वर्ष 2016 व 17 से लेकर 2019 व 20 तक उत्कृष्ट कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश ने नौ पुरस्कार जीते हैं- राजेंद्र प्रताप सिंह 'मोती सिंह'

सुरेन्द्र अग्निहोत्री लखनऊः दिनांक 17 फरवरी, 2021।उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम विकास, श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह ‘मोती सिंह’ और राज्य मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने लोकभवन में अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास योजनाओं में रिकॉर्ड काम किया गया है। वर्ष 2016 व 17 से लेकर 2019 व 20 तक उत्कृष्ट कार्य करते हुए उत्तर प्रदेश ने नौ पुरस्कार जीते हैं। प्रदेश में कुल 14 लाख 34 हजार आवास पूर्ण कर लिए है। कुल 49.54 लाख पात्र परिवारों का सर्वेक्षण हुआ है। 6.10 लाख लाभार्थियों को प्रथम एवं द्वितीय किस्त की धनराशि का डिजिटल वितरण किया गया। ग्राम विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शेष पात्र लोगों को भी आवास उपलब्ध कराएं जाएंगे। प्राकृतिक आपदा, जेईई एई, कुष्ठ रोग से प्रभावित एवं वन टांगिया मुसहर जाति केलोगों को भी आवास दिए जाने की योजना भी बनाई गई। मोती सिंह ने बताया कि मनरेगा के तहत गत चार वर्षों में 99. 25 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए। 2020- 21 में 110. 52 लाख श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।उन्होंने बताया कि 12.30 लाख प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया। तीन वर्षों से मनरेगा योजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उत्तर प्रदेश को पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2020- 21 मई जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा मनरेगा योजना अंतर्गत तीन पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रेस वार्ता में अपने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि-
1- प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण-
योजनान्तर्गत सभी बेघर परिवारों एवं कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण मकानों में रह रहे परिवारों को वर्ष 2022 तक बुनियादी सुविधायुक्त पक्का आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य। ऽ वर्ष 2016-17 से 2019-20 तक भारत सरकार द्वारा प्रदेश को 14.61 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य दिया गया जिसके सापेक्ष 15 फरवरी, 2021 तक 14.34 लाख आवास पूर्ण, शेष आवास निर्माणाधीन है। ऽ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की स्थायी पात्रता सूची संतृप्त। ऽ सेक सर्वेक्षण-2011 से छूटे हुए 49.54 लाख पात्र परिवारों का विवरण आवास प्लस पर अपलोड। ऽ वर्ष 2020-21 में आवास प्लस से भारत सरकार द्वारा प्रदेश को 7.32 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य दिया गया, जिसके सापेक्ष अबतक 7.17 लाख आवासों की स्वीकृति करते हुए 6.84 लाख लाभार्थियों को प्रथम एवं 1.60 लाख लाभार्थियों को द्वितीय किश्त निर्गत। शेष आवासों के स्वीकृति की कार्यवाही प्रचलन में है। ऽ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को मा0 प्रधानमंत्री जी के करकमलों द्वारा 20 जनवरी, 2021 को प्रदेश के 6.10 लाख लाभार्थियों को प्रथम एवं द्वितीय किश्त की धनराशि का डिजिटल अन्तरण किया गया। ऽ उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत गत वर्ष उत्कृष्ट कार्य के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सर्वाधिक 09 पुरस्कार दिए गये।
2- मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण-
