बेरोजगारों की किस्मत बस ये अर्जियां है

बेरोजगारों की किस्मत बस ये अर्जियां है
लेकर बैठे है सब अपनी मोटी डिग्रियां है
मेरे खिलाफ कर दी उसने तो आँधियाँ सब
अब इन लबों पे होगी यारो पाबंदियां है
कुछ भी नही जरूरी रोटी हो पेट में तो
धमकी है सिसकियाँ है बस्ती में गालियां है
नारे लगाते लोगों की कोई तो खबर लो
बरसों से जिनके हाथों मे बस ये तख्तियाँ है
ज्यों ज्यों बड़ी अमीरी बड़ती रही गरीबी
बाजार की पूंजी से कुछ छल की संधियाँ है
डूबा है बॉलीवुड तो सारा नशे की लत में
खोलोगे तुम जुबां जो अपनी तो फांसियाँ है
जिन पर था नाज हमको निकले वही नशेड़ी
तुम्ही कहो कि सागर ये किसकी गल्तियाँ है

रामावतार सागर

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