खिसियान आंदोलन ••••••••

मैं  यह नहीं कहता की देश में  किसानों  की कोई समस्या नहीं है । किसान पर लगातार कभी मौसम तो कभी सरकार की मार पड़ती रहती है और प्रायः किसान आंदोलन भी होते रहते हैं। कोई मुद्दा न हो तो कर्ज माफी किसानों के आंदोलन के लिए एक शाश्वत  मुद्दा है ।पर किसानों  के हित संरक्षण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा बनाएं  गये कानून के बिरूद्ध ,देश पर सबसे बड़े आतंकी हमले26/11 की वरसी पर शुरू किए गये तथाकथित किसान आंदोलन के नारों पर जरा गौर करें तो इस किसान आंदोलन की असलियत  शीशे की तरह एकदम साफ-साफ दिखाई देने लगेगी।
इंदिरा को ठोका है, मोदी को भी ठोंक  दो।खालिस्तान जिन्दाबाद, पाकिस्तान जिन्दाबाद। भिन्डरवाले अमर रहे।यह किसान आंदोलन नहीं,बल्कि इसे खिसियान आंदोलन नाम देना ज्यादा उचित रहेगा।सत्ताच्युत,हर जगह जनता द्वारालतियाये ,दुरदुराये गये कांगी ,बामी  सेकुलर,टुकड़े टुकड़े गैंग, पुरस्कार वापसी गैंग आदि द्वारा देश में अराजकता फैलाने का एक सम्मलित प्रयास है।  मतलब वही , खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे ।देश को बिखंडित करने का मंसूबा पाले ये गिरोह कभी CAA के नाम पर मुसलमानों के कंधे पर बंदूक रख देते हैं तो कभी किसान आंदोलन के नाम पर सिखों के कंधे पर।हर आंदोलन का ध्येय वाक्य लगभग मिलता जुलता होता है। इन आंदोलनों में कभी चिकेन नेक काट देने की तकरीर होती है तो कभी पाकिस्तान जिन्दाबाद की सदाएं गूजने लगती हैं। कभी अफजल गुरूके पोस्टर लेकर लोग आगे आ जाते हैं  तो कभी भिन्डरवाले के।
 इस देश का किसान और सिख समुदाय  अब बहुत जागरूक हो चुका है ।इन राष्ट्रघातियो की एक-एक चाल समझने लगा है।इनकी कुचालो का भी शीघ्र भंडाफोड होगा और देश एक बार फिर और मजबूत होकर निकलेगा


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