योजना वर्ष 2018-19 में प्रारम्भ की गयी। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित, कालाजार से प्रभावित, जे0ई0/ए0ई0एस0 एवं कुष्ठ रोग से प्रभावित तथा वनटांगिया/मुसहर वर्ग के आवासविहीन या कच्चे/जर्जर आवास में निवास कर रहे परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है। ऽ मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत 23 दिसम्बर, 2019 को लोक भवन में कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवारों को पूर्ण आवास की चाभी वितरण का कार्यक्रम मा0 राज्यपाल महोदया, पूर्व मा0 राज्यपाल महोदय एवं मा0 मुख्यमंत्री जी की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। ऽ वर्ष 2018-19 से 2019-20 तक मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत 50,740 परिवारों को लाभान्वित कराया जा चुका है, जिसमें 28,295 मुसहर वर्ग तथा 4,602 वनटांगिया वर्ग के लाभार्थियोें के साथ 2115 कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवार लाभान्वित। ऽ वर्ष 2020-21 में 21,562 लाभार्थियों को दिनांक 29 दिसम्बर, 2020 को मा0 मुख्यमंत्री जी के हाथों से प्रथम किश्त का डिजीटल हस्तान्तरण किया गया। इनमें 10,555 प्राकृतिक आपदा, 877 कुष्ठ रोग से प्रभावित परिवार एवं 9,817 मुसहर वर्ग, 177 वनटांगिया वर्ग, जे0ई0/ए0ई0एस0 से प्रभावित 107 और कालाजार से प्रभावित 29 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। ऽ इस प्रकार अबतक 72,302 पात्र परिवार योजना से लाभान्वित।
3- महात्मा गाॅधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनाः-
विगत 4 वर्षों में 99.25 करोड़ मानव दिवस सृजित। ऽ वित्तीय वर्ष 2020-2021 में 110.52 लाख श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। ऽ 460978 परिवारों को 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया, जो योजना आरम्भ से सर्वाधिक है। ऽ कोविड महामारी के दौरान विभिन्न प्रदेशों से लौटकर आए 12.52 लाख प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। ऽ गरीब कल्याण रोजगार अभियान के अन्तर्गत प्रदेश द्वारा कुल 9.05 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये। ऽ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन योजनान्तर्गत 25 नदियों का पुनस्द्धार, वृक्षारोपण, तालाब का निर्माण, चारागाह भूमि का विकास, टंकी का निर्माण आदि कार्य कराये गये। ऽ मनरेगा कन्वर्जेन्स अन्तर्गत 24798 पंचायत भवन एवं 56960 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। ऽ मनरेगा योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 में 8.80 करोड़ पौधों का रोपण कराया गया। ऽ जल संचयन हेतु वित्तीय वर्ष 2018-19 में 21002, 2019-20 में 16579 एवं वित्तीय वर्ष 2020-21 में 19951 तालाबों का निर्माण कराया गया। ऽ विगत 04 वर्षो में मनरेगा, बाल विकास एवं पुष्टाहार एवं पंचायती राज विभाग के मध्य अभिसरण कर कुल 15541 आंगन बाड़ी केन्द्रों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया । ऽ वित्तीय वर्ष 2017-18 से वित्तीय वर्ष 2020-21 के मध्य आजीविका संवर्धन हेतु कुल 464141 व्यक्तिगत लाभार्थी परक परिसंपत्तियों का सृजन किया गया है । ऽ विगत् 04 वर्षो में जल संचयन एवं सरक्षण के अन्तर्गत कुल 775346 कार्य कराए गए हैं। ऽ वित्तीय वर्ष 2020-21 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के 896 स्वयं सहायता समूहों की 4308 महिलाओं द्वारा धनराशि रू 12.77 करोड़ के 35941 नागरिक सूचना पट ;Citçen Information Boardn~ निर्मित किए जा चुके है। ऽ प्रदेश की 3300 ग्राम पंचायतों में श्रम-बजट का निर्माण ळप्ै तकनीक के माध्यम से किया जा रहा है। ऽ उन्नति योजनान्तर्गत भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु प्रदेश के कुल 1925 लाभार्थियों के कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। पुरस्काररू ऽ विगत 3 वर्षों मे मनरेगा योजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य के लिए उत्तर प्रदेश को पुरस्कृत किया गया है। ऽ वित्तीय वर्ष 2020-21 में जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मनरेगा योजनान्तर्गत 3 उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। ऽ वित्तीय वर्ष 2019-20 में भारत सरकार द्वारा प्रदेश को मनरेगा में उत्कृष्ट कार्य के लिए 07 श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया। मनरेगा योजनान्तर्गत विगत 02 वर्षों में किए गए अन्य प्रयास
