जन्मजात दोषों से नौनिहालों को मिलेगा छुटकारा

 जन्मजात दोषों से ग्रसित चार नौनिहालों का बांदा और कानपुर में होगा उपचार


0 अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच प्रसव केंद्रों पर 31 जन्मजात दोषों से ग्रसित बच्चे मिले



हमीरपुर, 17 अक्टूबर 2020


जन्मजात दोषों (विकृतियों) से जूझने वाले नौनिहालों को जल्द ही इससे छुटकारा मिलेगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत अप्रैल से सितंबर 2020 के बीच जिले के प्रसव केंद्रों से चिन्हित किए गए 31 नौनिहालों के इलाज की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चार बच्चों को इलाज के लिए बांदा और कानपुर भेजा जा रहा है। बांदा में दो बच्चों के जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों और कानपुर में कटे होंठ-तालू की सर्जरी होगी।


कोरोना संक्रमण के कारण घोषित हुए लॉकडाउन का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गतिविधियों पर भी असर पड़ना स्वाभाविक था। फिर भी आरबीएसके की टीम कोरोना वारियर्स के रूप में जुटी हुई थी। अब धीरे-धीरे सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाएं बहाल होनी शुरू हो गई है। आरबीएसके द्वारा चिन्हित किए गए जन्मजात दोषों से ग्रसित बच्चों के उपचार की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में चार बच्चों को उपचार के लिए बांदा और कानपुर भेजे जाने की तैयारी की गई है।


आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ.रामअवतार ने बताया कि मौदहा कस्बे के हैदरगंज मोहल्ला निवासी मुहम्मद शमीम की डेढ़ माह की पुत्री रुकैया का जन्मजात तालू और मौदहा के ही मराठीपुरा निवासी झूरी के एक माह के पुत्र राजू का होंठ कटा हुआ था। इन दोनों बच्चों की सूचना प्रसव केंद्र से मिली थी। अब इन दोनों को जल्द ही कानपुर के न्यू लीलामणि हॉस्पिटल में भर्ती कराकर सर्जरी करवाई जाएगी। इस काम में स्माइल ट्रेन संस्था सहयोगी है। 


इसी तरह पारा मौदहा निवासी राजाबाबू का एक माह का पुत्र अभिषेक और रीवन निवासी भूपेंद्र की दो माह की पुत्री ज्योति के जन्मजात पैर टेढ़े हैं। इन दोनों का उपचार बांदा में सहयोगी संस्था मिरेकल फीट इंडिया संस्था के माध्यम से कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्द ही दोनों को बांदा भेजा जाएगा।


 


कोरोना संक्रमण के बीच दो बच्चों की हुई सर्जरी 


आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर गौरीशराज पाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बीच पिछले सत्र के दो बच्चों का सफलतापूर्वक कटे होंठ-तालू की सर्जरी करवाई गई है। गोहाण्ड ब्लाक के सैना गांव निवासी दीपक के डेढ़ साल के पुत्र देवांश की 22 जुलाई को न्यू लीलामणि हॉस्पिटल में कटे हुए होठों की सर्जरी हुई। जबकि सुमेरपुर के गुरगुज मोहल्ला निवासी अनिल गुप्ता के तेरह माह के पुत्र राघव गुप्ता की 5 अक्टूबर को कानपुर में कटे हुए तालू की सर्जरी करवाई गई है। भविष्य में दोनों बच्चे बगैर किसी दिव्यांगता या मुश्किलों के अपना जीवन जी सकेंगे। इन दोनों बच्चों के सफलतापूर्वक उपचार से दोनों के परिजन भी खुश हैं। 



जन्म से खुशी मिली, चेहरा देखकर दुख में डूबे


देवांश के पिता दीपक का कहना है कि वह मेहनत-मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। डेढ़ साल पूर्व जब देवांश ने जन्म लिया तो परिवार में खुशियां छा गई, लेकिन जब पता चला कि उसके होंठ और तालू कटा हुआ है तो चिंता में पड़ गए। लेकिन आरबीएसके की टीम से बहुत मदद मिली, वह अब संतुष्ट और चिंता रहित हैं। 


 


अप्रैल से सितंबर तक मिले जन्मजात विकारों से ग्रसित बच्चे


कटे होंठ-तालू- 5


न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट- 8


टेढ़े-मेढ़े पैर- 11


अन्य-07


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