कोविड-19 के बावजूद भी बाढ़ से बचाव संबंधी तैयारियां जोरों पर

लखनऊः 13 अप्रैल, 2021 सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा वर्षाकाल से पूर्व की गई तैयारियों की वजह से वर्ष 2019-20 में जनधन व फसलों आदि की हानि को नगण्य करने में व्यापक सफलता प्राप्त हुई। चालू वित्तीय वर्ष में भी कोविड-19 के संकट के बावजूद भी बाढ़ से बचाव के लिए तटबन्धों की मरम्मत आदि की तैयारियां पहले से ही की जा रही है। इसके साथ ही कार्य स्थल पर कोरोना संबंधी प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करते हुए निर्माण कार्यों को मानसून से पूर्व कराये जाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गई जानकारी के अनुसार बाढ़ से बचाव हेतु नदियों पर 523 तटबन्ध, जिनकी लम्बाई 3869 किलोमीटर है एवं जलोत्सारण हेतु 6831 नाले हैं, जिनकी लम्बाई 50073 किलोमीटर है। मानसून से पहले तटबन्धों को सुरक्षित रखने के लिए फ्लड फाइटिंग की तैयारी तेजी से करायी जा रही है, ताकि वर्षा काल में तटबन्ध के किनारे के गांव सुरक्षित रहें, और जनधन की हानि न हो। वर्ष 2019-20 में प्रदेश के सीमावर्ती प्रदेशों एवं नेपाल राष्ट्र से समन्वय कर अतिवृष्टि के फलस्वरूप यमुना, चम्बल, केन, बेतवा, रिहन्द, घाघरा (सरयू), राप्ती, रोहिन, गण्डक तथा गंगा में प्रवाहित होने वाले 22 लाख क्यूसेक तक के डिस्चार्ज को भी आसानी से उ0प्र0 की सीमाओं में परिवहन कराया गया, जबकि सीमावर्ती प्रदेशों में बाढ़ की विभीषिका से बड़े पैमाने पर जनधन की हानि हुई। इस वर्ष भी मानसून से पहले बाढ़ से बचाव हेतु सभी तैयारियां तेजी से पूरी करायी जा रही हैं।

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