विश्व मानक दिवस


विश्व की सभी उपभोक्ताओं के जीवन के लिए आज विश्व मानकीय दिवस बहुत महत्वपूर्ण माना  जाता है। हर मनुष्य सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक तमाम वस्तुओं का उपभोग वा सेवाएं लेता है ,उन्हीं सेवाओं और वस्तुओं का सही माप व वजन  उच्च गुणवत्ता अगर प्राप्त नहीं होती है तो उसकी क्रय शक्ति तो क्षीण होती ही है परंतु उससे स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ होता है ।विश्व के तमाम आविष्कारों ने अपनी वस्तुओं को उपभोक्ता तक उच्च क्वालिटी की पहुंचाने का प्रयास किया है ।14 अक्टूबर 1970 से विश्व मानकी दिवस के रूप में उपभोक्ता के संरक्षण व आविष्कारों को सम्मान देने के लिऐ मनाया जाता है । विश्व मानक दिवस पर विभिन्न संगठनों द्वारा संगोष्ठी प्रदर्शनी ,सम्मेलन ,टीवी और रेडियो पर वार्ता करके दुनिया भर में जागरूकता प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं ।
विश्व मानक दिवस पर भारतीय मानक ब्यूरो (बी आई एस )भी हर शहर में इस तरीके के जागरूक कार्यक्रम चलाता है। हर वर्ष सामूहिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आई एस ओ )अंतरार्ष्ट्रीय विद्युत तकनीकी आयोग (आई ई एस )अंतराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटी यू )द्वारा थीम  निर्धारित की जाती है| आपको यह भी बता दें भारतीय मानक ब्यूरो (The Bureau of Indian Standards (BIS)) भारत में राष्ट्रीय मानक निर्धारित करने वाली संस्था है। यह उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। पहले इसका नाम ' भारतीय मानक संस्थान ' (Indian Standards Institution / ISI) था जिसकी स्थापना सन् १९४७ में हुई थी।किसी भी वस्तु के मानक तय होने के उपरांत उस वस्तु का ना केवल उद्योग व उपयोग दोनो बढ़ता है ,साथ ही वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में दखलअंदाजी के साथ  दूसरे देशों में निर्यात होने लगता है| जिस तरीके से आज उपभोक्ता बहुत चेतन हो गया है तमाम तरह के गाइडलाइन उसे इंटरनेट पर या वस्तु के साथ लिख कर देना सरकार द्वारा अनिवार्य कर दिया है| इससे काफी हद तक उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित हो गया है लेकिन फिर भी कुछ लालची व्यापारी व सेवा आयोजक अपनी आदत से बाज नहीं आते हैं| उस दशा में उपभोक्ता द्वारा शिकायत करने पर उन्हें न केवल अर्थ दंड भुगतना पड़ता है बल्कि कई दफे तो जेल की हवा खानी पड़ती है| आज भारत मानक ब्यूरो को उद्योग व उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और गुणवत्ता परखने के कार्यक्रम निश्चित रूप से कराऐ जा रहे होंगे ताकि उद्योगों की गुणवत्ता बढ़े और उपभोक्ता को उसकी क्रय शक्ति का पूर्ण लाभ मिले।
माप-तौल में डंडी मारने की अब कोई गुंजाईश ही नहीं है। तराजू-बाट की जगह अब काफ़ी जगह इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से वजन कर ग्राहकों को सामान दिए जाने लगे हैं। मशीनें भी (आईएसआई ) मार्क की होती है ।लेकिन लोभी लोग इसमें भी जुगाड़ लगा देते है उसके लिए समय समय छापे की क्रिया की जाती है ।आज हम इस विभाग के पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व रामविलास पासवान जी को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हैं ।


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