अंतर्राष्ट्रीय विश्व परिवार दिवस/विशेष

इन्टरनेट के युग में समस्त भूमण्डल एक परिवार की ओर अग्रसर ललितपुर। अंतर्राष्ट्रीय विश्व परिवार दिवस पर आयोजित एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि हम अन्य न और कुटुम्बी, हम केवल एक हमीं हैं, की घोषणा बहुत पहले महाकवि जयशंकर प्रसाद ने अपने महाकाव्य कामायनी में बहुत पहले ही कर दी थी। प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के उपरांत संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन करके वसुधा के सभी मनुष्यों ने गोस्वामी तुलसीदास के संकल्प को साकार करने के लिए समस्त संसार को अयोध्या अर्थात अ+युद्ध समस्त झगड़े, टंटे-फसाद से मुक्त धरती को शांतिपूर्ण सह अस्तित्व युक्त बनाने के लिए सियाराम मय सब जग जानी, करहूं प्रणाम जोरजुग पाणी की छवि को प्रणाम किया था। जैसे-जैसे दुनिया में शांति, सद्भाव, समानता का विकास होगा, वैसे ही वैसे एक-एक मानव में एकता और सामंजस्य का सुप्त भाव हिलोंरें लेने लगेगा और केवल अवध में ही नहीं, न्याय और समता आधारित अयोध्या का विस्तार रामराज्य के रूप में सारी दुनिया में विस्तारित हो जायेगा। बड़ी सटीक घोषणा हमारे महान पूर्वजों ने की थी रामराज बैठे त्रिलोका, गये शोक, हर्षित सब लोगा। भारत की संस्कृति त्रैलोक्यंम को ही एक राष्ट्र मानती है क्योंकि सभी निरोगी हो, सभी सुखी हो और सबका कल्याण हो के उद्देश्य की पूर्ति में उसकी अखण्ड आस्था व विश्वास है, न कि 99 को दुख में डालकर अपना सुख तलाशनेव की लालसा वह सपने में भी नहीं कर सकता है। श्रीमदभागवत की कथा में कहा गया है कि सुदामाजी जब अपने अभिन्न मित्र श्रीकृष्णजी की राजधानी द्वारका से खाली हाथ लौट रहे थे और जैसे ही अपने गांव की सरहद पर आये तो देखा कि सूके कच्चे घर और झोपड़े सोने के बन गये हैं तो परम आनंद में फूले नहीं समाये, क्योंकि उनका एकाकी सुख सभी के सुख से जुड़ा हुआ था। हजारों साल पहले हमारे ऋषियों और मुनियों ने वसुधैव कुटुम्बकम यानि सारी दुनिया एक छोटा कुटुम्ब है अर्थात विश्वम भवति एक नीड़म समस्त भूमण्डल एक घोसला है जिसमें सभी दिशाओं और जातियों के पक्षी एक साथ बसेरा करते हैं। वेदों का सार भी या उसके निचोड़ को मात्र 6 शब्दों में कहा जा सकता है कि जो पिण्ड है, वही ब्रह्माण्ड है और जो ब्रह्माण्ड है, वहीं पिण्ड है। इसी अखण्ड विराट शक्ति से सम्पन्न व्यक्ति भी ब्रह्माण्ड की सम्पूर्ण शक्ति के साथ अलग नहीं बल्कि उसके केन्द्र में इसलिए वह मिलजुल कर जिस दिन ठान लेगा उसी दिन सारी धरती को एक परिवार बनने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती।

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