मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय 24 नवम्बर, 2020

मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय 24 नवम्बर, 2020


लखनऊ: 24 नवम्बर, 2020


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में आज मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-



मण्डी परिषदों एवं अधिसूचित मण्डी स्थलों में आरोपित होने वाले 

मण्डी शुल्क की वर्तमान दर को 02 प्रतिशत से घटाकर 

01 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव अनुमोदित



मंत्रिपरिषद ने मण्डी परिषदों एवं अधिसूचित मण्डी स्थलों में आरोपित होने वाले मण्डी शुल्क की वर्तमान दर को 02 प्रतिशत से घटाकर 01 प्रतिशत तक एवं विकास शुल्क 0.50 प्रतिशत को यथावत रखने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
यह निर्णय किसान उत्पाद, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम-2020 के अनुक्रम में मण्डी शुल्क की दरों में संशोधन कर कमी किए जाने के तहत लिया गया है। यह निर्णय मण्डी अधिनियम-1964 की धारा 17(3)(ख) के प्राविधान के अनुसार अधिसूचना निर्गत करने के उपरान्त लागू हो जाएगा।
भारत सरकार की नयी व्यवस्था के क्रम में मण्डी परिसरों के अन्दर के व्यापार को प्रासंगिक और आकर्षित बनाये रखने के लिए मण्डी शुल्क दरों में कमी किया जाना आवश्यक है। मण्डियों का व्यापार कम होने व उनका कमजोर पड़ना कृषक हित में नहीं होगा। इस आशंका को दृष्टिगत रखते हुए ही कृषक संगठनों द्वारा मांग की गयी है। मण्डी को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए जाने से कृषकों को लाभ होगा। साथ ही,  इससे प्रदेश में कृषि कार्य में लगी इकाइयों एवं मजदूरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
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जनपद अयोध्या स्थित एयरपोर्ट का नामकरण मर्यादा पुरुषोत्तम 

श्रीराम हवाई अड्डा, अयोध्या किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति



मंत्रिपरिषद ने जनपद अयोध्या स्थित एयरपोर्ट का नामकरण मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा, अयोध्या किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही, इस सम्बन्ध में राज्य विधानसभा में पारण हेतु प्रस्तावित संकल्प के आलेख को भी अनुमोदित कर दिया है।
मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित इस संकल्प को राज्य विधानसभा से पारित कराकर यथा प्रक्रिया जनपद अयोध्या स्थित एयरपोर्ट का नामकरण मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा, अयोध्या किए जाने का प्रस्ताव नागर विमानन मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित किए जाने का निर्णय भी लिया गया है।
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उ0प्र0 राज्य न्यायालय वीडियो काॅन्फ्रंेसिंग नियमावली, 2020 का प्रख्यापन



मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य न्यायालय वीडियो काॅन्फ्रंेसिंग नियमावली, 2020 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
प्रदेश में कोरोना महामारी फैलने एवं अभी तक इसका समुचित इलाज न होने के कारण इससे बचाव हेतु लाॅकडाउन, सामाजिक दूरी बनाये रखने आदि सम्बन्धी दिशा निर्देश समय-समय पर जारी किये गये हैं, जिसका प्रभाव मा0 न्यायालयों की कार्यवाही पड़ा है। कोरोना महामारी के दौरान मा0 न्यायालयों में समुचित रूप से सुनवाई हो पाने एवं वादी/प्रतिवादी को न्याय दिलाने हेतु वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम सुनवाई की आवश्यकता महसूस की गयी।
कोविड-19 के संबंध में भारत सरकार के गृह मंत्रालय व राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण के आदेश दिनांक 24 मार्च, 2020 में सामाजिक दूरी के मानक पालन के निर्देश है। इसके दृष्टिगत मा0 उच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 225 व 227 के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश राज्य न्यायालय वीडियो काॅन्फ्रंेसिंग नियमावली, 2020 बनाये जाने का प्रस्ताव उपलब्ध कराया गया है। इसमें मा0 न्यायालयों में वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्य संचालन के सम्बन्ध में व्यवस्था विहित की गई है।
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सरयू नहर परियोजना फेज-III एवं अर्जुन सहायक परियोजना के 

