सात नौनिहालों को मिली एचआईवी से मुक्ति

एचआईवी ग्रसित मां की कोख में पल रहे नवजात को बचाने की मुहिम

0 दो सालों में आहना प्रोजेक्ट ने सात बच्चों को नया जीवन दिया, दस की निगरानी जारी

0 कोरोना संकट के समय भी एचआईवी ग्रसित मरीजों को घर-घर जाकर दवाएं दी


हमीरपुर,

एचआईवी ग्रसित महिला की कोख में पल रहे नवजात को इस बीमारी से बचाने को लेकर काम करने वाली यूपीएनपी प्लस संस्था के आहना प्रोजेक्ट ने कोरोना काल में अहम भूमिका निभायी है। मां-बच्चों को दवा का संकट न हो, इसके लिए टीम के सदस्यों ने घर-घर जाकर दवाएं दी। उनके प्रयास से सात बच्चों का जीवन सामान्य हो गया। दस बच्चों की अब भी निगरानी जारी है।

जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ.महेशचंद्रा ने बताया कि आहना प्रोजेक्ट एचआईवी ग्रसित महिलाओं और उनसे पैदा होने वाली संतानों की देखरेख में अच्छी भूमिका निभा रहा है। मंगलवार को विश्व एड्स दिवस (एक दिसंबर) पर जनपद में चार स्थानों हमीरपुर जिला अस्पताल, राठ सीएचसी, सुमेरपुर पीएचसी और गोहाण्ड पीएचसी में कैंप लगाकर लोगों को एड्स से बचाव के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनपद में एचआईवी/एड्स को लेकर स्थिति नियंत्रण में है।

 

संस्था की प्रोजेक्ट मैनेजर विजयलक्ष्मी ने बताया कि उनकी संस्था वर्ष 2018 से इस मुद्दे पर काम कर रही है। कोरोना का संकट जब आया तो कई बार स्थिति बिगड़ी, लेकिन टीम के सदस्यों ने अच्छे तरीके से अपनी जिम्मेदारियों को अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि गुजरे दो सालों में उनकी संस्था ने 20 एचआईवी ग्रसित महिलाओं और उनकी कोख से जन्म लेने वाले नवजातों की देखभाल और उन्हें इस बीमारी से उबारने में अहम भूमिका निभाई है। इन 20 महिलाओं से कुल 17 बच्चे जन्में, जिनमें अब तक 7 बच्चे पूरी तरह से सामान्य हो चुके हैं। टीम ने 18 माह तक इन बच्चों का फालोअप किया। फाइनल चेकअप में सभी बच्चे एचआईवी निगेटिव आए। अभी दस बच्चों की निगरानी जारी है।

प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि कोरोना के दौरान स्थिति बिगड़ी। खासतौर पर प्रवासी मजदूरों के सामने दवा का संकट न हो, इसके लिए लगातार उनकी टीम स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में रही। तीन ऐसी महिलाएं मिली जो एचआईवी ग्रसित होने के साथ ही गर्भवती थी। इन तीनों को उनकी टीम ने घर जाकर कोरोना संकट के समय दवाएं मुहैया कराई। तीनों ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया, जिनकी निगरानी जारी है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष के ग्यारह माह में अब तक आठ महिलाएं ऐसी मिली हैं, जो गर्भवती होने के साथ-साथ एचआईवी ग्रसित हैं।

प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि एचआईवी ग्रसित महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया जाता है। इसके लिए सेफ डिलेवरी किट की व्यवस्था की जाती है। एचआईवी संक्रमित बच्चों को एनवीपी (न्योरापाइन सीरप) उपलब्ध कराते हैं। बच्चों को 18 माह तक फालोअप में रखते हैं।

 

आहना संस्था के चार प्रमुख बिंदु

पहला- शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की एचआईवी स्क्रीनिंग। दूसरा- पॉजिटिव आने पर एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थैरिपी) लिंक करना।

तीसरा- बच्चों का डीबीएस टेस्ट (ड्राई ब्लड सैंपल) कराना।

चौथा- पति व मौजूदा बच्चों की एचआईवी जांच कराना।

 

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