कोविड - 19 के बाद कोविड - 20 ?

चाहे यह चीन  की अमेरिका व यूरोप से व्यापार युद्ध जीतने व विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति बनने की होड़ में चलाया गया जेविक हथियार ही हो मगर अब कोरोना दुनिया ही नहीं भारत के भी हर घर का हिस्सा बन चूका है। कोरोना से लड़ने की लिए उसकी चेन तोड़ने, जनता को शिक्षित करने व स्वास्थ्य ढाँचा विकसित करने के लिए सरकार ने महीनो लंबा लॉकडाउन लगाया किंतु न ही चेन टूटी और न ही जनता शिक्षित होने को तैयार। जहाँ तक स्वास्थ्य ढाँचे की बात है वो भी लॉकडाउन के बाद विकसित होना शुरू हुआ व आज भी अधूरा ही है।अब जिस बीमारी का कोई इलाज ही न हो और न ही कोई वेक्सीन तो ढाँचा बने भी तो क्या? अब मोदी जी कितना भी देश को समझा ले मगर अब कौन सुनने जा रहा है उनकी?
मास्क, सेनेटाइज़र, साबुन, पेरासिटामोल और आक्सीजन की उपयोगिता समझने व उत्पादन बढ़ाने की क़ीमत दुनिया ने 40 करोड़ नोकरी व 1000 लाख करोड़ रुपए की रक़म गँवा दी और लाखों ज़िंदगिया भी भेंट चढ़ी वो अलग। हाँ हथियारों, आइटी, ऑनलाइन व निजी वाहनो आदि के बाज़ार को बढ़ी बढ़त मिली व असंगठित क्षेत्र डूब गए। किसी की जान  गयी तो किसी का जहान और बिशेषज्ञो के अनुसार यह सिलसिला आगे भी जारी रहना है। मगर अब लोगों को कोरोना ख़तरनाक नहीं लगता और मोदी जी क्यों उससे इतना डरा रहे हैं यह उनकी समझ से बाहर है। मेरे न जाने कितने मित्रों, पड़ोसियों व रिश्तेदारों को यह बीमारी हुई और कुछ ही दिनो में ठीक भी हो गयी जैसे और बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। जो लोग मरे भी वे अन्य घातक बीमारियों का शिकार थे और कोरोना के शोर व प्रतिबंधो के बीच उनको सही से इलाज ही नहीं मिला या उन पर कोरोना थोप दिया गया या फिर डर का बाज़ार खड़ा कर दिया गया और वे मरते गए। जो भी अन्य मोते हुई वे सरकारी अस्पतालों के कुप्रबंधन व निजी अस्पतालों की लूट व लापरवाही से अधिक हुई। सरकार चाहे कुछ भी कहे मगर देशी, आयुर्वेदिक जीवन शेली और शरीर की देसी पद्धति से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना कोरोना से लड़ाई का सीधा सादा उपाय है और सरकार व समाज को यही अपनाना होगा। 
इसके इतर अगर कोरोना फिर से फैल रहा है या जाड़ों में फैलने की बात हो रही है तो यह बहुराष्ट्रीय फ़ार्मा कम्पनियों का नया खेल अधिक दिखता है। जिस प्रकार बिल गेड्स फ़ाउंडेशन व रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन कोरोना को लेकर सक्रिय व उत्साहित दिख रही हैं वह अनेक डर , घबराहट के साथ ही चेतावनी भी देता दिख रहा है कि जैसी आशंका थी कोविड - 19 के बाद अब यह फ़ार्मा व ड्रग्स माफिया अक्तूबर-  नवंबर में कई गुना अधिक ख़तरनाक कोविड -20 को दुनिया में फैलाने/छोड़ने की तैयारी कर चुका है। अगर ऐसा है तो यह बहुत ही ज़्यादा ख़तरनाक होने जा रहा है और बहुत ही ज़्यादा सावधानी आवश्यक है व मोदी जी के राष्ट्र के नाम संबोधन को अत्यंत गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। ऐसे में जब तक स्थिति स्पष्ट न हो जाए अपने अपने बिलों में ही रहना ज़्यादा अच्छा।


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