तकनीकी समावेश- विगत 4 वर्षों मे मनरेगा योजना मे पारदर्शिता, जवाब देयता एवंaccuracy बढ़ाने हेतु विभिन्न तकनीकी प्रणालियों का उपयोग करते हुए कार्य कराया जा रहा है- ऽ आधार सीडिंग- पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए श्रमिकों की आधार सीडिंग कराई जा रही है, कुल क्रियाशील 1.46 करोड़ श्रमिकों के सापेक्ष 1.06 क्रियाशील श्रमिकों की आधार सीडिंग पूर्ण कर दी गयी है । 61.02 लाख श्रमिकों का भुगतान आधार बेस पेमेन्ट के माध्यम से किया जा रहा है। ऽSECURE महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत में किये जाने वाले कार्यो के प्राक्कलनSECURESoftware के माध्यम से online बनाये जा रहे है। वित्तीय वर्ष 2020-21 मेंSECURE पर कुल 14.00 लाख कार्य प्राप्त हुये है। जिसके सापेक्ष 10.30 लाख कार्यों के प्राक्कलन बनाने के उपरान्त 9.80 लाख कार्यो की तकनीकी स्वीकृति तथा 9.45 लाख कार्यों की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। ऽ ळमवजंहहपदहरू मनरेगा योजनान्तर्गत सभी कार्यो की त्रिस्तरीय जीओटैगिंग यथा- कार्य प्रारम्भ से पूर्व, कार्य के मध्य तथा कार्य की समाप्ति के पश्चात करायी जा रही है। प्रदेश में कुल 43.16 लाख परिसम्पत्तियों की जीओटैगिंग पूर्ण कर ली गयी है । ऽGISPlanning: नियोजन प्रक्रिया को सशक्त करने के लिए ग्राम पंचायतों को सैचुरेट करने हेतु GIS BasedTechnology का प्रयोग कर वित्तीय वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 हेतु प्रत्येक जनपद के प्रत्येक विकास खण्ड से 08 ग्राम पंचायतों को चयनित किया गया है। इसके अन्तर्गत अब तक कुल 3296 ग्राम पंचायतों का GIS BASED पर आधारित प्लान बनाने हेतु चयन किया जा चुका है जिसके सापेक्ष अब तक कुल 2736 ग्राम पंचायतों का जी0आई0एस0 बेस्ड प्लान बनाते हुए नरेगा साफ्ट पर अपलोड किया जा चुका है। इन चयनित ग्राम पंचायतों को ही मनरेगा ग्राम के रूप में विकसित भी किया जा रहा है। ऽ Mobile Monitoring System: श्रमिकों के ससमय भुगतान हेतु मनरेगा योजनान्तर्गत डवइपसम डवदपजवतपदह ैलेजमउ तकनीक का प्रयोग करते हुये अद्यतन स्थिति अनुसार अब तक कुल 30386 मोबाइल डिवाइस का रजिस्ट्रेशन कराया जा चुका है। ऽ एस0एम0एस0 के माध्यम से रोजगार:-मनरेगा योजनान्तर्गत इच्छुक श्रमिकों द्वारा कार्य की माॅग का आवेदन अब मोबाईल नं0ः-09454464999 एवं 09454465555 पर एस0एम0एस0 के माध्यम से भी किया जा सकता है।
4- श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशनः-
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना, आधारभूत सेवाओं मे वृद्धि करना और सुव्यस्थित रूर्बन क्लस्टरों का सृजन करना है। योजना के मुख्य बिन्दु- ऽ ग्रामीण शहरी अन्तर को समाप्त करना। ऽ ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी पर बल देते हुए स्थानीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना। ऽ क्षेत्र में विकास का प्रसार करना। ऽ ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करना। ऽ प्रथम चरण में 08 क्लस्टर्स हेतु सी0जी0एफ0 की कुल धनराशि रू0 163.50 करोड़ प्राप्त हुई है, जिसमें से रू0 103.91 करोड़ (63 प्रतिशत) की धनराशि व्यय की जा चुकी है। ऽ द्वितीय चरण में 08 क्लस्टर्स हेतु सी0जी0एफ0 की कुल धनराशि रू0 149.40 करोड़ प्राप्त हुई है, जिसमें से रू0 105.00 करोड़ (70 प्रतिशत) की धनराशि व्यय की जा चुकी है। ऽ
तृतीय चरण में 03 क्लस्टर्स हेतु सी0जी0एफ0 की कुल धनराशि रू0 59.96 करोड़ प्राप्त हुई है, जिसमें से रू0 26.45 करोड़ (44 प्रतिशत) की धनराशि व्यय की जा चुकी है। योजनान्तर्गत विगत 02 वर्षों में किये गये प्रयास-
