प्रदेश के नगर निकायों में 12007 वार्डों के सापेक्ष 11872 वार्डों में डोर-टू-डोर कलेक्शन का कार्य किया जा रहा है

लखनऊः 18 नवम्बर 2020
उत्तर प्रदेश स्वच्छ भारत मिशन (नगरीय) के कुल 652 नगर निकायों को फनंसपजल ब्वदजतवस व् िप्दकपं (फब्प्) द्वारा व्क्थ् प्रमाणित किया गया। वर्तमान में 652 निकायों में से 392 निकाय ओ.डी.एफ. प्लस के रूप में प्रमाणित हो चुके है और 17 निकाय ओ.डी.एफ. प्लस प्लस के रूप में घोषित हो चुके है। प्रदेश के नगर निकायों में 12007 वार्डों के सापेक्ष 11872 वार्डों में डोर-टू-डोर  कलेक्शन का कार्य किया जा रहा है।
नगर विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार निकायों में कुल  887541 व्यक्तिगत शौचालय एवं 61769 सीट के सामुदायिक/ सार्वजनिक शौचालय निर्मित कराये गये है। प्रत्येक निकाय में महिला हेतु पृथक से पिंक शौचालय के निर्माण हेतु भी धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है और 3260 सीट के पिंक शौचालयों का निर्माण निकायों में कराया गया है।
स्वच्छता के क्षेत्र में विशेष रूप से ध्यान दिये जाने का कार्य त्वरित गति से किया जा रहा है और स्वच्छता के प्रोत्साहन हेतु विभाग द्वारा अन्तरवार्ड प्रतिस्पर्धा का भी आयोजन कराया गया। अखिल भारतीय स्तर पर कराये जाने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण में विभाग द्वारा उत्तरोत्तर प्रगति सुनिश्चित की गयी। जहां वर्ष 2018 में स्वच्छ सर्वेक्षण में राज्य के 03 निकाय (नगर निगम गाजियाबाद, आगरा एवं नगर पालिका परिषद समथर, जनपद झांसी) को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ, वहीं स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में राज्य के 14 निकायों को पृरस्कृत किया गया।
स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन हेतु सेनेट्री लैण्डफिल साईट के विकास हेतु नगर विकास विभाग को ‘‘सेवारत’’ विभाग की श्रेणी में रखते हुए ग्राम समाज की भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने के संबंध में आवश्यक आदेश पहले ही जारी किये जा चुके हैं।
ठोस अपशिष्ट के बेहतर प्रबन्धन हेतु मिशन निदेशालय से निकायों को 907.7509 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक अवमुक्त की गयी है, जिसके अन्तर्गत समुचित रूप से ट्विन बिन की स्थापना, ठोस अपशिष्ट का संग्रहण एवं परिवहन तथा मेटेरियल रिकवरी फैसेलिटी सेन्टर का निर्माण एवं प्रोसेसिंग की सुविधा विकसित की जा रही है।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शौंच को गई शिक्षिका की दुष्कर्म के बाद हत्या

हिन्दी में प्रयोग हो रहे किन - कौन किस भाषा के शब्द

बिहार में स्वतंत्रता आंदोलन : विहंगम दृष्टि