संगीतज्ञ डाॅ. शरदमणि त्रिपाठी ने सिखायी भजन गायन की बारीकियां

लखनऊ। मीराबाई के सुप्रसिद्ध भजन चलो मन गंगा जमुना तीर के गायन अभ्यास के साथ ही लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय ऑनलाइन भक्ति संगीत कार्यशाला का गुरुवार को समापन हो गया। संस्कार भारती गोरक्ष प्रान्त के अध्यक्ष एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ संगीतज्ञ डा. शरदमणि त्रिपाठी के निर्देशन में हुई इस कार्यशाला में गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका के पदों के साथ ही मीराबाई के भक्ति पदों का स्वराभ्यास कराया गया। कोरोना काल में लोगों को निराशा व अवसाद से बाहर निकालने तथा शान्ति हेतु आयोजित इस कार्यशाला में देश-विदेश के 85 प्रतिभागी थे जिसमें पति-पत्नी, मां-बेटी, प्रोफेसर्स, सेवानिवृत्त अधिकारी, व्यापारी व गृहिणियां सम्मिलित रहे। समापन संध्या में कार्यशाला निर्देशक डाॅ. शरदमणि त्रिपाठी ने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से संगीत ईश्वर को प्राप्त करने का साधन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साधना की शक्ति ईश्वर को भी प्रकट होने पर मजबूर कर देती है। संगीत भी एक साधना है जिसे स्वरों के निरंतर अभ्यास से प्राप्त किया जाता है और सकता है। हमारे ग्रंथो में भी संगीत को मुक्ति मार्ग के रूप में बताया गया है। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि सात दिनों तक चली कार्यशाला में श्री रामचन्द्र चरणौ मनसा स्मरामि श्लोक के गायन के साथ ही सीताराम सीताराम सीताराम बोल, तुलसीदास कृत विनय पत्रिका के पद रघुबर तुमको मेरी लाज, सदा सदा मैं सरन तिहारी तुमहि गरीब निवाज, तू दयालु, दीन हौं, तू दानि हौं भिखारी, हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पापपुंजहारी तथा राम जपु, राम जपु राम जपु बावरे, घोर भव-निर-निधि नाम निज नाव रे के साथ ही मीराबाई के पद हरि तुम हरो जन की पीर हरो जन की पीर, द्रोपदी पत राखिबे को तुरत बढ़ायो चीर और चलो मन गंगा यमुना तीर, गंगा जमुना निर्मल पाणी, सीतल होत सरीर आदि भजन सिखाये गये। इसके साथ ही सुप्रसिद्ध गायिका मैनावती देवी के लिखे भोजपुरी निर्गुन गीत भजन बिन बीत गईल जिंदगानी का भी अभ्यास कराया गया। कार्यशाला में श्रीमती आभा शुक्ला, अपर्णा सिंह, अनुराधा दीक्षित, अनुमेहा गुप्ता, अरुणा उपाध्याय, आशा श्रीवास्तव, आशा सिंह रावत, अंजलि सिंह, अम्बुज अग्रवाल, डॉ.अनु शर्मा, डॉ. कुमारी अनीता, भारती श्रीवास्तव, भावना शुक्ला, चित्रा जायसवाल, दीपक गुप्ता, गौरव गुप्ता, डॉ.इन्दु रायजादे, ज्योति किरन रतन, कल्पना सक्सेना, कल्पना त्रिपाठी, कंचन श्रीवास्तव, कान्ति दीक्षित, कुमकुम मिश्रा, कुसुम वर्मा, ललिता पाण्डे, मधु श्रीवास्तव, मंजु श्रीवास्तव, मुक्ता चटर्जी, मुदिता अग्रवाल, मीतू मिश्रा, मधुलिका श्रीवास्तव, नीलम वर्मा, नीलम पाण्डेय, नीता गुप्ता, निधि निगम, नीरा मिश्रा, नीति दरबारी, प्रीति श्रीवास्तव, पार्वती यादव, पूजा द्विवेदी, पूनम माथुर, पूनम मिश्रा, पूनम सिंह, प्रियालक्ष्मी, डॉ. प्रतिभा मिश्रा, प्रमिला शर्मा, प्रणव श्रीवास्तव, रश्मि उपाध्याय, रत्ना शुक्ला, रंजना शंकर, रंजना भार्गव, रीता पाण्डेय, रेखा अग्रवाल, डॉ. रीना मिश्रा, रीता श्रीवास्तव, रूपाली रंजन श्रीवास्तव, रमा अग्निहोत्री, राजनारायण वर्मा, सर्वेश माथुर, सौरभ कमल, साधना भारती, साधना मिश्रा, सुनीता श्रीवास्तव, सुमन पाण्डा, सुमन पाण्डेय, सुमन शर्मा, साक्षी संजय केलकर, संगीता दूबे, संगीता खरे, सरिता अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, स्वरा त्रिपाठी, शारदा पाण्डेय, शीला शर्मा, शिवांगिनी येशु युवराज, शशि सिंह, सुषमा अग्रवाल, डॉ. सुरभि सिंह, डाॅ. सरोजिनी सक्सेना, पुणे से सुधा द्विवेदी, उन्नति अवस्थी, उषा किरन पाण्डेय, उषा पाण्डिया, वन्दना शुक्ला, प्रो.विनीता सिंह, विभा श्रीवास्तव आदि प्रतिभागी सम्मिलित हुए। मां-बेटी और पति-पत्नी भी रहे प्रतिभागी : कार्यशाला में मां-बेटी और पति-पत्नी सहित लगभग 83 प्रतिभागियों ने एक साथ कार्यशाला में भक्ति संगीत सीखा। भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त सर्वेश माथुर और उनकी पत्नी पूनम माथुर, राजनारायण वर्मा व उनकी पत्नी श्रीमती नीलम वर्मा, केनरा बैंक में कार्यरत कल्पना त्रिपाठी और उनकी बेटी स्वरा भी भजनों के सुर साध रही हैं। मुम्बई से मुदिता अग्रवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय की डाॅ. अनु शर्मा डाॅ. कुमारी विनीता, पुणे से सुधा द्विवेदी, हरियाणा से संगीता दुबे, कानपुर से कल्पना सक्सेना आदि के साथ ही केजीएमयू के नेत्र विभाग की अध्यक्ष रहीं प्रो. विनीता सिंह इन दिनों अमेरिका में हैं और वहीं से ऑनलाइन जुड़कर भजन गायन की बारीकियां सीखीं। Sudha Dwivedi

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