योजनान्तर्गत समस्त 19 क्लस्टर व्क्थ् हो चुके हैं, जिसके अन्तर्गत 21500 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया गया है। ऽ योजनान्तर्गत क्लस्टर में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले समस्त परिवारों को 9375 एल0पी0जी0 गैस कनेक्शन से आच्छादित किया गया है। ऽ योजनान्तर्गत 8445 व्यक्तियों कौशल विकास प्रषिक्षण दिया गया है। ऽ 97.37 कि0मी0 सम्पर्क मार्ग एवं सी0सी0 रोड का निर्माण अब-तक किया जा चुका है। ऽ समस्त क्लस्टर में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। ऽ सी0जी0एफ0 अन्तर्गत 4360 सोलर स्ट्रीट लाइट एवं 113 हाई मास्ट सोलर लाइट का निर्माण किया गया है। ऽ योजनान्तर्गत 14 ओवर हेड टैंक, 46 टी0टी0एस0पी0, 20 वाटर ए0टी0एम0 का निर्माण कराया गया है। ऽ 18 बहुउद्देशीय सामुदायिक भवन एवं 19 बारात घर का निर्माण किया जा चुका है। ऽ 94 स्मार्ट क्लास रूम, 425 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का उन्नयन किया गया है। ऽ 110 आर0ओ0 प्लांट का निर्माण प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किया गया है। पुरस्कार ऽ वर्ष 2019-20 में उत्तर प्रदेश को Overall PerformancerFkk Rurban Soft Integration in PFMS में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। क्र.सं. श्रेणी स्थान 1 Overall Performance द्वितीय 2 Rurban Soft Integration in PFMS प्रथम 5- उ0प्र0 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनः-
माननीय मुख्य मंत्री जी के मार्गदर्शन में ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम विकास विभाग के दिशा निर्देशन में वर्तमान वित्तीय वर्ष में उ0प्र0 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का क्रियान्वयन इन्टेन्सिव रणनीति के अन्तर्गत राज्य के 75 जनपदों के 592 विकास खण्डों में किया जा रहा है जिसको अगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रदेश के सभी 826 विकास खंडो में सघन रणनीति के अनुसार आच्छादन हेतु प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। मिशन अंतर्गत अभी तक कुल 4.22 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 44.47 लाख परिवारों को आच्छादित किया गया है। विगत दो बर्षो में मिशन अंतर्गत कुल 192524 स्वयं सहायता समूहों का गठन करते हुए 21 लाख से अधिक परिवारों को आच्छादित किया गया है जो की मिशन की सम्पूर्ण देश में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बिगत दो वर्षो में कुल 118688 स्वयं सहायता समूहों को 15000 रूपए प्रति समूह की दर से रिवॉल्विंग फण्ड, 102494 स्वयं सहायता समूहों को सामुदायिक निवेश निधि के रूप में 110000 रूपए प्रति समूह की दर से वितरण, 70846 स्वयं सहायता समूहों को बिबिधिकृत आजीविका सम्बंधित गतिबिधियो से आच्छादन हेतु बैंक क्रेडिट लिंकेज द्वारा ऋण की उपलब्धता कराई गयी है। मा0 मुख्यमंत्री जी के विशेष दिशा निर्देशन के क्रम में वंचित समुदाय को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने की दिशा में गत वर्षो में प्रदेश के 19 जनपदों के 2843 ग्राम पंचायतों में मुसहर समुदाय के 965 विशिष्ट मुसहर समूह का गठन , 05 जनपदों के 34 ग्राम पंचायतों में वनटांगिया समुदाय के 315 समूहों का गठन, बावरिया समुदाय के 2346 परिवारों को 236 समूहों में संगठित करते हुए आजीविका संबर्धन द्वारा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सफलता पूर्वक कार्य किया जा रहा है। विगत दो वर्षो में मिशन द्वारा निरन्तर आजीविका संबर्धन को बढावा देने हेतु माननीय मुख्य मंत्री जी के मार्गदर्शन में निरन्तर नए आयाम स्थापित किये गये है जिनमे प्रमुख रूप से स्वयं सहायता समूह की सदस्यों द्वारा 1.02 करोड़ मास्क निर्माण, 1.28 स्कूल ड्रेस निर्माण , बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी के माध्यम से 7000 महिला सदस्यों के साथ बुंदेलखंड में प्रतिदिन 22 हजार 500 किलो ग्राम दुग्ध का संग्रह, प्रदेश की सभी 58000 ग्राम पंचायतो में ठब् सखी के माध्यम से वित्तीय संवेशन समन्धित गतिबिधियो