निश्चेतना विशेषज्ञ के बिना शल्य चिकित्सा संभव नहीं


ऑपरेशन (शल्य चिकित्सा ) छोटी हो या बड़ी हो उसका नाम सुनते ही मरीज़ व परिजनों को घबराहट हो जाती है शल्य चिकित्सा बिना एनएसथेसिया  (बेहोश )दिए हुए करना मुश्किल ही नहीं असंभव होता है आम भाषा में हम लोग इन्हें बेहोशी वाला डॉक्टर कहते हैं किसी भी शल्य चिकित्सा में एनएसथेटिस्ट डॉक्टर का बहुत ज़रूरी कार्य होता है हालांकि जो ऑपरेशन करता है वह मरीज व परिजन के सामने होता है जबकि एनएसथेटिस्ट डॉक्टर पर्दे के पीछे रहकर जब तक पूरी शल्य चिकित्सा के  बाद भी एक समय सीमा तक वह उस मरीज को अपनी देखरेख में रखता है यह बहुत ही जोखिम भरा काम होता है जरा सी चूक होने पर मरीज की जान भी जा सकती है क्योंकि मरीज को कितनी दवा देनी है कितने समय  के लिए देनी है और उसके शरीर की क्या क्षमता है यह एनएसथेटिस्ट डॉक्टर (निश्चेतना विशेषज्ञ )के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है कई शल्या चिकित्सा बहुत आसान होती हैं परंतु मरीज की शारीरिक स्थिति कमजोर होने के कारण ऐसे में  एनएसथेटिस्ट डॉक्टर ( निश्चेतना विशेषज्ञ)  का बहुत बड़ा योगदान हो जाता है 
एनेस्थिसिया का जन्म सन 1946 में रूस के एक अस्पताल में प्रथम ईथर एनेस्थिसिया विलियम थॉमस ग्रीन माॢटन ने दिया थ।एनेस्थिसिया के प्रति जागरूकता लाने के लिए वल्र्ड ‘’फेडरेशन ऑफ सोसायटी ऑफ एनएस्थिसियोलॉजिस्ट’’ द्वारा प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है।


समय के साथ यह तकनीक अपडेट होती जा रही है। ऑपरेशन थिएटर ही नहीं पोस्ट ऑपरेटिव केयर में एनेस्थेटिक का महत्वूपर्ण योगदान है। विश्व निश्चेतना दिवस पर जानिए इस विधा से जुड़ी दिलचस्पी जानकारियां। निश्चेतना देना एक बहुत ही साहसिक कार्य है।


जनरल व रीजनल एनेस्थिसिया( निश्चेतना )तीन तरह से दिया जाता है। जिसमें पूरे शरीर को जब एनेस्थिसिया ( निश्चेतना )दी जाती है तो वह जनरल एनेस्थिसिया कहलाता है।नर्व-इम्पल्स के ट्रांसमिशन को रोका जाता है।शरीर के किसी एक हिस्से को शून्य किया जाता है तो उसे रीजनल या लोकल एनेस्थिसिया कहा जाता है। इन सभी विधियों में विशेष दवा द्वारा नर्व-इम्पल्स के ट्रांसमिशन को रोका जाता है। जिससे मरीज को दर्द महसूस नहीं होता है। ओटी के अलावा दर्द प्रबंधन , आईसीयू, सर्जिकल आईसीयू सहित अन्य विभाग विशेषज्ञों के पास ही होते हैं। नॉन सर्जिकल प्रोसिजर जैसे हार्ट की जांच, सीटी स्केन, एमआरआई, इंडोस्कोपी में भी एनेस्थेटिक( निश्चेतना विशेषज्ञ )महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करते हैं।रात हो या दिन बहुत कठिन है डगर पर बिना एनेस्थेटिक के डॉक्टर की क़ाबिलियत भी है अधूरी सभी निश्चेतना विशेषज्ञ को मरीज़ की तरफ़ से शुभकामनाएँ 


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