वर्चुअल बैठक में पर्यावरण गांधी सुंदरलाल बहुगुणा को श्रद्धाजंलि अर्पित की

ललितपुर। पदमविभूषण अलंकरण से सम्मानित पर्यावरण विद् सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर नेहरु महाविद्यालय पर्यावरण विभाग के तत्वावधान में गूगलमीट के माध्यम से श्रद्धांजलि सभा आयोजितकी गयीए इसमें पर्यावरण गांधी सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर शोक व्यक्त कर श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। बर्चुअल बैठक में नेमवि प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा जी का जन्म 09 जनवरी 1927 को टिहरी गढ़वाल के सिल्यारा गांव में हुआ था। बी.ए. उत्तीर्ण कर पत्नी विमला नौटियाल के सहयोग से उन्होंने सिल्यारा में ही पर्वतीय नवजीवन मंडल की स्थापना की। सन 1949 में मीराबेन व उक्क्र बाप्पा के सम्पर्क में आने के उपरान्त दलित विद्यार्थियों के उत्थान के लिए ठक्कर बाप्पा हास्टल की स्थना की। दलितों के उत्थान और समाजसेवा को अपना लक्ष्य बनाया और भूदान आदंोलन, दलित उत्थान, शराब विरोधी आंदोलनों में बढ़चढ कर भाग लिया। वृक्षों की रक्षा के लिए उनके द्वारा चिपको आंदोलन चलाया गया जिससे उन्हें वृक्षमित्र कहा जाने लगा साथ ही वर्ष 1981 से 1983 के मध्य उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए लगभग 5000 किमी की। कार्यवाहक प्राचार्य एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डा.ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि प्राणवायु के लिए संघर्ष करने वाले सुंदरलाल बहुगुणाजी को वर्ष 1986 में रचनात्मक कार्यो के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार, 1987 में चिपको आंदोलन के लिए लिराइट लाइवलीहुड, 1989 में आईआईटी रूडक़ी द्वारा डाक्टर की मानद उपाधि, 1998 में पहल सम्मान, 1999 गांधी सेवा सम्मान एवं वर्ष 2009 में पदम विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था। कृषि संकाय विभागाध्यक्ष डा. हरीश चंद्र दीक्षित ने कहा कि पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा टिहरी बांध के कड़े विरोधी रहे। सन 1986 में टिहरी बांध में जमीन एवं पेड़ों की कटाई रोकने एवं बांध प्रभावितों के हित में उनके द्वारा 74 दिन की भूख हड़ताल की गई थी। जिससे सरकार को बांध प्रभावितों के हितों में फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। डॉ राजीव निरंजन ने कहा तत्कालीन पर्यावरण मत्री ने एक समिति गठित कर पुनरावलोकन का आश्वासन देकर 17 वें दिन उनका अनशन समाप्त कराया था। अन्य वक्ताओं ने कहा कि पदम विभूषण रत्न से सम्मानित सुंदरलाल बहुगुणा शराब के विरोध में, वृक्षों व पर्यावरण संतुलन के लिए चिपको आंदोलन, ग्रामीणों के हित में टिहरी बांध का विरोध तथा दलितों के उत्थान के लिए अनेक कार्य किए गए। उनके जनहितैषी कार्यों को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनका जाना एक अपूर्णणीय क्षति है। अंत में वक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर सुंदरलाल बहुगुणा को श्रद्धाजंलि अर्पित की। वर्चुअल बैठक में डा.हरीश चंद्र दीक्षित, डा.राजीव निरंजन, डा.जगवीर सिंह, डा.अमित सोनी, धीरेन्द्र तिवारी, चंद्रभूषण शर्मा, फहीम बख्श, अंकित चौबे, हरीप्रसाद, रवि कुमार आदि उपस्थित रहे।

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