सदा न्याय करने को प्रयत्नशील रहती थीं महारानी अहिल्याबाई : तिलक यादव

सादगी से मनायी गयी महारानी अहिल्याबाई होल्कर जयन्ती ललितपुर। समाजवादी पार्टी के तत्वाधान में महारानी अहिल्याबाई होल्कर की जयन्ती सादगी पूर्वक मनायी गयी। इस दौरान सपाईयों ने महारानी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर प्रकाश डालते हुये उनके द्वारा किये गये कार्यों को याद किया गया। इस दौरान सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव एड. ने अध्यक्षता करते हुये कहा कि अहिल्याबाई का जन्म चौंडी नामक गाँव में हुआ था जो आजकल महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के जामखेड में पड़ता है। सपा जिलाध्यक्ष तिलक यादव एड. ने कहा कि अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मन्दिर बनवाए, घाट बँधवाए, कुओं और बावडिय़ों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए-सुधरवाए, भूखों के लिए अन्नसत्र (अन्यक्षेत्र) खोले, प्यासों के लिए प्याऊ बिठलाईं, मन्दिरों में विद्वानों की नियुक्ति शास्त्रों के मनन-चिन्तन और प्रवचन हेतु की। और, आत्म-प्रतिष्ठा के झूठे मोह का त्याग करके सदा न्याय करने का प्रयत्न करती रहीं-मरते दम तक। ये उसी परम्परा में थीं जिसमें उनके समकालीन पूना के न्यायाधीश रामशास्त्री थे और उनके पीछे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई हुई। अपने जीवनकाल में ही इन्हें जनता 'देवीÓ समझने और कहने लगी थी। इतना बड़ा व्यक्तित्व जनता ने अपनी आँखों देखा ही कहाँ था। जब चारों ओर गड़बड़ मची हुई थी। शासन और व्यवस्था के नाम पर घोर अत्याचार हो रहे थे। प्रजाजन-साधारण गृहस्थ, किसान मजदूर-अत्यन्त हीन अवस्था में सिसक रहे थे। उनका एकमात्र सहारा-धर्म-अन्धविश्वासों, भय त्रासों और रूढिय़ों की जकड़ में कसा जा रहा था। न्याय में न शक्ति रही थी, न विश्वास। ऐसे काल की उन विकट परिस्थितियों में अहिल्याबाई ने जो कुछ किया-और बहुत किया। वह चिरस्मरणीय है। इस दौरान जिला उपाध्यक्ष रमेश ठेकेदार, व्यापार सभा जिलाध्यक्ष प्रदीप जैन चिगलौआ, प्रवक्ता खुशालचंद्र साहू, नगर अध्यक्ष राजेश झोजिया, अमर सिंह यादव, विजय यादव शिक्षक, सुरेन्द्र पाल सिंह, मु.आसिफ, रामचरन सुमन, भरत वनगुवां, राजेन्द्र सिंह प्रधान निवाहो, राजू यादव बालाबेहट, अजय बरार आदि मौजूद रहे।

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