अन्तर्गत प्रक्षेत्र विकास कार्य कराए जाने की कार्य योजना को स्वीकृति



मंत्रिपरिषद ने सरयू नहर परियोजना फेज-III एवं अर्जुन सहायक परियोजना के अन्तर्गत प्रक्षेत्र विकास कार्य कराए जाने की कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
सरयू नहर परियोजना फेज-III के अन्तर्गत 03 वर्षों (वर्ष 2020-21 से वर्ष 2020-23) में 1672.69 करोड़ रुपए व्यय कर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के 08 जनपदों-गोण्डा, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर एवं गोरखपुर में कुल 4.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर प्रक्षेत्र विकास कार्य किया जाना है। इसके अन्तर्गत 25,920 कि0मी0 कच्ची गूल, 6,012 कि0मी0 पक्की गूल, 24,048 जल नियंत्रक संरचना, 48,000 हे0 क्षेत्र में माइक्रो इरीगेशन, 96,000 हे0 जल निकास नाली आदि का निर्माण होना है। इसके अन्तर्गत कुल 7,038 गाँवों के 6,13,937 कृषक लाभान्वित होंगे।
अर्जुन सहायक परियोजना के अन्तर्गत 03 वर्षों (वर्ष 2020-21 से वर्ष 2020-23) में  188.96 करोड़ रुपए व्यय कर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 02 जनपदों-हमीरपुर व महोबा में कुल 0.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर प्रक्षेत्र विकास कार्य किया जाना है। इसके अन्तर्गत 2920 कि0मी0 कच्ची गूल, 677 कि0मी0 पक्की गूल, 2710 जल नियंत्रक संरचना, 5410 हे0 क्षेत्र में माइक्रो इरीगेशन, 10.82 हजार हे0 जल निकास नाली आदि का निर्माण होना है। इसके अन्तर्गत कुल 216 गाँवों के 53,080 कृषक लाभान्वित होंगे।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरयू नहर परियोजना फेज-III हेतु 500 करोड़ रुपए तथा अर्जुन सहायक परियोजना हेतु 100 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। दोनों योजनाओं पर उत्पन्न व्यय-भार केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा 50ः50 के अनुपात में वहन किया जाना है। दोनों योजनाओं का क्रियान्वयन भारत सरकार द्वारा निर्धारित योजना की गाइडलाइन्स तथा संगत विनियमों/नियमों/दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत किया जाना है। योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता उच्च गुणवत्ता, समयबद्धता तथा उच्च तकनीकी विशिष्टता सुनिश्चित किए जाने की व्यवस्था की गई है।
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गोरखपुर एवं वाराणसी मण्डल में मण्डल स्तर पर 