को बढ़ावा देना सम्बंधित कार्य , सुखा राशन वितरण में 67143 समूहों द्वारा ड्राई राशन की उपलब्धता का कार्य 162217 आगनवाडी केन्द्रों पर किया जा रहा है, , स्टार्टअप विलेज इंटर प्रयूनेरशिप प्रोग्राम के अंतर्गत कुल 7769 लघु उधमियों को लाभान्वित किया जाना, 29 लाख सोलर स्टडी लैम्प को विद्यार्थियों को उपलब्ध कराया जाना प्रमुख है। प्रदेश को गत वर्ष आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य हेतु प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर भारत सरकार द्वारा गोल्ड मेडल प्रदान किया गया, 3774 महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्यों द्वारा बिल कलेक्शन समबन्धित कार्य किया किया जा रहा हैद्य उचित दर की दुकान का सञ्चालन एवं प्रबंधन की दिशा में 1116 दुकान का आवंटन स्वयं सहायता समूह को किया जा चुका हैद्य पंचायती राज बिभाग से अभिसरण के माध्यम से ग्राम स्तर पर कुल 501 विकास खंडो में 9817 ग्राम पंचायतो के सामुदायिक शौचालय का प्रबंधन समूह की महिलाओ द्वारा किया जा रहा है। कृषि आजीविका अंतर्गत 52 जनपद अंतर्गत 250 विकास खण्डों में 3.1 लाख महिला किसान परिवारों को कृषि आजीविका संवर्धन गतिविधि अन्तेर्गत अंगीकृत किया जाना, प्रदेश के 39 जनपदों अंतर्गत 1515 उत्पादक समूहों का गठन, इन उत्पादक समूहों अंतर्गत 22,725 महिला किसान प्रोडूसर द्वारा ग्राम स्तर पर अधिशेष उत्पादन का संग्रहण, सोर्टिंग, ग्रेडिंग, क्लीनिंग एवं पकेजिंग का कार्य की दिशा में कार्य किया जा रहा है। 6- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाः-
तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व0 अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना 25 दिसम्बर, 2000 को प्रारम्भ हुयी थी। योजना के प्रारम्भ में 100 प्रतिशत केन्द्रांश की व्यवस्था थी लेकिन वित्तीय वर्ष 2015-16 से 60 प्रतिशत केन्द्रांश तथा 40 प्रतिशत राज्यांश की व्यवस्था प्रारम्भ हुयी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में 500 या इससे अधिक आबादी वाले सड़क-सम्पर्क से वंचित गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है। इस योजना के माध्यम से मैदानी व पहाड़ी राज्यों की छोटी बस्तियों व गांवों में आॅल वेदर रोड कनेक्टिविटी मुहैया करायी जाती है। प्रदेश के नक्सल समस्या प्रभावित जनपदों सोनभद्र, चन्दौली एवं मिर्जापुर में मानक को शिथिल करते हुये 250 या उससे अधिक आबादी वर्ग की बसावटों को बारहमासी मार्गों से जोड़ा जा चुका है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत अब तक उत्तर प्रदेश में रू0 18729.47 करोड से 56861.97 किमी0 सड़क का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-3 के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 तक उत्तर प्रदेश के लिए 18937.05 किमी0 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उत्तर प्रदेश में प्रथम बैच के अन्तर्गत रू0 4177.8 करोड़, 6287.37 किमी0 लम्बाई के 898 मार्ग की स्वीकृति प्राप्त हो गयी है। 7- सतत् विकास लक्ष्य (एस0डी0जी0) संख्या-1 ’’निर्धनता उन्मूलन’’ः-
ऽ प्रदेश में ग्राम्य विकास विभाग को लक्ष्य संख्या-1 ’’निर्धनता उन्मूलन’’ हेतु नोडल विभाग नामित किया गया है तथा 35 अन्य सहयोगी विभाग हैं। ऽ उक्त सभी विभागों द्वारा प्रदेश के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में निर्धनता उन्मूलन हेतु चलाई जा रही लाभार्थीपरक व सामुदायिकपरक योजनाओं के 147 बिन्दुओं/गतिविधियों को सम्मिलित करते हुए 03 वर्षीय एक्शन प्लाॅन, 07 वर्षीय मध्यवर्तीय रणनीति तथा विजन-2030 तैयार कर विभागवार प्रगति का नियमित अनुश्रवण किया जा रहा है। ऽ उक्त 147 बिन्दुओं/गतिविधियों में से 88 गतिविधियों के वर्ष 2019-20 में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शतप्रतिशत पूर्ति की जा चुकी है। शेष 59 गतिविधियों की लक्ष्य पूर्ति करायी जा रही है। ऽ प्रदेश में दिनांक 2 व 3 अक्टूबर, 2019 को विधानसभा व विधान परिषद का विशेष संयुक्त सत्र आयोजित कर सतत् विकास लक्ष्य (एस0डी0जी0) पर गहन विचार-विमर्श किया गया है। ऽ एस0डी0जी0 डैशबोर्ड के माध्यम से जनपदवार समीक्षा का माॅडल तैयार किया गया है। 8- ईज आॅफ लिविंग सर्वे-2020:-
