शहरों में बेकारी दर 17.4 प्रतिशत बढ़ गई है-अखिलेश यादव

लखनऊ दिनांक-30.05.2021 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि डबल इंजन की भाजपा सरकार में 4 वर्ष केंद्र के साथ और 4 वर्ष राज्य सरकार के जोड़कर इनमें उपलब्धियों के नाम पर नतीजा शून्य बटा शून्य ही रहा है। भाजपा ने अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य ढांचा, कानून व्यवस्था सबको बर्बाद कर रसातल में पहुंचा दिया है। विकास और शांति व्यवस्था के हर मोर्चे पर भाजपा ने अपनी विफलता के झंडे गाड़ रखे हैं। फिर भी भाजपाई गांव-शहर तक अपने झूठे सेवा कार्य की कहानियां बखानने जा रहे हैं। उन्हें 8 वर्षो का हिसाब जनता को देना होगा। अस्पतालों में इलाज-दवा-आक्सीजन के अभाव में तड़प-तड़प कर और कफन-दफन के बिना मरे हुए लोगों की आत्माएं भाजपाई सरकार की कथित उपलब्धियों की सबसे बड़ी गवाह हैं। बढ़ती मंहगाई और गिरती अर्थव्यवस्था ने भारतीयों के जीवन ढांचे को ही बदल कर रख दिया है। सन् 2020-2021 में जीडीपी की दर में 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 9 मई 2021 का आंकड़ा है कि शहरों में बेकारी दर 17.4 प्रतिशत बढ़ गई है। लगभग 23 करोड़ लोग फिर गरीबी रेखा से नीचे आ गए हैं। लोगों की आय घटी, एक करोड़ से अधिक की नौकरी चली गई। बीमारी, घरेलू खर्च चलाने के लिए लोग काफी कर्ज लेने को मजबूर हुए हंै। अर्थव्यवस्था के नकारात्मक संकेतो के अनुसार जीवनस्तर अभी और गिरावट संभावित है। कोरोना संकट से अभी भी न निपटने की नीति है, न नियत है। इस महामारी से निपटने में भाजपा सरकार की विफलता जगजाहिर है लेकिन अपनी प्रशंसा के लिए प्रधानमंत्री जी ने 8 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में ऐलान कर दिया था कि ‘हमने वैक्सीन के बिना कोविड को हरा दिया‘ मुख्यमंत्री जी भी झूठ की नाव में सवार अपनी उपलब्धियों का बखान करते रहे। नतीजा यह निकला कि कोरोना महामारी के दूसरे दौर में अस्पतालो में दवा, इलाज के साथ आक्सीजन के भारी अभाव से हाहाकार मच गया। सरकारी आंकड़ो से ही 3,22,512 मौतें हो गयी जबकि अन्य संचार माध्यमो ने मौतो की संख्या कहीं अधिक बताई है। प्रदेश में समाजवादी सरकार में जो व्यवस्थाएं की गई थी, भाजपा सरकार ने उन्हें द्वेषवश बर्बाद कर दिया। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से हालात बिगड़ते गए। गांवो में शहरों से ज्यादा संक्रमण फैला। अस्पतालों में लापरवाही की हद हो गई जब भाजपा विधायक तक के परिवारीजनों की जानें चली गई और उनकी शिकायतों पर सुनवाई तक नहीं हुई। राज्य में सत्ता संरक्षित जहरीली शराब पीकर हजारों मौतें हो गई। पंचायत चुनावो में उत्तर प्रदेश में 1600 से ज्यादा शिक्षकों की दुखद मृत्यु हो गई। कोरोना काल में भाजपा सरकार द्वारा बेवजह की सख्ती के कारण कारोबारी और ट्रान्सपोर्टर्स परेशान है। बुनकरों का रोजगार ठप्प है। होटल, रेस्त्रां, लाज बंद होने से पर्यटन का धंधा बंद है। भाजपा सरकार में महिलाएं और बेटियां बेहाल रही। उ0प्र0 में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में 5,844 सीटों पर धांधली हुई। नोटबंदी, जीएसटी थोपकर समस्त व्यापारिक गतिविधियों को चौपट कर दिया गया। अर्थव्यवस्था में ग्रामीण कृषि का प्रथम स्थान आता है। भाजपा राज में गांव पूर्णतया उपेक्षित है। खेती-किसानी बर्बाद है। नहीं फसलों का एमएसपी दाम मिल रहा है और नहीं बकाये का भुगतान हो रहा है। बैंक कर्ज से राहत और कृृषि के काले कानूनो से निजात नहीं मिल रही है। मरीजो के उपयोग में आने वाली दवाएं गायब, काला बाजारियों की चांदी, प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने को आंकड़ो में हेराफेरी का खेल कर रही है। सच तो यह है कि न गंगा माई के, न गोमाता के भाजपाई सिर्फ जनता को छल कर सत्ता हासिल करने के एक मात्र काम में लगे रहने वाले जीव हैं। गोशालाओं में गाएं मर रही है, आदि गंगा गोमती में नालो की गंदगी के साथ जलकुंभी छाई है, गंगा की निर्मलता प्रदुषित हो गई है। भाजपाई छद््म राष्ट्रवाद और खोखली नैतिकता की आड़ में प्रदेश की जनता को ठगने का काम कर रहे है। जनता अब भाजपा सरकार से सन् 2022 में निजात पाने का संकल्प कर चुकी है। वह पुनः समाजवादी सरकार बनाएगी ताकि प्रदेश फिर उत्तम प्रदेश बनने की दिशा में चल सके। वैसे भी लाखों मौतों के प्रति संवेदनहीनता दिखाने वाली भाजपा सरकार के ‘दिन है बचे चार‘ अब जनता नहीं करेगी माफ।

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