एकीकृत कार्यालय परिसर के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति



मंत्रिपरिषद ने गोरखपुर एवं वाराणसी मण्डल में मण्डल स्तर पर एकीकृत कार्यालय परिसर के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही, योजना के क्रियान्वयन में किसी संशोधन की आवश्यकता का अनुभव होता है, तो उसके लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
एकीकृत मण्डलीय कार्यालय निर्माण से मण्डल स्तर पर स्थित विभिन्न सरकारी कार्यालय एक ही परिसर में स्थानान्तरित होकर कार्य कर सकेंगे, जिससे न केवल आना-जाना आसान होगा, अपितु तकनीकी सुविधाओं से युक्त होने के कारण कार्यालय वातावरण भी कार्य के सुचारु रूप से संचालन हेतु उपयुक्त हो सकेगा।
वर्तमान में विभिन्न मण्डलों में स्थित मण्डलायुक्त कार्यालयों पर विभिन्न मण्डलीय कार्यालयों से आना-जाना समय-साध्य एवं व्यय साध्य है। मण्डलीय कार्यालय विभिन्न स्थान पर संचालित होने के कारण इनके मध्य समन्वय भी ठीक से नहीं हो पाता है। मण्डल स्तरीय कार्यालयों में स्थान की आवश्यकता एवं उपलब्धता में असमानता के साथ-साथ नवीन तकनीकी सुविधाओं का भी अभाव है। अधिकांश कार्यालय किराये के भवन में चल रहे हैं अथवा कार्यालय भवनों की स्थिति जीर्ण-शीर्ण है, जिससे कि कार्यालय वातावरण भी प्रभावित होता है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए ही मण्डल स्तर पर एकीकृत मण्डलीय कार्यालय निर्माण की परिकल्पना की गयी है, जिसमें पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोरखपुर एवं वाराणसी मण्डल में स्थित मण्डलीय कार्यालयों को लिया गया है। इन कार्यालयों के निर्माण हेतु सम्बन्धित प्राधिकरणों को नोडल एजेन्सी बनाया जाएगा तथा उन्हें नियमानुसार सेण्टेज चार्ज अनुमन्य होगा। इन कार्यालयों के सम्बन्ध में नियमानुसार निस्तारण/निर्णय लेने हेतु मण्डल स्तरीय/राज्य स्तरीय समितियों का गठन किया जाएगा। इन परियोजनाओं के डी0पी0आर0 तैयार किए जाने हेतु प्राधिकरणों द्वारा यथावश्यक उपयुक्त कन्सल्टेण्ट का चयन किया जाएगा।
परियोजना पर शीघ्र कार्य प्रारम्भ कर सुचारु रूप से शीघ्र पूर्ण किए जाने हेतु बजट में प्राविधान किए जाने, जिसकी प्रतिपूर्ति भूमि मुद्रीकरण से प्राप्त होने वाली धनराशि से की जा सकेगी, की व्यवस्था की गयी है। इन कार्यालयों के निर्माण हेतु सीड कैपिटल के रूप में 25-25 करोड़ रुपए की बजट व्यवस्था कराए जाने तथा दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन सरकारी/नजूल भूमि/अन्य चिन्हित भूमि के मुद्रीकरण के आधार पर कराए जाने की व्यवस्था की जा रही है। भूमि मुद्रीकरण के लिए चिन्हित तथा भविष्य में चिन्हित होने वाली भूमि को यथावश्यक वाणिज्यिक/अन्य उपयुक्त भू-उपयोग में बदलने हेतु सैद्धान्तिक स्वीकृति व इस हेतु समस्त शुल्कों से छूट दिए जाने की व्यवस्था की गयी है।
प्रश्नगत प्रस्ताव के फलस्वरूप राज्य सरकार पर तात्कालिक रूप से वित्तीय व्यय भार आएगा, जिसकी प्रतिपूर्ति भूमि के मुद्रीकरण से भविष्य में किए जाने की व्यवस्था है।
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उ0प्र0 प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (शैक्षणिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश-2020 को प्रख्यापित कराए जाने एवं उसका प्रतिस्थानी विधेयक राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित



मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (शैक्षणिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश-2020 को प्रख्यापित कराए जाने एवं उसका प्रतिस्थानी विधेयक राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। यह निर्णय केन्द्रीय शैक्षिक संस्थाओं (अध्यापक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम-2019 (अधिनियम संख्या 10 सन् 2019) के अनुक्रम में लिया गया है।
भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय शैक्षिक संस्थाओं (अध्यापक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2019 में सीधी भर्ती के प्रक्रम पर केन्द्रीय विश्वविद्यालय/संस्था को इकाई मानते हुए आरक्षण लागू किया गया है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछडे वर्गा के लिये आरक्षण) अधिनियम, 1994 (अधिनियम संख्या 4 सन् 1994) के द्वारा अनुसूचित जातियों के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजातियों के लिए 2 प्रतिशत एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण सीधी भर्ती के प्रक्रम पर लागू है।
कार्मिक विभाग के शासनादेश दिनांक 18 फरवरी, 2019 द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लिए राज्याधीन लोक सेवाओं और पदों पर सीधी भर्ती के प्रक्रम पर अधिकतम 10 प्रतिशत आरक्षण लागू है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछडे वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 2;ब्द्ध;प्टद्ध के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षण संस्थाएं भी आच्छादित हंै।
कार्मिक विभाग द्वारा अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्गों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण का अद्यतन रोस्टर शासनादेश दिनांक 13 अगस्त, 2019 द्वारा निर्गत किया गया है। अध्यादेश की धारा 2 (ग) में राज्य शैक्षिक संस्था को परिभाषित किया गया है, जिसके अनुसार-
(एक) किसी राज्य अधिनियम द्वारा या तदधीन स्थापित या निगमित किसी राज्य विश्वविद्यालय से है।
(दो) राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त और किसी राज्य अधिनियम द्वारा या तदधीन स्थापित या निगमित किसी राज्य विश्वविद्यालय से सम्बद्ध सहयुक्त किसी संस्था या उसके घटक संस्था से है।
(तीन) सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 के अधीन स्थापित और राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त चिकित्सा शिक्षा संस्थान से है।
(चार) ऐसी सरकारी शैक्षिक संस्थाओं, जहां सरकार द्वारा सामान्य राज्य स्तरीय संवर्ग सृजित किया गया हो, के एक संयुक्त समूह से है।
इसके अनुसार परिभाषित शैक्षिक संस्थाओं को रोस्टर लागू किए जाने हेतु एक इकाई माना जायेगा। प्रस्तावित अध्यादेश की धारा 4 (1) के अनुसार निम्नांकित प्रकृति की संस्थाओं पर लागू नहीं होगा:-
4 (1) धारा के उपबन्ध निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे-
(क) कोई अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्था ;
(ख) उत्कृष्ट संस्थाएं, अनुसंधान संस्थाएं, राष्ट्रीय और सामरिक महत्व की संस्थाएं ;
उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (शैक्षणिक संवर्ग में आरक्षण) आध्यादेश-2020 को प्रख्यापित कराया जाएगा। तत्पश्चात् उसके प्रतिस्थानी विधेयक के आलेख्य पर विभागीय मंत्री के रूप में उप मुख्यमंत्री जी का अनुमोदन प्राप्त कर, उसे राज्य विधान मण्डल में पुरःस्थापित/पारित कराया जाएगा।
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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर यातायात सुरक्षा की दृष्टि से 05 निर्माणाधीन 

