रचनाकारों को नि:शुल्क वैश्विक पटल उपलब्ध करवाती है 'सृजन ऑस्ट्रेलिया'

साहित्य और शोध क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय ई-पत्रिका ' सृजन ऑस्ट्रेलिया' ने साफ कहा है कि उनके द्वारा किसी भी रचनाकार से प्रकाशन के लिए कोई राशि नहीं ली जाती है। पत्रिका हिंदी भाषा, साहित्य और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सम्पूर्ण विश्व से स्वयंसेवकों का गैर-लाभकारी एवं पूर्णत: अव्यवसायिक मंच है।
पत्रिका की मुख्य संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूनम चतुर्वेदी शुक्ला ने बताया कि प्रबंधन को सूचना मिली है कि कुछ लोग भ्रामक प्रचार कर पत्रिका की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। पत्रिका द्वारा किसी से भी कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में जो लोग पत्रिका पर रुपये मांगने का कार्य कर रहे हैं, उन लोगों की पहचान की जा रही है। पत्रिका प्रबन्धन  ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस बारे में Editor@srijanaustralia.com पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 
उन्होंने साफ कहा कि  पत्रिका की शुरुआत हिंदी भाषा, साहित्य और अनुसंधान को बढ़ावा देने के वैश्विक अभियान से की गई है। अल्प समय में ही पत्रिका को हिंदी प्रेमियों का भरपूर समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि पत्रिका का अपना विशेष सम्पादक मंडल है। उन्हीं के द्वारा गुणवत्ता के आधार पर प्रकाशन सामग्री का चयन किया जाता है। लेखन विधा को विभिन्न खण्डों में बांटा गया है।इसके तहत हर विधा का रचनाकार इसमें अपनी रचना को निशुल्क भेजकर अंतरराष्ट्रीय पटल पर खुद को पहचान दिला सकता है।यह एक बहुविषयक, विशेषज्ञों द्वारा समीक्षित, अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका है। पत्रिका  के 'वैश्विक हिन्दी अभियान' में विभिन्न देशों के लब्ध प्रतिष्ठित विद्वानों, साहित्यिक, भाषिक एवं अकादमिक संस्थाओं के साथ-साथ 'विश्व हिन्दी सचिवालय, मॉरीशस' की भी सहभागिता है।


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