जिला पंचायत चुनाव : विस चुनाव से पूर्व सेमी फाइनल में बीजेपी को लगा बड़ा झटका...

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक आठ महीने पहले पंचायत चुनाव को 2022 का सेमीफाइनल माना जा रहा था, जिसमैं राज्य की सत्तारूढ़ बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. बीजेपी की स्थापना के दौर से ही अयोध्या-मुथरा-काशी एजेंडे में शामिल रहा है. बीजेपी इन तीनों जिलों के नाम पर अपनी सियासत यूपी में नहीं बल्कि देश भर में करती रही है. ऐसे में बीजेपी का इन तीनों जिलों में करारी हार होना बड़ा झटका है. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में लगातार सपा बीजेपी को मात देती जा रही है. मथुरा में बसपा का नंबर वन पर आना यह बता रहा है कि मायावती का सियासी असर अभी खत्म नहीं हुआ है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक आठ महीने पहले पंचायत चुनाव को 2022 का सेमीफाइनल माना जा रहा था. यह चुनाव सत्ताधारी बीजेपी के साथ-साथ विपक्षी समाजवादी पार्टी, बीएसपी और कांग्रेस के लिए भी अहम है. गांवों की सरकार के लिए हो रहे इस चुनाव में पार्टियों की असली ताकत जिला पंचायत से तय होती है. पीएम मोदी के काशी में सपा जीती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी भाजपा की हालत चिंताजनक है. एमएलसी चुनाव के बाद भाजपा को जिला पंचायत चुनाव में भी काशी में करारी मात मिली है. जिला पंचायत की 40 सीटों में से बीजेपी के खाते में महज 8 सीटें आई हैं. वहीं, समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि उसे 14 सीटों पर जीत मिली. बसपा की बात करें तो उसने यहां पांच सीटों पर जीत हासिल की है, हालांकि बनारस में, अपना दल (एस)को 3 सीट मिली हैं. आम आदमी पार्टी और ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी 1-1 सीट मिली है. इसके अलावा 3 निर्दलीय प्रत्याशियों को भी जीत मिली है. 2015 में भी काशी में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन योगी सरकार के बनने के बाद बीजेपी ने जिला पंचायत की कुर्सी सपा से छीन ली थी... जिला पंचायत चुनाव के अब तक के नतीजों में सपा एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है. पश्चिमी यूपी में सपा के साथ गठबन्धन करने वाली रालोद भी एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है. अयोध्या-मथुरा-काशी में बीजेपी की करारी हार योगी सरकार की नींद उड़ा दी है. वहीं, दूसरी ओर राज्य की राजनीति में ये सवाल भी उछाल दिया है कि सूबे में लगभग अजेय नजर आ रही बीजेपी के मुकाबले क्या समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति की गति अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों तक बरकरार रख पाएगी ?
चंद्रशेखर की पार्टी ने सपा, रालोद व बसपा को पीछे कर रचा नया इतिहास
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में भाजपा के बाद आजाद समाज पार्टी मजबूत ताकत के साथ उभरी है। आजाद समाज पार्टी ने सपा, बसपा और रालोद से ज्यादा सीटें जीत कर राजनीतिक के गलियारे में एक मजबूत जगह बनाया है।बसपा के सामने सबसे बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। युवाओं में जिस तरह से चंद्रशेखर का खुमार चढ़ रहा है। आने वाले समय में आजाद समाज पार्टी को मजबूत होने से रोकना कठिन हो सकता है। जिले में बसपा केवल तीन ही सीटों पर जीत का परचम लहरा पाई है। आजाद समाज पार्टी ने छह सीटों पर जीत का परचम लहरा कर मुजफ्फरनगर से लेकर राजधानी तक अपनी ताकत का करारा अहसास कराया है। बड़ी बात ये है कि रालोद और सपा भी आजाद समाज पार्टी से पीछे हैं। आजाद समाज पार्टी के जो समर्थित प्रत्याशी जीते हैं, उनमें वार्ड एक से सुरेशना ने जीत का परचम लहराया है। वार्ड पांच से तहसीन ने जीत का परचम लहराया हैं। वार्ड 12 से अमरकांत चीकू जीत का परचम लहराया हैं। वार्ड 28 से मुनीजा, वार्ड 35 से शीबा और वार्ड 36 से फरहाना ने जीत का परचम लहराया हैं।बड़ी बात यह है कि छह में से पांच महिला हैं। एक एससी, एक जाट और चार मुस्लिम हैं। इन वार्डों में भीम आर्मी से जुड़े एससी युवाओं का रुझान आजाद समाज पार्टी की तरफ रहा। हर वार्ड में एक हजार से तीन हजार तक एससी वोट प्रभावित हुए, जिन्होंने हार जीत के समीकरण बदल दिए।

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