पुलिस चैकियों तथा 10 पुलिस चैकियों की स्थापना के सम्बन्ध में



मंत्रिपरिषद ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर यातायात सुरक्षा की दृष्टि से 05 निर्माणाधीन पुलिस चैकियों तथा 10 पुलिस चैकियों की स्थापना के सम्बन्ध में प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर यातायात की सुरक्षा हेतु पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 की अध्यक्षता में 03 जून, 2017 को सम्पन्न बैठक में लखनऊ- आगरा एक्सप्रेस-वे के आर0ओ0डब्लू0 में पुलिस विभाग एवं यूपीडा के अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षणोपरान्त चयनित 21 स्थलों को पुलिस चैकी निर्माण हेतु चिन्हित किया गया, जिसमें से प्रथम चरण में 15 स्थलों पर पुलिस चैकियों के निर्माण का निर्णय यूपीडा द्वारा लिया गया।
औद्योगिक विकास विभाग द्वारा मामले में समय-समय पर कार्यवाही की गई है, जिसमें कार्यदायी संस्था नामित किया जाना, पी0एफ0ए0डी0 से आगणन मूल्यांकन एवं वित्तीय स्वीकृति आदि समय-समय पर निर्गत की गयी है।
पुलिस विभाग के अनावासीय भवनों के निर्माण हेतु मद में वर्तमान वित्तीय वर्ष में बजट व्यवस्था है। इन पुलिस चैकियों से संबंधित स्थलों के भूमि के स्वामित्व संबंधी अभिलेख (खसरा व खतौनी आदि) यूपीडा के पत्र दिनांक 18 सितम्बर, 2020 के माध्यम से उपलब्ध कराये गये। यातायात सुरक्षा के संबंध में गठित उच्चाधिकार समिति की बैठक के एजेण्डा बिन्दुओं में यह बिन्दु भी है कि एक्सप्रेस-वे पर कतिपय घटित लूट की घटनाओं के दृष्टिगत यमुना एक्सप्रेस-वे एवं आगरा एक्सप्रेस वे पर यथा आवश्यक पुलिस चैकियां स्थापित की जाये।
यातायात सुरक्षा के दृष्टिगत आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर औद्योगिक विकास विभाग द्वारा नामित कार्यदायी संस्था (उ0प्र0जल निगम) व यूपीडा द्वारा निर्मित करायी जा रही 05 पुलिस चैकियां निर्माणाधीन हैं, इनको पूर्ण कराने के उपरान्त, इन 05 पुलिस चैकियों के भूमि/निर्मित भवन को पुलिस चैकियों की स्थापना हेतु गृह विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के पक्ष में भौमिक स्वत्वाधिकार सहित ;ूपजी जपजसम व िसंदकद्ध निरूशुल्क हस्तांतरित किया जाना व गृह विभाग को विधिवत कब्जा प्रदान किया जाना प्रस्तावित है ताकि गृह विभाग द्वारा इन पांचों पुलिस चैकियों के स्थापना आदेश निर्गत करते हुए इनके संचालन हेतु अपेक्षित पद सृजन आदि का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय से प्राप्त कर, वित्त विभाग की सहमति उपरान्त पद सृजन किया जाएगा।
औद्योगिक विकास विभाग एवं वित्त विभाग के प्रकरण में प्राप्त परामर्श एवं आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे पर सुरक्षा की दृष्टि से अति संवेदनशील एवं जनहित के दृष्टिगत शेष 10 पुलिस चैकियों हेतु चिन्ह्ति भूमि पर इन पुलिस चैकियों की स्थापना हेतु इनका निर्माण द्वितीय चरण में गृह विभाग द्वारा अपने उपलब्ध अनुदान व बजट व्यवस्था से संगत नियमों के परिप्रेक्ष्य में वित्त विभाग के परामर्श से सुनिश्चित कराया जाएगा।
इन पुलिस चैकियों के भूमि स्वत्व के निःशुल्क हस्तान्तरण के संदर्भ में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग व यूपीडा द्वारा जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उससे गृह विभाग सहमत है। यदि भविष्य में सडक कभी चैड़ी होगी तो तत्समय पर यथास्थिति निर्णय लिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त इन 10 पुलिस चैकियों हेतु चिन्ह्ति भूमि, इन 10 पुलिस चैकियों की स्थापना हेतु, गृह विभाग उत्तर प्रदेश शासन के पक्ष में भौमिक स्वत्वाधिकार सहित ;ूपजी जपजसम व िसंदकद्ध निःशुल्क हस्तांतरित किया जाएगा।
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जनपद प्रयागराज में प्रयाग-लखनऊ रेल खण्ड पर प्रयाग स्टेशन से फाफामऊ रेलवे स्टेशन के मध्य दो लेन 

रेल उपरिगामी सेतु निर्माण की सम्पूर्ण परियोजना का व्यय भार 

राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित



 

