प्रकृति पूजन की सांस्कृतिक परम्परा और वर्तमान परिवेश पर सजी चौपाल

प्रकृति का चिर संगी है मनुष्य : विद्याविन्दु सिंह
* आक्सीजन संकट ने समझाया प्राण वायु का मोल
* पर्यावरण चेतना के लिए चलेगा सतत अभियान
लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की 26वीं लोक चौपाल में प्रकृति पूजन की सांस्कृतिक परम्परा और वर्तमान परिवेश में उसकी प्रासंगिकता पर गम्भीर चर्चा हुई। चिन्ता जतायी गयी कि प्रकृति विजय की अंधी दौड़ का जब अन्त होगा तो सुस्ताने के लिए एक पेड़ की जरुरत होगी और तब हम तपती रेत पर पछताते हुए चलेंगे। शनिवार को आनलाइन आयोजित लोक चौपाल में चौधरी के रूप में सम्मिलित संगीत विदुषी प्रोफेसर कमला श्रीवास्तव, लोक विदुषी डा. विद्या विन्दु सिंह व लोक साहित्य मर्मज्ञ डा. रामबहादुर मिश्र ने लोक और प्रकृति के अंतरसम्बन्धों के प्रति व्यापक चेतना की अलख जगाने के निर्देश दिये। वरिष्ठ साहित्यकार डा. विद्या विन्दु सिंह ने कहा कि आज सुसंस्कृत व शिक्षित माना जाने वाला मनुष्य प्रकृति के चिर संगी रूप को भले ही भूल चुका हो किन्तु लोक मानस ने प्रकृति के विभिन्न रूपों की पूजा ही नहीं की अपितु सम्पूर्ण प्रकृति को अपने सुख-दुःख से जोड़ भी रखा है। नाना प्रकार की लोक कथाएँ और गीत पशु-पक्षी, वृक्ष-पुष्प, नदी-पर्वत आदि से जुड़े हुए मिलते हैं। उन्होंने कहा कि आज जब प्रकृति की उपेक्षा का भयावह परिणाम सामने आ गया है तो हम सही तरीके से प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते के बारे में सोचें, प्रकृति के उपर कृपा न करके अपने उपर कृपा करें क्योंकि प्रकृति निरन्तर हमारी रक्षा करती है। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने कहा कि कोविड की दूसरी लहर में उत्पन्न आक्सीजन संकट ने प्राण वायु का मोल समझाया है। जिस देश में सांझ के बाद फूल-पत्ती तोड़ना भी वर्जित रहा हो, वहां दिन-रात पेड़ों पर आरे चलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सामयिक परिस्थितियों से समन्वय स्थापित करते हुए हमें पुनः प्रकृति के साहचर्य को जीवंतता देनी ही होगी। चौपाल में नवयुग कन्या महाविद्यालय के इतिहास विभाग की अध्यक्ष डा. संगीता शुक्ला, हिन्दी विभाग की डा. अपूर्वा अवस्थी, डा. सुरभि सिंह, आभा शुक्ला, ज्योति किरन रतन, रेखा अग्रवाल, रेखा मिश्रा, रीता पांडेय, मुम्बई की तनु भार्गव, कानपुर की डा. पूनम द्विवेदी, अलका वर्मा, कंचन श्रीवास्तव आदि ने भी अपने विचार रखे। कानपुर की सुनीता पांडेय ने प्रकृति पूजा की और रुपाली श्रीवास्तव ने वृक्षदेव की आरती गायी। वरिष्ठ लोकगायिका इन्द्रा श्रीवास्तव, इन्दु सारस्वत, सुमन पाण्डा, मंजू श्रीवास्तव, रेनू दुबे, मधु श्रीवास्तव, नर्बदा श्रीवास्तव 'मधु', अंजलि सिंह, चित्रा जायसवाल, युवा लोक गायक गौरव गुप्ता, सुषमा अग्रवाल, विभा श्रीवास्तव, मेरठ की नीता गुप्ता, दिव्यांशी गुप्ता, पूनम सिंह नेगी आदि ने प्रकृति केन्द्रित गीत गाये। बाल कलाकार स्वरा त्रिपाठी ने पर्यावरण आधारित स्वरचित कविता सुनाई तथा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। बाल नृत्यांगना स्नेहा बिन्दल ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित चेतना गीत पर नृत्य प्रस्तुति दी। चौपाल में सर्वश्री राजनारायण वर्मा, परमानंद पांडेय, सरिता अग्रवाल, प्रो. विनीता सिंह, महामाया राजकीय महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डा. भारती सिंह, निवेदिता भट्टाचार्य, रीता श्रीवास्तव, अनीता श्रीवास्तव, हरिकृष्ण गुप्ता, सौरभ कमल, पुणे वाली सुधा द्विवेदी, शीला शर्मा, शालिनी सिंह आदि उपस्थित रहे।

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