राष्ट्रीय आपदा में ट्रामा सेंटर के अंदर एक देवदूत-डॉक्टर संदीप तिवारी

देश घनघोर संकट के दौर से गुजर रहा है चारों तरफ कोरोना वायरस हमला बोल रहा है पूरे देश मे कोरोना वायरस की दहशत है ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के केजीएमयू के ट्रामा सेंटर के हेड डॉक्टर संदीप तिवारी जो खुद कोविड पॉजटिव हो गए थे संदीप जी की मां का निधन कोरोना के कारण हो गया।संदीप तिवारी जी के एक भाई कोविड पॉजटिव हो गए थे ऐसी परिस्थिति में भी जान हथेली पर रख कर ट्रामा सेंटर के अंदर कोविड के पीड़ित एक एक इंसान की एक एक सांस को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे है उनकी पूरी टीम संघर्ष कर रही है जहां पूरे प्रदेश ऑक्सीजन के लिए त्राहि त्राहि पड़ी हुई है, एक एक इंजेक्शन के लिए त्राहि त्राहि पड़ी हुई है जीवन रक्षछक दवाइयों के लिए त्राहि त्राहि पड़ी हुई है ऐसी हालत में एक खोजी पत्रकार ने अपनी खुली आँखों से ट्रामा सेंटर में सभी बस्तुओं की 24 घंटे उपलब्ध्ता देखी है। सरकार की भी चूक देखी है जब ऑक्सीजन के सिलेंडर की काला बाजारी हो रही थी, इंजेक्शन की कालाबाजारी हो रही थी दवाइयों की कालाबाजारी हो रही थी और सरकार के संज्ञान में आने बाबजूद इन गद्दारों के खिलाफ कार्यवाही सरकार ने नही की। उसी के उलट केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में बेड उपलव्ध थे,24 घंटे ऑक्सीजन उपलब्ध थी ,इंजेक्शन उपलव्ध थे,दवाइयां उपलव्ध थी।24 घण्टे डॉक्टर उपलव्ध थे,24 घंटे पैरा मेडिकल स्टाफ मौजूद था,24 घंटे नर्स उपलब्ध थी,24 घंटे सफाई कर्मी उपलव्ध थे तो पूरे उत्तर प्रदेश में किस बात की त्राहिमाम त्राहिमाम मची हुई थी। में एक बात डंके की चोट पर कह सकता हूँ इस राष्ट्रीय आपदा के समय जितना अच्छा इलाज सरकारी अस्पतालों में हुआ है,जितनी मेहनत सरकारी डॉक्टरों ने है उनको उनका श्रेह मिलना चाहिए क्यो की सभी ने अपनी जान हथेली पर रखकर एक एक कोविड से पीड़ित नागरिक की जान बचाई है। आलोचना करने के लिए शिर्फ़ आलोचना नही करनी चाहिए। संकट के समय शिर्फ़ आलोचना करना ही मकसद नही होना चाहिए। डॉक्टर संदीप तिवारी इस राष्ट्रीय आपदा में ट्रामा सेंटर के अंदर एक देवदूत बनकर खड़े हुए है जिस तरह इनकी पूरी टीम को एक एक सांस बचाने के लिए संघर्ष करते हुए देखा है ये काबिले तारीफ है इसलिए कहा गया धरती पर कही भगवान है और इन शब्दों की प्रमाणिकता जाननी हो तो आप ट्रामा सेंटर आकर देख सकते है। डॉक्टर संदीप तिवारी हमारे लिए देवदूत बनकर खड़े हो गए जब मेरी पत्नी सुनीता गुप्ता की ऑक्सीजन सेचुरेसन्न 55 रह गया था और संदीप जी घर आकर सुनीता जी को ट्रामा सेंटर ले जाकर भर्ती करबाया। और आज सुनीता जी को दूसरा जीवन देने वाले डॉक्टर संदीप तिवारी जी को में और मेरे बच्चे कोटि कोटि प्रणाम करते है। सलूट डॉक्टर संदीप तिवारी जी। आप जैसे डॉक्टर की वजह से ही ये पवित्र पेशा गर्व से देखा जाता रहेगा। इस पूरी पोस्ट में एक एक शब्द एक पत्रकार ने जो ट्रामा सेंटर में अपनी आंखों से देखा है उससे रूबरू करबाया गया है। पत्रकार अनूप गुप्ता के विचार

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