मंत्रिपरिषद ने जनपद प्रयागराज में उत्तर रेलवे के अन्तर्गत प्रयाग-लखनऊ रेल खण्ड पर प्रयाग स्टेशन से फाफामऊ रेलवे स्टेशन के मध्य रेलवे कि0मी0 149/10-11 पर सम्पार सं0-75ए (तेलियरगंज/मजार से बड़ा बघाड़ा/सलोरी सड़क मार्ग) पर टी0वी0यू0 एक लाख से कम होने के कारण रेलवे द्वारा रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण की लागत 5280.12 लाख रुपए में सहभागिता न किए जाने के दृष्टिगत दो लेन रेल उपरिगामी सेतु निर्माण की सम्पूर्ण परियोजना का व्यय भार राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
प्रश्नगत रेलवे सम्पार सं0-75ए पर दिनांक 19 सितम्बर, 2020 को करायी गयी गणना अनुसार अद्यतन टी0वी0यू0 79885.69 है। यह एक लाख से कम होने के कारण रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण की लागत में रेलवे द्वारा सहभागिता नहीं की जाएगी। इसके दृष्टिगत रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण का सम्पूर्ण व्यय भार राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाना होगा।
यह रेलवे सम्पार शहरी भाग में है, जो कि प्रयाग स्टेशन से फाफामऊ रेलवे स्टेशन के मध्य उत्तर रेलवे के प्रयाग-लखनऊ रेल खण्ड के प्रयाग स्टेशन से लगभग 300 मी0 लखनऊ की तरफ मजार चैराहे से बड़ा बघाड़ा मार्ग पर स्थित है।
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जनपद हमीरपुर में जैविक खेती के विकास की योजना 

के अन्तर्गत द्वितीय चरण के क्रियान्वयन का प्रस्ताव अनुमोदित



मंत्रिपरिषद ने जनपद हमीरपुर में जैविक खेती के विकास की योजनान्तर्गत द्वितीय चरण (वर्ष 2020-21 से 2022-23) के क्रियान्वयन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सेक्टर से ‘जनपद हमीरपुर में जैविक खेती की योजना’ के 03 वर्षीय कार्यक्रम के प्रथम चरण का कार्य वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18 एवं 2018-19 में संचालित किया गया। योजना के द्वितीय चरण का 03 वर्षीय कार्यक्रम वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक पुनः प्रस्तावित किया जा रहा है, जिस पर 14.28 करोड़ रुपए की धनराशि व्यय की जाएगी। योजना से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादित जैविक कृषि उत्पादों के विपणन की व्यवस्था में रोजगार सृजन भी बढ़ेगा तथा कृषि की लागत मंे कमी आएगी।
द्वितीय चरण (वर्ष 2020-21 से वर्ष 2022-23 तक) में जनपद हमीरपुर के सभी सात विकास खण्डों में 20 क्लस्टर प्रति विकास खण्ड कुल 140 क्लस्टर में जैविक खेती के विकास की योजना तथा समस्त 07 विकास खण्डों में 700 हे0 प्रति विकास खण्ड, इस प्रकार कुल सभी 07 विकास खण्डों में 4,900 हे0 क्षेत्रफल में जीरो बजट प्राकृतिक खेती की योजना प्रस्तावित है।
जैविक खेती कृषि की यह पद्धति है, जिसमें पर्यावरण को स्वच्छ एवं प्राकृतिक संतुलन को कायम रखते हुए भूमि जल एवं वायु को प्रदूषित किए बिना दीर्घकालीन व स्थिर उत्पादन प्राप्त किया जाता है। इस पद्धति में रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता है। यह पद्धति रसायनिक कृषि की अपेक्षा सस्ती स्वावलम्बी एवं स्थायी है। जैविक खेती से लक्षित उत्पादन प्राप्त करते हुए प्रकृति की सम्पदा, मृदा जीवांश, जल, वायुमण्डल के जीवों में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है तथा मानव स्वास्थ्य पर रसायनों से पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है।
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राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में राजकीय महाविद्यालय, 

पुँवारका, सहारनपुर को आमेलित किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव स्वीकृत



