जिले में डायलिसिस यूनिट खुलने से किडनी मरीजों को राहत

गत वर्ष जिला अस्पताल में हुई थी डायलिसिस यूनिट की स्थापना 


0 यूनिट की स्थापना से किडनी मरीजों को मिली है बड़ी राहत 



हमीरपुर, 27 अक्टूबर 2020। 


जिला अस्पताल की दूसरी मंजिल में 28 जनवरी 2019 को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (ट्रिपिल पी मॉडल) के तहत दस बेड की डायलिसिस यूनिट की स्थापना हुई। इसका मकसद किडनी के मरीजों को बगैर किसी शुल्क के डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराना था। इस यूनिट की स्थापना से पूर्व जनपद के मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए कानपुर या लखनऊ तक की दौड़ लगानी पड़ती थी, जिसमें पैसा और समय दोनों की बर्बादी होती थी और मरीज को भी परेशानियों से दो-चार होना पड़ता था। लेकिन जब से जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना हुई है तब से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। 


शहर के गौरा देवी मोहल्ला की मध्यम वर्गीय परिवार की 49 साल की रचना त्रिपाठी ने किडनी की बीमारी से ग्रसित होने की वजह से सिर्फ डायलिसिस कराने के मकसद से झांसी में किराए का मकान लिया था। रचना बताती हैं कि दो साल से वह किडनी की बीमारी से जूझ रही हैं। पांच माह तक मेदांता हॉस्पिटल गुड़गांव (हरियाणा) में इलाज कराया। इसके बाद झांसी में इलाज शुरू हुआ। यहां तीन माह तक किराए का मकान लेकर रहे। जब से हमीरपुर में डायलिसिस यूनिट शुरू हुई है तब से बड़ी राहत है। 


जिला अस्पताल के सेवानिवृत्त टैब टेक्नीशियन हेमराज सिंह वर्ष 2008 से किडनी के मरीज है। इस समय उनकी सप्ताह में दो बार डायलिसिस होती है। अभी तक डायलिसिस कराने के लिए उन्हें भी कानपुर जाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हेमराज बताते हैं कि पूरी जिंदगी उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं दी। बीमारी के बाद से उन्हें एहसास हुआ कि डायलिसिस जैसी यूनिट अगर यहां होती तो मरीजों का कितना भला होता। लेकिन अब जब से यूनिट की स्थापना हुई है तब से उन जैसे तमाम मरीजों की दिक्कतें दूर हो गई हैं। 


हमीरपुर मुख्यालय से लगे कानपुर नगर के आनूपुर गांव के जयकरन, मौदहा के व्यापारी बीएल वर्मा, घाटमपुर की रमा निगम, कुरारा ब्लाक के ककरऊ गांव के रामदयाल जैसे मरीज भी सप्ताह में दो बार डायलिसिस यूनिट की सेवाएं लेते हैं। रमा निगम बताती हैं कि इससे पहले कानपुर जाना होता था। एक विजिट में पांच से छह हजार रुपए खर्च होते थे और परेशानी अलग उठानी पड़ती थी। लेकिन अब सब ठीक है। 


 


तीन शिफ्टों में होती है डायलिसिस 


यूनिट मैनेजर ज्ञानेंद्र गौतम ने बताया कि यूनिट में 20 मरीजों का रजिस्ट्रेशन है और इन मरीजों की 1649 डायलिसिस हो चुकी हैं। लीड टेक्नीशियन के पद पर इतेंद्र सिंह, रामू कुमार, जूनियर टेक्नीशियन के पद पर खुश्बू वर्मा, शुभम वर्मा, गार्गी, शिवकुमार सेवाएं दे रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ.पीके गुप्ता भी सलाहकार हैं। इमरजेंसी होने पर बनारस के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ.मधुसूदन शर्मा से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए संपर्क कर सलाह-मशविरा लिया जाता है। सुबह 8 बजे से रात के 10 बजे तक यूनिट का संचालन होता है और तीन शिफ्टों में मरीजों की डायलिसिस किया जाता है।


 



चित्रकूट-महोबा में भी यूनिट प्रस्तावित 


राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन/सिफ्सा के मण्डलीय परियोजना प्रबंधक आलोक कुमार बताते हैं कि डायलिसिस यूनिट की हमीरपुर में स्थापना किडनी के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। ऐसी ही यूनिट की स्थापना महोबा और चित्रकूट में भी प्रस्तावित है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 



यूनिट के अच्छे नतीजे आ रहे 


जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ.विनय प्रकाश ने बताया कि यह ट्रिपिल पी मॉडल की यूनिट है। इसमें दस बेड का वार्ड है। प्रशिक्षित स्टाफ मरीजों की डायलिसिस करता है। अच्छे परिणाम आ रहे हैं। 


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