दो बूंद दो बार पोलिया से करे बचाव


आपको याद होगा *दो बूंद  जिंदगी की * स्वस्थ परिवार व राष्ट्र | यह अभियान लगभग तीन दशक तक बहुत तेजी से चला| अनेक नुक्कड़ नाटक ,होल्डिंग ,सिनेमा से पहले स्लाइड चलना ,स्कूल, कॉलेज ,अनेक जगह इसका प्रचार प्रसार किया गया| दो बूंद जिंदगी का कानों में पड़ते ही समझ में आ जाता था कि यह पोलियो जैसी घातक महामारी को मारने के लिए एक कदम है जो कि संयुक्त राष्ट्र ने 1988 में विश्व को पोलियो मुक्त करने का अभियान आरंभ किया था| आपको जानकर आश्चर्य होगा जितने विश्व में पोलियो पीड़ित थे उसमें आधे से ज्यादा तो भारतवर्ष में ही थे |यह खानपान की कमी ,कुपोषण ,गंदा पांनी वाइरस का पनपना ,यहां जनसंख्या का अधिक साथ ही परिवार नियोजन का पालन ना  होना, आम जीवन में स्वच्छता का अभाव, अशिक्षा आदि ऐसे पहलू थे, जिनके आधार पर विशेषज्ञों को हमारी सफलता पर संदेह था| पर भारत में दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे डॉक्टर हर्षवर्धन जी  ने पोलियो प्लस के कार्यक्रम की शुरुआत की आज भी वह केंद्र के स्वास्थ्य मंत्री हैं| यह 1995 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में शामिल होकर देशव्यापी अभियान में परिणत हुआ| बहुत ही खुशी की बात है भारतवर्ष में उनकी मेहनत ने रंग दिखाया है और सन 2011 में भारत में आखरी पोलियो का मरीज रुखसाना खातून वेस्ट बंगाल में मिली थी |आपको जानकर आश्चर्य होगा पोलियो के खात्मे के लिए रोटरी इंटरनेशनल ने पूरे विश्व में सबसे आगे आकर पोलियो को खत्म करने का सबसे बड़ा हिमायती बनकर खड़ा हुआ| तमाम विश्व के रोटरी क्लब क्लबों के साथ भारत के हर रोटरी क्लब में अनेकों कैंप लगा कर घर घर जाकर पोलियो खत्म करने के मिशन में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई पोलियो के विनाश में भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय ,विश्व स्वस्थ संगठन ,यूनिसेफ रोटरी इंटरनेशनल ,, बिल्लगेट्स फ़ाउंडेशन ,सभी ज़िला सी एम ओ की टीम ,अनेक सामाजिक संस्थाओं  के साथ सभी के प्रचार प्रसार के साथ जमीनी कार्य करके *दो बूंद जिंदगी की *  सफल कर दिया ।पोलियो बंधुओं ने जो मेहनत की जो घरों में निशान लगा कर पोलियो को खात्मा करने का काम किया है निश्चित रूप से हम सबको उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए तथा ऋणी  रहना चाहिए। 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस पोलियो वैक्सीन के निर्माता को नमन व सम्मान देने के लिए उनके जन्मदिन पर मनाया जाता है| दुनियाभर में पोलिओम्येलितिस (या पोलिओ) का मुकाबला करने के लिए दो पोलियो वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है पहला जोनास सॉल्क द्वारा विकसित किया गया और 1952 में उसका पहला परीक्षण किया गया। 1955, अप्रैल 12 को सॉल्क द्वारा दुनिया को इसकी घोषणा की गयी .|पोलियो  वैक्सीन की तरह ही निश्चित रूप से करुणा महामारी की भी वैक्सिंग आएगी और एक दिन हम कोरोना  वैक्सिंग को हर मानव जाति में लगाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम करेंगे कोरोना से फिर नही होगा किसी परिवार में रोना ।आज तमाम जागरूकता व सरकार की मेहनत का ही नतीजा है कि हमने पोलियो को खत्म कर दिया है लेकिन भारत के पोलियो मुक्त होने के बावजूद आपका बच्चा इस वायरस से बचा रहे  सबसे ज्यादा खतरा 5 साल तक के बच्चों को होता है।बच्चों को पोलिया की ऑरल वैक्सीन जरुर दिलाये।


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