मातृ मृत्यु के मूल कारणों को चिन्हित कर काम करने की है जरूरत : अपर निदेशक

शिवम अग्निहोत्री
ललितपुर। मण्डल में मातृ मृत्यु को कम करने और उसके मूल कारणों को चिन्हित कर उसपर गुणवत्ता पूर्ण कार्य करें के उद्देश्य से शुक्रवार को अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य के कार्यालय में अपर निदेशक डा.अल्पना बरतारिया की अध्यक्षता में मण्डल स्तरीय मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक हुई। बैठक का संचालन संचालन सिफ्सा/एनएचएम के मण्डलीय परियोजना प्रबंधक आनंद चौबे के द्वारा किया गया। बैठक में मातृ मृत्यु के कारणों पर चर्चा करते हुये अपर निदेशक ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व हर महिला का मौलिक अधिकार है, परन्तु हमारे देश में कई माताएं गर्भावास्था या प्रसव पीड़ा के दौरान समय से सेवाएँ न मिलने या अज्ञानता के कारण अपना जीवन खो देती हैं। इसे प्रभावी तरीके से नियंत्रित करना आवश्यक है। अपर निदेशक ने निर्देश दिया कि हम बहुत समय से कितनी और कैसे मातृ मृत्यु हुयी इस पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इन मृत्यु के पीछे के मूल कारणों का पता लगाया जाए, हम सिर्फ यह नहीं कह सकते कि गर्भवती के अंदर खून की कमी थी, बल्कि वह प्रसव के दौरान भी इस स्थिति में क्यों रही, हमें इन कारणों का पता लगाकर उस पर कार्य करने की जरूरत है। उनके सामाजिक कारणों जैसे कि क्या समय से प्रसव पूर्व जांच के लिए आई या नहीं, क्यों नहीं आयी, घर में कैसा माहौल रहा, प्रसव के समय ही अस्पताल आयी तो इसके पीछे के क्या कारण थे आदि, को चिन्हित किया जाए और उनसे निपटने की रणनीति बनाई जाए। जिससे कि मातृ मृत्यु की दर को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रसव की संभावित तिथि के एक माह पूर्व संबन्धित महिला की सम्पूर्ण जांच हुई है या नहीं यह सुनिश्चित कर लिया जाए। यदि जांच नहीं हुई तो उस तिथि से आगामी माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर उसकी सम्पूर्ण जांच कराना सुनिश्चित किया जाए। वर्तमान में ओपीडी सुविधा बंद है लेकिन हर माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे में सभी गर्भवतियों की जांच और उनमें उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था को चिन्हित करना बहुत जरूरी है। चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों को उनकी अवस्था को लेकर टेलीफोन के माध्यम से फॉलोअप किया जाए। वर्ष 2020-21 में मण्डल में झाँसी में 85 मातृ मृत्यु हुयी जिसमें 43 मातृ मृत्यु अन्य कारणों में अंकित हुयी, वही जालौन में 29 मृत्यु में 21 अन्य कारणों में और ललितपुर में 16 मातृ मृत्यु में 10 मातृ मृत्यु को अन्य कारणों में अंकित किया गया। अपर निदेशक ने निर्देश दिये कि जो टीम मातृ मृत्यु की ऑडिट कर रही है, उन्हें दुबारा प्रशिक्षण दिया जाए। क्योंकि बहुत सी मातृ मृत्यु के कारणों को अन्य में अंकित किया जा रहा है, जबकि उनके मूल कारण चिन्हित करना बहुत जरूरी है। अपर निदेशक ने मण्डल के सभी जनपदों को मातृ मृत्यु पर माहवार समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिये। बैठक में मण्डलीय परियोजना प्रबंधक ने गर्भावस्था के दौरान होने वाले तीन डिलेज (देरी) के बारें में सचेत किया। उन्होने बताया कि गर्भवती को कभी भी देखभाल लेने के निर्णय में देरी, उचित देखभाल तक पहुंचने में देरी, गुणवत्ता पूर्ण और पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने में देरी नहीं करनी चाहिए। बैठक में झाँसी और जालौन ने दो-दो मातृ मृत्यु केस के बारें में प्रस्तुति भी दी। बैठक में मण्डल के सभी जनपदों के संयुक्त निदेशक डा.रेखा रानी, नोडल अधिकारी डीपीएमयू यूनिट के सदस्य उपस्थित रहे।

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