कुछ होने का इंतज़ार क्यों...

कुछ होने का इंतज़ार क्यों... कोई कर्म करो कुछ होने का इंतज़ार क्यों
ख़ुशी बांट किसी के रोने का इंतज़ार क्यों
मीलों पसरा आसमान ये तेरा अपना है
फिर छुपते किसी कोने का इंतज़ार क्यों
तुम कश्ती के वज़ूद को ज़िंदा ही रहने दो
हवा संग किसी के डुबोने का इंतज़ार क्यों
खुद की हिफाज़त करना राह के झोल से
तेरे दुश्मन के शूल चुभोने का इंतज़ार क्यों
हर कदम एहतियात से रखना तुम "उड़ता"
तेरी ज़िन्दगी में काँटे बोने का इंतज़ार क्यों
सुरेंद्र सैनी बवानीवाल "उड़ता

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