श्री राजेंद्र रजक जनचेतना के संवाहक नेता थे- सुरेंद्र अग्निहोत्री

ललितपुर जनपद में गरीब बेसहारा मजलूम और शोषित पीड़ित के मसीहा बनकर उभरे डॉक्टर शादी लाल के सानिध्य में समाजवादी पार्टी समाजवादी विचारों का पाठ पढ़ने वाले राजेंद्र रजक नेताजी के हृदयाघात से निधन हो जाने से जनपद में एक होनहार कर्मठ और युवा को खो दिया है ।यह विचार वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र अग्निहोत्री ने व्यक्त करते हुए कहा की सहरिया आदिवासियों से लेकर पत्थर खदान मजदूरों तथा माफियाओं से लड़ने वाले योद्धा संपादक पत्रकार जन नेता राजेंद्र रजक ने 80 के दशक में डॉक्टर शादी लाल दुबे के सानिध्य में संघर्ष और चेतना फेलाने की जो लड़ाई लड़ी जिसका परिणाम है कि ललितपुर के शोषित और पीड़ित लोगों को माफियाओं दबंगों से लड़ने की ताकत मिली। ललितपुर में पत्थर खदान मजदूरों के बीच निरंतर काम करने वाले राजेंद्र रजक खनन माफिया तथा राशन माफियाओं से लेकर वन माफियाओं एवं राजनैतिक माफियाओं से वैचारिक लड़ाई लड़ने के बाद वैश्वीकरण के बाद बदलती परिस्थितियों से लोगों को आगाह करने के लिए लोहिया दिशा नामक पत्रिका के माध्यम से सामाजिक जनचेतना और वैश्वीकरण के खतरों से आगाह करने के लिए निरंतर कार्य करते रहे है। श्री रजक अपराजेय योद्धा के रूप में जाने जाते रहेंगे । श्री रजक ने अपना पूरा जीवन समाजवादी विचारों के लिए समर्पित किया वह अपने आप में एक मिसाल है। ललितपुर के हर वर्ग के बीच में अत्याधिक लोकप्रिय रहे श्री रजक जब भी लखनऊ आते थे तो हमेशा मेरे आवास पर अवश्य आते थे घंटों ललितपुर के विकास और यहां की व्यवस्था में आ चुकी जडता के ऊपर विमर्श होता था। श्री रजक जनचेतना के ऐसे संवाहक नेता थे जिन्होंने मूल्यों की खातिर अपने आपको राजनीति उस गंगा से विलग रखा जहां पद पाने के लिए हर तरह के समझौते किए जाते है।

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