अश्कों का समंदर

तेरी राह तकते-तकतेअश्कों का ये समंदर बह जाया करता था, अब ये भी थम सा गया है, तेरी यादों का दद॔ इसमें समा गया है,। जीने की राह बहुत थी पर तेरे जैसी गहराई कहीं न मिली, कभी खुद से धोखा खा लिया कभी अपनों से तनहा हो गये, ये तन्हाई का आलम इम्तहान बन गया,।कभी बिछड़ने का दौर आया तो कभी मिलने का हर वक्त नाजुक हालात थे ये अश्कों का समंदर भरने लगा बहती हुई जलधाराओं का वेग था, न रोक पाये,।ह्रदय की गहराइयों में सीपियोंसा तुम्हारा तेज चमकने लगा समेट ली थी ये सीपियाँ ह्रदय सागर में तुम्हारी यादों के मणि रत्न की तरह अश्कों का ये समंदर लहरों में बदल गया और ये समां तेरी चौखट के किनारे आकर रुका गया और तुझे देख कर फिर से ये अश्क बहने लगे और ये थमा हुआ समां फिर से तुझे महसूस करने लगा,, ।।🌹सन्तोषी किमोठी वशिष्ठ 🌹

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