ऽ ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार सामाजिक आर्थिक एवं जातिगत जनगणना-2011 में चिन्हित लगभग 1.03 करोड वंचित परिवारों के विभिन्न विभागों की 06 योजनाओं यथा मनरेगा, आवास, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, मोबाइल फोन, राशनकार्ड तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य-आयुष्मान भारत गोल्ड कार्ड योजना से आच्छादन की स्थिति के आधार पर उनके जीवन स्तर में हुए सुधार के आंकलन हेतु प्रदेश में ग्राम्य विकास विभाग द्वारा ईज आॅफ लिविंग सर्वे-2020 कराया जा रहा है। ऽ राष्ट्रीय स्तर पर सर्वे पूर्णता के आधार पर प्रदेश चैथे स्थान पर है। ऽ योजना से अनाच्छादित परिवारों को अन्र्तविभागीय समन्वय द्वारा योजनान्तर्गत लाभान्वित कराया जा रहा है। 9- मिशन अन्त्योदय सर्वे-2020:-
ऽ ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश की समस्त 58813 ग्राम पंचायतों में आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं की उपलब्धता तथा 29 विभागों के 143 बिन्दुओं के विभिन्न सामाजिक आर्थिक संकेतांकों के आधार पर वर्ष 2019 व 2020 में मिशन अन्त्योदय सर्वे कराया गया। ऽ मिशन अन्त्योदय सर्वे में प्राप्त क्रिटिकल गैप्स के आधार पर पंचायतीराज विभाग द्वारा ग्राम पंचायत विकास प्लाॅन (जी0पी0डी0पी0) तैयार किया जाना है। ऽ भारत सरकार द्वारा विभिन्न विभागों को अपनी कार्ययोजना तैयार करने में मिशन अन्त्योदय सर्वे के आंकडों का उपयोग किये जाने पर बल दिया गया है। 10- आकांक्षापरक जनपद:-
ऽ नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा प्रदेश के 08 जनपदों यथा चित्रकूट, बलरामपुर, बहराइच, सोनभद्र, श्रावस्ती, चन्दौली, सिद्धार्थनगर व फतेहपुर को चयनित किया गया है। ऽ निर्धारित संकेतांकों में ग्राम्य विकास के अन्तर्गत मनरेगा का 01, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 02 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का 01 संकेतांक है। ऽ गत वर्ष (2019) व वर्तमान वर्ष (2020) की डेल्टा रैंकिंग में ग्राम्य विकास विभाग के संकेतांकों में बढोत्तरी हुई है। ऽ माह नवम्बर 2020 में राष्ट्रीय स्तर पर जनपद सिद्धार्थनगर की 06वीं तथा जनपद चित्रकूट की 09वीं रैंक रही। ऽ इसी माॅडल के आधार पर प्रदेश में 34 जनपदों के 100 विकासखण्डों को आकांक्षापरक विकासखण्ड के रूप में चयनित कर विकसित किया जा रहा है। 11- विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि (विधायक निधि),
ऽ विधायक निधि योजना के अन्तर्गत मा0 विधान मण्डल सदस्यों द्वारा दिये गये प्रस्तावों के सापेक्ष उनके विधान सभा क्षेत्रों के विकास हेतु सड़क, पुल, पुलिया, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, शिक्षण संस्थानों के कक्ष निर्माण, पुस्तकालय, सरकारी अस्पतालों के लिए एक्सरे मशीन, एम्बुलेन्स सुविधा, फायर ब्रिगेड वाहन एवं अन्य उपकरण क्रय किये जाने आदि जैसे अनुमन्य कार्य कराये जाते है। ऽ वित्तीय वर्ष 2017-18 में रू0 456.99 करोड़ व्यय के सापेक्ष 5583 परियोजनाए, 2018- 19 में रू0 733.65 करोड़ व्यय के सापेक्ष 12957 परियोजनाए, 2019-20 में रू0 695.10 करोड़ व्यय के सापेक्ष 6076 परियोजनाएं एवं 2020-21 में रू0 517.15 करोड़ व्यय के सापेक्ष 5364 परियोजनाओं को पूर्ण कराया गया। इस अवसर पर राज्य मंत्री आनंद शुक्ला व अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार,एल व्येक्टेश लू,महानिदेशक, दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, ग्राम विकास आयुक्त के. रवींद्र नायक,सुजीत कुमार, योगेश कुमार अपर आयुक्त मनरेगा भी उपस्थित थे।

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