मंत्रिपरिषद ने राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में राजकीय महाविद्यालय, पुँवारका, सहारनपुर को आमेलित किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके तहत राजकीय महाविद्यालय पुँवारका की 5.91 एकड़ भूमि तथा उस पर स्थित भवन एवं परिसम्पत्तियां राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में आमेलित किया जाना प्रस्तावित है।
राजकीय महाविद्यालय, पुँवारका में कार्यरत शैक्षिक एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों को अन्य राजकीय महाविद्यालय में समायोजित करते हुए रिक्त पदों को समाप्त कर दिया जाएगा। वर्तमान में महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र पूर्ववत् इसी महाविद्यालय में अपना कोर्स (बी0ए0/बी0काॅम) पूर्ण करेंगे और चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की ही उपाधि प्राप्त करेंगे एवं आगामी शैक्षिक सत्र 2021-22 से राजकीय महाविद्यालय पुँवारका में छात्रों को प्रथम वर्ष में प्रवेेशित नहीं किया जाएगा।
ज्ञातव्य हैे कि मुख्यमंत्री जी द्वारा सहारनपुर मण्डल एवं प्रदेश के अन्य जनपदों से आने वाले छात्र-छात्राओं को बेहतर उच्च शिक्षा प्रदान करने हेतु जनपद-सहारनपुर में राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की गयी थी। राज्य विश्वविद्यालय सहारनपुर की स्थापना के सम्बन्ध में अधिसूचना दिनांक 07 मार्च, 2019 को निर्गत की गयी। मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में आहूत बैठक दिनांक 26 मई, 2020 में जनपद-सहारनपुर की तहसील-सदर के ग्राम पुँवारका में राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि उपयुक्त पायी गयी तथा राजकीय महाविद्यालय पुँवारका को राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में आमेलित किए जाने का निर्णय लिया गया।
विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु कुल चिन्हित 50.43 एकड़ भूमि में से कृषकों की 43.47 एकड़ भूमि क्रय की जा चुकी है तथा 6.96 एकड़ भूमि सरकारी है, जिसमें 5.91 एकड़ भूमि राजकीय महाविद्यालय, पुँवारका तथा 1.05 एकड़ भूमि नाली/गूल की है।
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उ0प्र0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान 

विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा के 

कुलपति/शिक्षकों केे वेतनमान का पुनरीक्षण प्रस्ताव अनुमोदित



 

मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा में कार्यरत कुलपति/शिक्षकों केे सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के आधार पर वेतनमान का पुनरीक्षण किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश पशुधन संख्या के दृष्टिकोण से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान से सम्बन्धित शिक्षा के संवर्धन और उन्नयन के लिए उ0प्र0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा की स्थापना दिनांक 25 अक्टूबर, 2001 को की गयी। छठवें केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों को दिनांक 01 जनवरी, 2006 से विश्वविद्यालय में कार्यरत कुलपति/शिक्षकों के सम्बन्ध में लागू किया गया है।
सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार वेतन पुनरीक्षण योजना का लाभ केन्द्रीय सरकार के विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं समकक्ष संवर्गाें, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में कार्यरत वैज्ञानिकों एवं निदेशकों तथा प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं समकक्ष संवर्गों को अनुमन्य कराए जाने के दृष्टिगत कुलपति, उ0प्र0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों (कुलपति सहित) को सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुक्रम में वेतन पुनरीक्षण विषयक शासनादेश निर्गत किए जाने का अनुरोध किया गया।
सातवाँ केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार वेतन पुनरीक्षण योजना का लाभ उ0प्र0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा द्वारा विश्वविद्यालय के शिक्षकों (कुलपति सहित) को अनुमन्य कराए जाने से उनका मनोबल बढ़ेगा और उनके द्वारा पूरे मनोयोग से अपने कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्वों का निर्वहन किया जाएगा। इससे नवीन शोधों एवं नवाचारों की सम्भावना प्रबल होगी तथा पशु चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम खुलेंगे। इसका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लाभ छात्रों, शोधार्थियों एवं जनसामान्य को प्राप्त होगा।
प्रस्तावित शासनादेश निर्गत होने से उ0प्र0 पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा में कार्यरत कर्मचारियों को सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की संस्तुतियों के अनुसार वेतन पुनरीक्षण योजना के लाभ का अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी तथा सकारात्मकता एवं सृजनात्मकता बढ़ेगी।

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