-:पुुराने रूप में लौट आने की मनुहार:-





:पुुराने रूप में लौट आने की मनुहार:-

 


ललितपुर
तुम कहां खो गये हो?
जहां बजती थी 
घंटी की झनकार
वहां गोली का प्रहार!
कसम खाते थे लोग
यहां मिलता उधार
वहां होने लगा
मौत का व्यापार
अहिंसा की
प्रेम की थी पुकार
हार और
जीत की
नहीं थी कोई दरकार
प्रेम और
प्रीति की
वहती थी रस धार
नहीं चाहिए
हमें प्रगति और तकरार

बस लौट आओ तुम 

पुराने रूप में एक बार 

नदी शहजाद तुवन मन्दिर 

क्षेत्रपाल,सदनशाह  हो गुलजार 
लौट आओ
पुुराने रूप में
यही हैं मनुहार।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
03/02/2018

सुरेन्द्र अग्निहोत्री, ए -305, ओ.सी.आर.बिल्डिग, विधान सभा मार्ग, लखनऊ 

*ललितपुर में घर से बाहर बुलाकर एक युवक की गोली से छलनी कर मार देने की घटनाक्रम पर ।

 

 




 

 



 



 



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