पुुराने रूप में लौट आने की मनुहार

पुुराने रूप में लौट आने की मनुहार
ललितपुर
तुम कहां खो गये हो?
जहां बजती थी
घंटी की झनकार
वहां गोली का प्रहार!
कसम खाते थे लोग
यहां मिलता उधार
वहां होने लगा
मौत का व्यापार
अहिंसा की
प्रेम की थी पुकार
हार और
जीत की
नहीं थी कोई दरकार
प्रेम और
प्रीति की
वहती थी रस धार
नहीं चाहिए
हमें प्रगति और तकरार
लौट आओ
पुुराने रूप में
यही हैं मनुहार।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
03/02/2018

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बिहार में स्वतंत्रता आंदोलन : विहंगम दृष्टि

सरकारी पद पर कोई भर्ती नहीं होगी केंद्र सरकार ने नोटिस जारी कर दिया

शौंच को गई शिक्षिका की दुष्कर्म के बाद हत्या