्द्रनाथ ने कहा कि पूज्य संतों ने सुदूर क्षेत्र में शिक्षा के लिए जितना प्रयास किया, जो ज्योति उन्होंने प्रज्वलित की वह उस पूरे क्षेत्र को शिक्षा के माध्यम से प्रकाशित कर रही हैं। उनके द्वारा लगाए गए बीज आज पुष्पित व पल्लवित होकर पूरे समाज को सुभाषित कर रहे हैं।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के तरफ से परिषद के अध्यक्ष प्रो0 यू0पी0 सिंह ने कहा कि जिस समय महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना हुई थी उस समय मैकाले की शिक्षा पद्धति का कुप्रभाव पूरे देश में व्याप्त था उसके प्रभाव को दूर करने के लिए दोनों संतो ने संस्था की स्थापना की व हमें पूरा का पूरा जीवन दर्शन वह एक नई दृष्टि दी। हमारी शिक्षा प्रासंगिक, गुणवत्ता पूर्ण व समाज के लिए उपयोगी हो ऐसा जो महंत दिग्विजयनाथ जी ने पूर्व में शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन की बात की थी वह परिवर्तन नई शिक्षा नीति की माध्यम से आज पूरा होता हुआ दिख रहा है।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थाओं के प्राचार्यों, प्रधानाचार्यों - डॉ० शैलेंद्र प्रताप सिंह, डॉ० प्रदीप कुमार राव, डॉ० सरिता सिंह, कु० अजीथा डी०एस०, डॉ० सुमित्रा सिंह, डॉ० अरविंद कुमार चतुर्वेदी, डॉ० अरुण कुमार सिंह, सुश्री कृष्णा चटर्जी, श्री पंकज कुमार, डॉ० वंदना त्रिपाठी, श्री संदीप कुमार, मेजर पाटेश्वरी सिंह, श्री शिवा जी सिंह, डॉ० अविनाश प्रताप सिंह, श्रीमती दुलारमती सिंह, डॉ० सुनीता श्रीवास्तव, श्री विनय कुमार सिंह, डॉ० चंद्रजीत यादव, श्री केशव त्रिपाठी, श्री मनीष दुबे, श्री रमेश उपाध्याय, श्रीमती सपना सिंह, डॉ० आर०पी० सिंह, डॉ० डी०पी० सिंह, ब्रिगेडियर के०पी०बी० सिंह इत्यादि ने भी पूज्य संतों के प्रति श्रद्धांजलि प्रकट की।
कार्यक्रम मे वैदिक मंगलचारण डाॅ0 रंगनाथ त्रिपाठी, दिग्विजयनाथ स्तोत्र पाठ डाॅ0 अभिषेक पाण्डेय व गोरक्षाष्टक पाठ प्रांजल त्रिपाठी तथा संचालन डाॅ0 श्रीभगवान सिंह ने किया।कार्यक्रम में गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ , देवीपाटन मंदिर के महंत योगी मिथलेशनाथ जी, सतुआबाबा आश्रम वाराणसी से संतोषदास जी महाराज, विधायक डुमरियागंज राघवेन्द्र प्रताप सिंह, महंत शिव नारायण दास , राममिलन दास, आचार्य  शिवाकांत जी, प्रमथनाथ, पुष्प दन्त जैन, आनंद शाही, अवधेश सिंह ,विजय शंकर यादव, उपस्थित रहे। सम्पूर्ण कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के फेसबुक पेज तथा यू ट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण किया गया । लाइव प्रसारण के लिए तकनीकी में डॉ पवन पाण्डेय, डॉ अमरनाथ तिवारी, विनय गौतम, अंकुर त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे ।


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