पुष्पेन्द्र पटेल के अंधे हत्याकाण्ड का आज तक नहीं हुआ खुलासा

पीडि़त परिजनों ने एसपी को भेजा शिकायती पत्र
ललितपुर। पन्द्रह नवम्बर 2020 को लापता हुये पुष्पेन्द्र पटेल का शव गोविन्द सागर बांध में हाथ-पैर बंधा हुआ मिला था। इस अंधे हत्याकाण्ड का आज तक खुलासा न होने से परिजन इंसाफ की गुहार लगाये पुलिस विभाग के चक्कर काटने को विवश हैं। ग्राम सतरवांस निवासी दयाराम पटेल पुत्र नाथूराम ने एसपी को भेजे शिकायती पत्र में पुत्र की हत्या का मामला पर्दाफाश करने और हत्यारोपियों को शीघ्र पकडऩे की गुहार लगायी है। पीडि़त ने एसपी को दिये शिकायती पत्र में बताया कि उसका 16 वर्षीय पुत्र पुष्पेन्द्र पटेल अपने आवास पटेल नगर से अपहृत कर लिया गया था, जिसके सम्बन्ध में रिपोर्ट पुष्पेन्द्र पटेल के मामा सुजान सिंह निरजन पुत्र मूरत सिंह निरजन द्वारा 14 नवम्बर 2020 को थाना कोतवाली ललितपुर में दर्ज करायी गयी थी। उसके बाद हम परिजनों द्वारा उसको लगातार तलाश करने के दौरान 16 नवम्बर 2020 को सुबह 9 बजे उसकी लाश गोविन्द सागर बांध के साईफन के पास पानी में उतराती हुयीं दिखाई दी। जिसकी सूचना मेरे दूसरे पुत्र प्रद्युम्न पटेल द्वारा थाना कोतवाली ललितपुर को उसी दिन दी गयी थी। मृतक के हाथ पांव किसी सफेद टैप से तथा मुंह रूमाल से बंधा था तथा उसके मुंह पर चोटों के निशान भी थे जिससे अनुमान लगाया जा रहा था कि किन्हीं हत्यारों ने उसका अपहरण करने के बाद उसके हाथ पाव व मुंह बांधकर उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। बताया कि यह प्रकरण थाना कोतवाली ललितपुर द्वारा मुकदमा अपराध सं. 864/2020 धारा 302 आई.पी.सी. में पंजीकृत किया गया। बताया कि तब से लगभग माह का लम्बा समय बीतने के बाद अभी तक मेरे पुत्र की रहस्यमय हत्या की पर्दाफाश नहीं हो सका हत्यारों के बेसुराग रहने से उनका मनोबल बढ रहा है तथा हम परिवारजन बेहद भयभीत एवं ससंकित है कि जिस बदनियतों से हत्यारों ने हमारे निर्दोष पुत्र पुष्पेन्द्र पटेल की निर्मम हत्या की है कहीं हमारे किसी अन्य परिजन के साथ ऐसा ही दुखद हादसा न हो जाये। इस कारण हम सभी परिवारजन बड़ी भारी दहशत में है तथा हम परिवारजनों का अब किसी भी काम में मन नहीं लगता है तथा हमारी खेती किसानी व बच्चों की पढाई लिखाई भी चौपट हो रही है। पीडि़त ने एसपी से उक्त रहस्यमय हत्याकाण्ड का पर्दाफाश करते हुये हत्यारों को दण्डित कराने की गुहार लगाते हुये अन्यथा की स्थिति में धरना प्रदर्शन व आमरण अनशन जैसे कदम उठाने को विवश होने की बात कही।

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