शीतलहर के कुप्रभाव से पशु/पक्षियों को बचाने की अपील

शीतलहर के कुप्रभाव से पशु-पक्षियों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी
पशुओं से सम्बन्धित जानकारी के लिए पशुधन समस्या निवारण केन्द्र के टोल फ्री नंबर 18001805141 पर करें संपर्क
  दिनाॅकः19 नवंबर-2020
उत्तर प्रदेश के पशुधन विभाग द्वारा प्रदेश में शीत ऋतु प्रारंभ होने के दृष्टिगत शीतलहर के कुप्रभाव से पशु-पक्षियों को सुरक्षित रखने, इस दौरान बीमारी से प्रभावित होने पर उनकी उचित देखरेख एवं प्रबंधन के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पशुओं से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान व जानकारी के लिए पशुपालन निदेशालय के पशुधन समस्या निवारण केन्द्र के टोल फ्री नंबर 18001805141 पर संपर्क किया जा सकता है।
यह जानकारी आज यहां पशुपालन विभाग के निदेशक, रोग नियंत्रण प्रक्षेत्र, डॉ0 यू0 पी0 सिंह ने दी। उन्होंनें बताया कि प्रदेश के सभी मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारियों को परिपत्र जारी करते हुए निर्देशित किया गया है कि शीतलहर के कुप्रभाव से पशु-पक्षियों को बचाने के लिए पशुपालकों में जागरूकता फैलाते हुए पशुओं की देखभाल हेतु आवश्यक जानकारियों का प्रचार प्रसार किया जाए, ताकि पशुधन की रक्षा हो और पशुपालक आवश्यक उपायों को अपनाकर आर्थिक क्षति से बच सकें।
 निदेशक डॉ0 यू0 पी0 सिंह ने बताया कि पशुपालक शीत ऋतु में पशु-पक्षियों को आसमान के नीचे खुले स्थान में ना बांधे और न ही रखें। पशुओं को घिरी जगह तथा छप्पर/शेड से ढके हुए स्थानों पर रखा जाए। रोशनदान दरवाजों एवं खिड़कियों को टाट बोरे से ढक दें, जिससे सीधी हवा का झोंका पशुओं के मुंह तक ना पहुंचे। बाड़े में गोबर एवं मूत्र निकास की उचित व्यवस्था करें। बिछावन में पुआल/लकड़ी का बुरादा/गन्ने की खोई आदि का प्रयोग करें। पशु पक्षियों को बाड़े की नमी व सीलन से बचाने की व्यवस्था की जाए। पशुओं को ताजा पानी पिलाया जाए, ठण्डा पानी न पिलायें।
 उन्होंने कहा कि पशुपालक पशओं को जूट के बोरे का झूल पहनायें। अलाव जलाते समय पशुपालक इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अलाव पशुओं की पहुंच से दूर रखने के लिए इनके गले में छोटी रस्सी बांधे, ताकि पशु अलाव तक न पहंुच सके। धूप निकलने पर पशुओं को अवश्य ही बाहर खुले स्थान पर धूप में खड़ा करें। नवजात बच्चों को खीस (कोनस्ट्रम) अवश्य पिलाएं, इससे बीमारी से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है। प्रसव के बाद मां को ठंडा पानी न पिलाकर, गुनगुना पानी अजवाइन मिलाकर पिलाएं।
इस दौरान भेड़/बकरियों में पी0पी0आर0 बीमारी फैलने की संभावना बढ़ जाती है, अतः बीमारी से बचाव का टीका अवश्य लगवाएं। चूजा/मुर्गी के घरों में उचित तापमान हेतु मानक के अनुसार व्यवस्था कर शीतलहर से बचाएं। पशुपालक गर्भित पशु का विशेष ध्यान रखें एवं प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा को ध्यान में रखकर शीत लहर से बचाएं। ठण्ड से प्रभावित पशु के शरीर में कपकपी,बुखार के लक्षण होते हैं,ऐसी स्थिति में तत्काल निकटतम पशु चिकित्सक को दिखाएं। पशुपालक आपदा से पशु की मृत्यु होने पर राहत राशि प्राप्त करने के लिए राजस्व विभाग से संपर्क स्थापित करें।


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